रूस व्यापार को लेकर भारत पर पीटर नवारो के आरोप: ‘टैरिफ महाराजा’ से लेकर ‘मोदी की यूक्रेन युद्ध’ तक
व्हाइट हाउस के ट्रेड एडवाइज़र पीटर नवारो ने एक बार फिर भारत पर रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर निशाना साधा है। वह लंबे समय से भारत की व्यापारिक नीतियों के आलोचक रहे हैं, चाहे मामला सैन्य उपकरण खरीद का हो या ऊर्जा सौदों का..
वॉशिंगटन। व्हाइट हाउस के ट्रेड एडवाइज़र पीटर नवारो ने एक बार फिर भारत पर रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर निशाना साधा है। वह लंबे समय से भारत की व्यापारिक नीतियों के आलोचक रहे हैं, चाहे मामला सैन्य उपकरण खरीद का हो या ऊर्जा सौदों का।
भारत ने साफ किया है कि उसकी ऊर्जा नीतियाँ बाज़ार में उपलब्ध विकल्पों और वैश्विक परिस्थितियों पर आधारित हैं। लेकिन नवारो का आरोप है कि भारत रूस की "युद्ध मशीन" को फंड करने में हिस्सेदार है, जिससे यूक्रेन पर हमला जारी है।
ट्रंप प्रशासन के अहम सहयोगी माने जाने वाले नवारो को अमेरिका के जवाबी टैरिफ (retaliatory tariffs) का प्रमुख रणनीतिकार माना जाता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार, 27 अगस्त से प्रभावी चेतावनी देते हुए भारतीय आयात पर 25% अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा की थी, क्योंकि भारत रूस से तेल खरीद जारी रखे हुए है। इसके बाद नवारो लगातार इस कदम का बचाव कर रहे हैं और भारत को निशाने पर ले रहे हैं।
'टैरिफ का महाराजा'
व्हाइट हाउस अधिकारी नवारो ने बार-बार भारत को इस उपनाम से संबोधित किया। उन्होंने यह टिप्पणी सबसे पहले ट्रंप के टैरिफ़ लागू करने के कुछ ही दिन बाद की थी। उन्होंने यह भी कहा था कि अमेरिका ने चीन (जो रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार है) पर समान दंडात्मक शुल्क नहीं लगाया क्योंकि मामला अलग था।
नवारो के शब्दों में, “यह समझना ज़रूरी है कि भारत पर लगाए गए टैरिफ़ का कारण बिल्कुल अलग है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है, जो भारत के रूस से तेल खरीदना बंद करने से इनकार से जुड़ा है। भारत टैरिफ़ का ‘महाराजा’ है।”
एक हफ़्ते बाद उन्होंने फाइनेंशियल टाइम्स में लिखे अपने लेख में फिर भारत को इसी नाम से पुकारा और भारत-रूस तेल व्यापार को “मौकापरस्ती” और वैश्विक प्रयासों के लिए “हानिकारक” बताया।
उन्होंने लिखा, “जब रूस यूक्रेन पर हमले जारी रखता है और भारत वित्तीय सहयोग करता है, तब अमेरिकी और यूरोपीय करदाताओं को यूक्रेन की रक्षा में अरबों डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। वहीं भारत अमेरिकी निर्यात पर ऊँचे टैरिफ़ और व्यापारिक दीवारें खड़ी कर देता है। तीन लाख से अधिक सैनिक और नागरिक मारे जा चुके हैं, नाटो की पूर्वी सीमा और असुरक्षित हो रही है और पश्चिम देश भारत के ‘ऑयल लॉन्ड्रिंग’ का बिल चुका रहे हैं।”
'क्रेमलिन का लॉन्ड्रोमैट'
अतिरिक्त टैरिफ की समयसीमा से ठीक पहले नवारो ने भारत पर हमले तेज कर दिए और इसे “क्रेमलिन का लॉन्ड्रोमैट” तक कह दिया।
हालांकि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “महान नेता” बताया और भारत के प्रति “प्यार” जताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
उनके शब्द थे, “आप जो कर रहे हैं वह शांति नहीं ला रहा बल्कि युद्ध को और बढ़ा रहा है।” नवारो ने आरोप लगाया कि भारत-रूस व्यापार “रिफाइनिंग से मुनाफ़ाखोरी की स्कीम” है। उन्होंने कहा, “भारत पर 25% टैरिफ इसलिए लगाया गया क्योंकि वह हमारे साथ व्यापार में धोखाधड़ी करता है। फिर 25% इसलिए क्योंकि वह रूस से तेल खरीदता है... उनके पास ऊँचे टैरिफ़ हैं, महाराजा टैरिफ़...। भारत-अमेरिका के बीच भारी व्यापार घाटा है, जो अमेरिकी कंपनियों को नुकसान पहुंचाता है।”
'शी जिनपिंग से नज़दीकी'
चीन पर अमेरिका ने रूस से तेल खरीद के लिए न तो कोई अतिरिक्त जुर्माना लगाया है और न ही कोई पेनल्टी घोषित की है। इसके बावजूद नवारो ने भारत पर आरोप लगाया कि वह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से नज़दीकी बढ़ा रहा है।
उन्होंने कहा, “भारत यह स्वीकार नहीं करना चाहता कि यूक्रेन में हो रहे ख़ून-ख़राबे में उसकी भी भूमिका है। वे शी जिनपिंग से नज़दीकी बना रहे हैं। उन्हें (भारत को) रूसी तेल की ज़रूरत नहीं है।”
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