सितंबर में साउथ ब्लॉक से नए ‘एक्ज़िक्यूटिव एन्क्लेव-1’ में शिफ्ट हो सकता है पीएमओ
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) अगले महीने साउथ ब्लॉक से कुछ ही सौ मीटर दूर बने नए ‘एक्ज़िक्यूटिव एन्क्लेव-1’ में शिफ्ट हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक़, जल्द ही कैबिनेट सचिवालय भी राष्ट्रपति भवन से इस नए कार्यालय परिसर में स्थानांतरित हो जाएगा..
नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) अगले महीने साउथ ब्लॉक से कुछ ही सौ मीटर दूर बने नए ‘एक्ज़िक्यूटिव एन्क्लेव-1’ में शिफ्ट हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक़, जल्द ही कैबिनेट सचिवालय भी राष्ट्रपति भवन से इस नए कार्यालय परिसर में स्थानांतरित हो जाएगा। इस कॉम्प्लेक्स को एक नया नाम भी मिलने की संभावना है।
गृह मंत्रालय और कार्मिक मंत्रालय को लगभग पूरी तरह कर्तव्य भवन-3 में स्थानांतरित किया जा चुका है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी महीने किया था। मिली जानकारी के अनुसार, पीएमओ का स्थानांतरण सितंबर के दूसरे पखवाड़े में हो सकता है।
नए कॉम्प्लेक्स का नाम ‘सेवा’ से जुड़ा हो सकता है
अधिकारियों का कहना है कि सरकार की परंपरा रही है कि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के हिस्सों को नए नाम दिए जाएँ, जैसे राजपथ को कर्तव्य पथ और नॉर्थ ब्लॉक के एक हिस्से को कर्तव्य भवन। इसी तर्ज़ पर ‘एक्ज़िक्यूटिव एन्क्लेव-1’ का भी नाम संभवतः ‘सेवा’ (service) से जुड़ा रखा जाएगा।
पीएम मोदी ने तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद पीएमओ अधिकारियों से कहा था कि “पीएमओ सेवा का संस्थान बनना चाहिए और लोगों का पीएमओ होना चाहिए। इसे उत्प्रेरक एजेंट के रूप में काम करना चाहिए, जो पूरे सिस्टम में नई ऊर्जा और प्रकाश फैलाए।”
नॉर्थ व साउथ ब्लॉक बनेंगे संग्रहालय
नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक से दफ़्तरों को शिफ्ट करना बेहद अहम है क्योंकि सरकार चाहती है कि इन दोनों ऐतिहासिक इमारतों को जल्द से जल्द सार्वजनिक संग्रहालय ‘युगे युगीन भारत संग्राहलय’ में बदला जाए। हाल ही में प्रधानमंत्री ने कहा था कि इससे हर नागरिक भारत की समृद्ध सभ्यतागत यात्रा का अनुभव कर सकेगा।
ब्रिटिश काल में बनी नॉर्थ और साउथ ब्लॉक इमारतें लगभग 80 वर्षों से सत्ता का केंद्र रही हैं। यहाँ प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ-साथ रक्षा, गृह, विदेश और वित्त मंत्रालय के कार्यालय स्थित रहे हैं।
औपनिवेशिक मानसिकता से छुटकारे की सोच
सेंट्रल विस्टा रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट की मास्टर प्लानिंग में शामिल रहे एक वरिष्ठ सरकारी सूत्र ने बताया कि शीर्ष स्तर के दफ़्तरों को इन इमारतों से बाहर शिफ्ट करने का मुख्य कारण यही था कि औपनिवेशिक मानसिकता की छाप को मिटाया जा सके।
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