कश्मीरी पंडितों की मांग , जम्मू-कश्मीर में मंदिरों की रक्षा के लिए वक्फ की तर्ज़ पर विशेष विधेयक लाया जाए
कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति (KPSS) ने जम्मू-कश्मीर और केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए मांग की है कि जैसे मुस्लिम समुदाय की संपत्तियों की रक्षा के लिए वक्फ अधिनियम है, उसी तरह हिंदू धार्मिक स्थलों और मंदिरों की रक्षा के लिए भी एक विधेयक पास किया जाए..
श्रीनगर। कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति (KPSS) ने जम्मू-कश्मीर और केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए मांग की है कि जैसे मुस्लिम समुदाय की संपत्तियों की रक्षा के लिए वक्फ अधिनियम है, उसी तरह हिंदू धार्मिक स्थलों और मंदिरों की रक्षा के लिए भी एक विधेयक पास किया जाए। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
KPSS अध्यक्ष संजय टिक्कू ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में 1400 से अधिक मंदिर और उनसे जुड़ी संपत्तियाँ अतिक्रमण की शिकार हो चुकी हैं। उनका आरोप है कि यह अतिक्रमण राजनीतिक वर्ग और प्रशासनिक तंत्र की मिलीभगत से हुआ है। टिक्कू ने कहा, "अगर वक्फ अधिनियम मुस्लिम समुदाय के हित के लिए लाया गया है, तो उसी आधार पर हम 'सनातन बोर्ड' की मांग कर रहे हैं, जो पूरे भारत और विशेष रूप से कश्मीर में मंदिरों की सुरक्षा के लिए काम करे।"
उन्होंने कहा कि कश्मीर घाटी में मंदिरों की हालत बदहाल है, क्योंकि वहां से पंडित समुदाय को पलायन करना पड़ा। ऐसे में इन मंदिरों की देखभाल और संरक्षण के लिए एक अलग 'श्राइन बोर्ड' का गठन किया जाए, जिसमें कश्मीरी पंडित समुदाय को प्रतिनिधित्व मिले।
टिक्कू ने आगे कहा, "लगभग 1400 संपत्तियाँ अतिक्रमण का शिकार हैं। फर्जी बिक्री दस्तावेज बनाए गए हैं, और ये सब बिना अधिकारियों और नेताओं की मिलीभगत के संभव नहीं है। KPSS का नया नारा है, 'सनातन बोर्ड बनाओ, और वक्फ बोर्ड व सनातन बोर्ड साथ मिलकर काम करें।"
KPSS ने यह भी कहा कि यह नैतिक रूप से निंदनीय और कानूनी रूप से अनुचित है कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने पिछले 35 वर्षों में एक बार भी मंदिरों के अतिक्रमण, अपवित्रीकरण, या हिंदू धर्मस्थलों की ज़मीन के अवैध हस्तांतरण पर आवाज नहीं उठाई, लेकिन जब वक्फ संपत्तियों के नियमन की बात आती है, तो अचानक संवेदना व्यक्त की जाती है।
इस मुद्दे पर भाजपा प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने कहा, "कश्मीरी पंडित समुदाय जो भी मांग कर रहा है वह पूरी तरह न्यायोचित है और उसे पूरा किया जाना चाहिए। जब उन्हें यहां से जबरन भगाया गया, तो उनकी जमीन और संपत्तियाँ हड़प ली गईं। अब अगर वे इसके लिए एक विधेयक की मांग कर रहे हैं, तो सरकार को वह विधेयक **तुरंत पास करना चाहिए।"
KPSS ने अंत में कहा, "न्याय, धर्मनिरपेक्षता और कानून के शासन के सिद्धांतों के तहत, हम अपनी स्पष्ट मांग दोहराते हैं: संसद और केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन को तुरंत एक समग्र 'मंदिर एवं धर्मस्थल संरक्षण, पुनर्स्थापना और पुनरुद्धार विधेयक' लाना चाहिए, जिसका उद्देश्य हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय की अपवित्र, कब्जाई या नष्ट की गई धार्मिक संपत्तियों की रक्षा, पुनर्निर्माण और लेखा-जोखा सुनिश्चित करना हो। यह कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं, बल्कि कानूनी आवश्यकता और नैतिक ज़िम्मेदारी है।"
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