कब है होली..बहुत कन्यूजन है भाई..? जानिये मुहूर्त के विषय में राय..

मन के मैल को जला डालो और यारी-दोस्ती के बहुरंगी गुलाल से मित्र मंडली को रंग डालो। नये सिरे से जिंदगी की शुरुआत करो..यही है होली का अर्थ। इस भाव के साथ आगे बढ़ते हैं तो परंपराओं के साथ आगे बढ़ना होता है। अपने शहर, गांव, मोहल्ले के लोगों के साथ त्योहार मनाने होते हैं..

कब है होली..बहुत कन्यूजन है भाई..? जानिये मुहूर्त के विषय में राय..
02-03-2026 - 12:35 PM

मन के मैल को जला डालो और यारी-दोस्ती के बहुरंगी गुलाल से मित्र मंडली को रंग डालो। नये सिरे से जिंदगी की शुरुआत करो..यही है होली का अर्थ। इस भाव के साथ आगे बढ़ते हैं तो परंपराओं के साथ आगे बढ़ना होता है। अपने शहर, गांव, मोहल्ले के लोगों के साथ त्योहार मनाने होते हैं।

लेकिन, कई बार परंपराओं का विचार मन में लाते हैं तो मुहूर्त के अनुसार ही कार्य करने की भी इच्छा रहती है। इस बार के होलिकोत्सव में विरार बाधा यह है कि होलिका दहन कब किया जाए और रंगोत्सव कब मनाया जाए।

शास्त्रीय परंपरा को मानें तो प्रश्न होलिका दहन फाल्गुन में पूर्णिमा तिथि को ही होना चाहिए। ज्योतिर्विद और पंडितों का कहना है कि पूर्णिमा तिथि होने के कारण इस बार 2 मार्च की रात्रि में होलिका दहन किया जा सकता है लेकिन इसके अगले दिन यानी 3 मार्च को रंगों वाली होली नहीं खेली जानी चाहिए क्योंकि इस दिन चंद्र ग्रहण लग रहा है। यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा इसलिए इसका सूतक लगेगा,जिसमें कोई भी पूजा-पाठ या शुभ काम नहीं होते हैं इसलिए रंगों वाली होली 4 मार्च को खेली जानी चाहिए।

उल्लेखनीय है कि पूर्णिमा तिथि 2 मार्च 2026 (सोमवार) शाम 05:55 बजे शुरू होगी और 3 मार्च 2026 (मंगलवार) शाम 05:07 बजे पर समाप्त होगी। इस बार पूर्णिमा पर यानी 2 मार्च को पूर्णिमा वाले दिन भद्रा रहेगी इसलिए इस दौरान तो होलिका दहन नहीं हो सकता है। वहीं 3 मार्च को चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण से 9 घंटे पहले सुबह से शुरू हो जाएगा ऐसे में लोग कन्फ्यूज हैं कि किस टाइम होलिका दहन किया जाएगा।

यह भी बता दें कि पंचांग के मुताबिक भद्रा काल 2 मार्च को 5: 18 PM प्रारंभ होकर 3 मार्च को 4: 56 AM तक रहेगा लेकिन भद्रा काल का पुच्छ भाग 3 मार्च को 12:50 AM से रात 2:02 AM तक है। चूंकि भद्रा के मुख काल में होलिका का दहन नहीं किया जा सकता जब कि इसके पुच्छ भाग में कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में होलिका दहन तकनीकी तौर पर 2 मार्च की रात को या कहें कि 3 मार्च को सुबह को ही होलिका दहन करना उचित रहेगा।

चूंकि ग्रहण काल में शुभ कार्य निषिद्ध माने गये हैं अतः बहुत से स्थानों पर 4 मार्च को रंगों वाली होली यानी धुलंडी मनाई जाएगी। लेकिन, कुछ पंडितों का कहना है कि चंद्र ग्रहण का अर्थ चंद्रमा पर ग्रहण से है जो शाम या रात्रि में प्रभावी होता है। इस अर्थ में सूतक काल जरूर नौ घंटे पहले यानी सूर्य की रोशनी में ही शुरू हो जाता है। भारत में सूतक काल तो पहले प्रारंभ हो जाएगा लेकिन चंद्रग्रहण विभिन्न स्थानों पर शाम 5 बजकर 18 मिनट से लेकर अलग-अलग समय पर होगा। रंगोत्सव के लिए कोई मुहूर्त विशेष का महत्व नहीं होता अतः 3 मार्च को सुबह से ही रंगोत्सव मना सकते हैं और संध्याकाल में स्नान के पश्तात मंदिरों के दर्शन और दान-पुण्य संबंधी काम कर सकते हैं।

पंडितों की एक राय यह भी है कि बहुत से स्थानों पर 4 मार्च को परीक्षाएं है और विभिन्न सरकारी-गैर सरकारी कार्यालयों में कार्य भी होगा। अतः जब आपके परिवार के लोग जब साथ हों, होली रंगोत्सव मना सकें तब मना लें ।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।