इज़राइल की मोसाद पाकिस्तानी परमाणु वैज्ञानिक ए.क्यू. खान की हत्या करने वाली थी, लेकिन बच गए..

इज़राइल की खुफिया एजेंसी मोसाद साल 2000 में पाकिस्तान के मशहूर परमाणु वैज्ञानिक अब्दुल क़ादिर खान (ए.क्यू. खान) को मारने वाली थी। इस मिशन का नाम रखा गया था ‘किदोन’ (Kidon), जिसका हिब्रू भाषा में अर्थ होता है ‘भाला’। इस मिशन के तहत मोसाद की विशेष इकाई किदोन खान की हत्या करने वाली थी, जब वे दक्षिण एशिया के एक देश की यात्रा पर आने..

इज़राइल की मोसाद पाकिस्तानी परमाणु वैज्ञानिक ए.क्यू. खान की हत्या करने वाली थी, लेकिन बच गए..
25-08-2025 - 12:21 PM
22-04-2026 - 05:53 PM

नयी दिल्ली। इज़राइल की खुफिया एजेंसी मोसाद साल 2000 में पाकिस्तान के मशहूर परमाणु वैज्ञानिक अब्दुल क़ादिर खान (ए.क्यू. खान) को मारने वाली थी। इस मिशन का नाम रखा गया था किदोन’ (Kidon), जिसका हिब्रू भाषा में अर्थ होता है भाला’। इस मिशन के तहत मोसाद की विशेष इकाई किदोन खान की हत्या करने वाली थी, जब वे दक्षिण एशिया के एक देश की यात्रा पर आने वाले थे। इसका उद्देश्य ईरान और पाकिस्तान के बीच संभावित परमाणु सौदे को रोकना था। इज़राइल को शक था कि पाकिस्तानी वैज्ञानिक ईरान को परमाणु बम बनाने में मदद कर रहे हैं।

पूर्व मोसाद प्रमुख शबताई शावित का खुलासा

पूर्व मोसाद प्रमुख शबताई शावित ने वर्ष 2023 में एक इंटरव्यू में इसका खुलासा किया था। उन्होंने कहा था, अगर हमें उनके इरादों की पूरी जानकारी होती, तो मैं अपने कमांडरों को उन्हें खत्म करने का आदेश दे देता। मेरा मानना है कि इससे इतिहास की दिशा बदल सकती थी।”

उनके पद छोड़ने के बाद जो नया अधिकारी मोसाद का प्रमुख बना, उसने इस योजना को अमल में लाना शुरू किया। एजेंटों को हाई-लेवल ट्रेनिंग देने और मिशन से संबंधित विभिन्न प्रकार के अभ्यास कराए गए।

ए.क्यू. खान पर लगातार नजर

प्रोपब्लिका की रिपोर्ट के अनुसार, योजना यह थी कि जैसे ही ए.क्यू. खान दक्षिण एशिया के किसी देश की यात्रा पर जाएंगे, उसी दौरान उनकी हत्या कर दी जाएगी। मोसाद एजेंट लगातार खान पर नजर रख रहे थे।
पूर्व मोसाद अधिकारी ने बताया था कि खान कई देशों के परमाणु हथियार कार्यक्रमों को लेकर रणनीतिक सलाह देने लगे थे, जिसे इज़राइल बेहद गंभीरता से ले रहा था। अधिकारी के मुताबिक, किसी भी देश का परमाणु बम बनाने की कोशिश करना गंभीर मामला है, खासकर इज़राइल के दुश्मन देशों के लिए।”
इज़राइल अब तक ईरान के दर्जनों परमाणु वैज्ञानिकों की हत्या कर चुका है। सिर्फ जून में ही कम से कम 20 ईरानी वैज्ञानिकों की हत्या की गई थी।

फिर क्यों नहीं मारा गया ए.क्यू. खान?

हालांकि यह मिशन कभी पूरा नहीं हो सका, क्योंकि इसमें अमेरिका बीच में आ गया। रिपोर्ट के मुताबिक, उस समय पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ ने अमेरिका के राष्ट्रपति बिल क्लिंटन को भरोसा दिलाया था कि वे ए.क्यू. खान को रोकेंगे।
मुशर्रफ ने आश्वासन दिया था कि खान किसी भी देश को परमाणु बम बनाने की जानकारी साझा नहीं करेंगे।

इज़राइल को भरोसा था कि खान ईरान को परमाणु बम बनाने में मदद कर सकते हैं, लेकिन अमेरिका ने मोसाद से यह मिशन रोकने के लिए कहा। यही वजह थी कि मोसाद को अपना यह सबसे खतरनाक मिशन स्थगित करना पड़ा।
एक वरिष्ठ मोसाद अधिकारी ने माना कि यह मिशन रोकने का फैसला बेहद कठिन था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय रिश्तों और सुरक्षा कारणों से इसे टालना पड़ा।

मुख्य बिंदु (HIGHLIGHTS)
  • इज़राइल की खुफिया एजेंसी मोसाद साल 2000 में पाकिस्तान के मशहूर परमाणु वैज्ञानिक ए.क्यू. खान की हत्या करने वाली थी।
  • मोसाद की विशेष इकाई किदोन’ उन्हें दक्षिण एशिया के एक देश में यात्रा के दौरान निशाना बनाने वाली थी।
  • इज़राइल को शक था कि पाकिस्तानी वैज्ञानिक ईरान को परमाणु बम बनाने में मदद कर रहे हैं।
  • पूर्व मोसाद प्रमुख शबताई शावित ने 2023 के इंटरव्यू में इसका खुलासा किया।
  • अमेरिका के हस्तक्षेप और परवेज़ मुशर्रफ के आश्वासन के बाद यह मिशन रोक दिया गया।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।