भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम चरण में, मोदी-ट्रंप मुलाकात से पहले अधिकारियों का दावा; ऊर्जा साझेदारी और पश्चिम एशिया पर भी होगी अहम चर्चा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच जी7 शिखर सम्मेलन के इतर होने वाली महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक से पहले अधिकारियों ने संकेत दिया है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अपने "अंतिम चरण (लास्ट माइल)" में पहुंच चुका है और अगले कुछ हफ्तों में वार्ता पूरी..
एवियां (फ्रांस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच जी7 शिखर सम्मेलन के इतर होने वाली महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक से पहले अधिकारियों ने संकेत दिया है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अपने "अंतिम चरण (लास्ट माइल)" में पहुंच चुका है और अगले कुछ हफ्तों में वार्ता पूरी होने की उम्मीद है।
बुधवार को होने वाली यह बैठक पिछले 16 महीनों में दोनों नेताओं की पहली आमने-सामने की मुलाकात होगी। बैठक में व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने, ऊर्जा आयात बढ़ाने और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।
'अगले कुछ हफ्तों में पूरा होगा काम'
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "अमेरिका के साथ व्यापार समझौता अंतिम चरण में है। अब सिर्फ आखिरी दौर की प्रक्रिया बाकी है और अगले कुछ सप्ताह में इस पर काम पूरा हो जाएगा।"
ऊर्जा साझेदारी पर रहेगा विशेष जोर
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए स्रोतों में विविधता लाना चाहता है। इसी रणनीति के तहत अमेरिका से तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को दीर्घकालिक साझेदारी का महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है।
एक अधिकारी ने बताया, "भारत और अमेरिका दीर्घकालिक ऊर्जा साझेदारी को लेकर उत्सुक हैं। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच नई दिल्ली ऊर्जा आपूर्ति के नए विकल्प विकसित करने पर जोर दे रही है।"
220 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार, नई ऊंचाइयों का लक्ष्य
भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार पहले ही लगभग 220 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है और दोनों देश इसे नई ऊंचाइयों तक ले जाने का लक्ष्य बना रहे हैं।
पहले हुए प्रारंभिक समझौतों ने कृषि, प्रौद्योगिकी और अन्य क्षेत्रों में शुल्कों में कमी तथा बाजार तक बेहतर पहुंच का आधार तैयार किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मोदी-ट्रंप बैठक से हाल के वर्षों में टैरिफ और अन्य मुद्दों के कारण पैदा हुए मतभेदों को दूर करने का अवसर मिलेगा।
व्यापार समझौते में प्रगति होने पर अरबों डॉलर के निवेश का रास्ता खुल सकता है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को भी स्थिरता मिलेगी। वहीं ऊर्जा सहयोग दोनों देशों के रणनीतिक हितों को मजबूत करेगा।
जी7 में मोदी का संदेश: 'भरोसा करें, लेकिन सत्यापन भी करें'
जी7 के आउटरीच सत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर देते हुए स्पष्ट संदेश दिया।
सूत्रों के अनुसार उन्होंने कहा,
"भरोसा करें और सत्यापन भी करें। आज के समय में भरोसा सबसे दुर्लभ संसाधन बन गया है।"
प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी वैश्विक तनाव और बदलते भू-राजनीतिक माहौल के बीच देशों के बीच पारदर्शिता और विश्वसनीयता की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
कनाडा के प्रधानमंत्री ने की भारत की भूमिका की सराहना
भारतीय अधिकारियों ने बताया कि कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने जी7 शिखर सम्मेलन में भारत की भूमिका की खुलकर प्रशंसा की।
उनके अनुसार,
- भारत की मौजूदगी विकसित पश्चिमी देशों के सामने एक नई वास्तविकता प्रस्तुत करती है।
- भारत की भागीदारी जी7 को अधिक वैधता और व्यापक प्रतिनिधित्व प्रदान करती है।
- इससे ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) की आवाज को वैश्विक मंच पर मजबूती मिलती है।
मार्क कार्नी पहले भी कह चुके हैं कि जी7 अब अकेले दुनिया का नेतृत्व नहीं कर सकता और उभरती शक्तियों, विशेष रूप से भारत जैसे देशों के साथ व्यापक साझेदारी समय की आवश्यकता है।
जी7 में पश्चिम एशिया, यूक्रेन और आर्थिक मजबूती पर चर्चा
फ्रांस के एवियां में आयोजित जी7 सम्मेलन में पश्चिम एशिया संकट, रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक आर्थिक स्थिरता जैसे प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की गई।
भारत सहित आमंत्रित देशों की भूमिका इस बार पहले की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण रही। नई दिल्ली के लिए यह सम्मेलन एक ऐसे देश के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर माना जा रहा है, जो विकसित देशों और ग्लोबल साउथ के बीच सेतु की भूमिका निभा रहा है।
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