भारत पर सेकेंडरी टैरिफ रूस को युद्ध रोकने के लिए "आक्रामक आर्थिक दबाव" : वेंस

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे डी वेंस ने रविवार को कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस को यूक्रेन पर बमबारी रोकने के लिए “आक्रामक आर्थिक दबाव” बनाया है, जिसमें भारत पर लगाए गए “सेकेंडरी टैरिफ” भी..

भारत पर सेकेंडरी टैरिफ रूस को युद्ध रोकने के लिए "आक्रामक आर्थिक दबाव" : वेंस
25-08-2025 - 12:15 PM

वॉशिंगटन। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे डी वेंस ने रविवार को कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस को यूक्रेन पर बमबारी रोकने के लिए आक्रामक आर्थिक दबाव” बनाया है, जिसमें भारत पर लगाए गए सेकेंडरी टैरिफ” भी शामिल हैं।

वेंस ने यह बात एनबीसी न्यूज के कार्यक्रम मीट द प्रेस” को दिए एक विशेष साक्षात्कार में कही। उन्होंने कहा कि इस कदम से रूस के लिए अपनी तेल आधारित अर्थव्यवस्था से अमीर बनना मुश्किल हो जाएगा। ट्रंप प्रशासन भारत की ओर से रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदने को लेकर लंबे समय से आलोचनात्मक रुख अपनाए हुए है। दिलचस्प यह है कि अमेरिका ने चीन की आलोचना नहीं की है, जबकि चीन रूस का सबसे बड़ा कच्चे तेल का आयातक है।

भारत का रुख यह रहा है कि उसकी ऊर्जा खरीद, चाहे रूस से हो या अन्य देशों से, राष्ट्रीय हित और बाज़ार की परिस्थितियों से तय होती है।

वेंस ने भरोसा जताया कि अमेरिका रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध खत्म कराने में सफल होगा, भले ही इस महीने राष्ट्रपति ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बैठक के बाद कुछ अड़चनें सामने आई हों।
उन्होंने कहा, पिछले कुछ हफ्तों में ही हमने दोनों पक्षों से कुछ महत्वपूर्ण रियायतें देखी हैं।” कार्यक्रम की मॉडरेटर क्रिस्टन वेल्कर ने सवाल किया – अगर अमेरिका नए प्रतिबंध नहीं लगा रहा है, तो रूस पर दबाव कैसे बनेगा? आप उन्हें कैसे बातचीत की मेज पर ला पाएँगे और ज़ेलेंस्की के साथ बैठकर बमबारी रोकने को मजबूर करेंगे?”

जवाब में वेंस ने कहा – ट्रंप ने आक्रामक आर्थिक दबाव डाला है, जैसे भारत पर सेकेंडरी टैरिफ, ताकि रूस की तेल अर्थव्यवस्था से अमीर बनना मुश्किल हो।”
उन्होंने आगे कहा – उन्होंने यह साफ कर दिया है कि अगर रूस हत्याएं रोकता है, तो उसे वैश्विक अर्थव्यवस्था में दोबारा शामिल किया जा सकता है। लेकिन अगर वे नहीं रुकते, तो उन्हें अलग-थलग ही रहना होगा।”

इससे पहले 22 अप्रैल को जयपुर में बोलते हुए वेंस ने भारत से गैर-शुल्कीय बाधाएँ खत्म करने, अमेरिकी ऊर्जा और रक्षा उपकरणों की ज्यादा खरीद करने और अपने बाज़ारों तक अधिक पहुँच देने की अपील की थी। उन्होंने भारत-अमेरिका संबंधों के लिए “समृद्ध और शांतिपूर्ण 21वीं सदीका रोडमैप भी पेश किया था।

गौरतलब है कि ट्रंप प्रशासन द्वारा भारतीय वस्तुओं पर शुल्क को दोगुना कर 50% कर दिया गया है, जिसमें रूस से कच्चा तेल खरीदने पर 25% अतिरिक्त शुल्क शामिल है। इसके बाद से ही नई दिल्ली और वॉशिंगटन के रिश्ते तल्ख़ हो गए हैं।

अमेरिका का आरोप है कि भारत रूस से कच्चा तेल खरीदकर मॉस्को के युद्ध को फंड कर रहा है, लेकिन नई दिल्ली ने इसे सख़्ती से खारिज किया है।
फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हमले के बाद जब पश्चिमी देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाकर उसकी तेल सप्लाई से किनारा कर लिया, तो भारत ने रियायती दर पर रूसी तेल खरीदना शुरू किया।

शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी आलोचना पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, यह मज़ेदार है कि एक प्रो-बिज़नेस अमेरिकी प्रशासन के लोग दूसरों पर कारोबार करने का आरोप लगा रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा, यह तो बेहद अजीब है। अगर आपको भारत से तेल या पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने में दिक़्क़त है, तो मत खरीदिए। कोई आपको मजबूर नहीं करता। लेकिन, हकीकत यह है कि यूरोप खरीद रहा है, अमेरिका खरीद रहा है। अगर आपको पसंद नहीं, तो मत खरीदिए।”

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।