शशि थरूर ने कांग्रेस नेतृत्व से मतभेद स्वीकारे; नीलांबुर उपचुनाव प्रचार से बाहर रहने पर प्रतिक्रिया
कांग्रेस नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने गुरुवार को कहा कि उनकी पार्टी से कुछ मुद्दों पर मतभेद हैं और वे उचित समय पर इन बातों को पार्टी के भीतर ही उठाएंगे। यह बयान ऐसे समय आया है जब केरल में नीलांबुर उपचुनाव के लिए कांग्रेस के सभी स्तर के नेता, जिनमें वायनाड सांसद और पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी भी शामिल हैं..
नयी दिल्ली। कांग्रेस नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने गुरुवार को कहा कि उनकी पार्टी से कुछ मुद्दों पर मतभेद हैं और वे उचित समय पर इन बातों को पार्टी के भीतर ही उठाएंगे। यह बयान ऐसे समय आया है जब केरल में नीलांबुर उपचुनाव के लिए कांग्रेस के सभी स्तर के नेता, जिनमें वायनाड सांसद और पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी भी शामिल हैं, संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) के उम्मीदवार आर्यादन शौक़त के पक्ष में प्रचार कर रहे हैं, जबकि थरूर प्रचार से अनुपस्थित रहे।
पत्रकारों से बातचीत में थरूर ने कहा, "मैं पिछले 16 वर्षों से कांग्रेस में काम कर रहा हूं। मेरे कुछ मुद्दों पर पार्टी से मतभेद हैं, लेकिन मैं उन्हें पार्टी के भीतर ही उठाऊंगा। आज मैं इस पर सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहना चाहता। मुझे नेतृत्व से मिलकर बात करनी है। समय आने दीजिए, मैं चर्चा करूंगा..."
थरूर ने यह स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी बातचीत केवल सांसदों के प्रतिनिधिमंडल से जुड़े मामलों को लेकर थी।
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री से चर्चा केवल सांसदों के प्रतिनिधिमंडल से संबंधित विषयों पर थी। जब राष्ट्र से जुड़ा कोई मुद्दा होता है, तब हम सबकी ज़िम्मेदारी होती है कि हम देश के साथ खड़े रहें। जब भी देश को मेरी सेवा की आवश्यकता होगी, मैं हमेशा तैयार हूं।”
यह विवाद तब गहराया जब थरूर ने हाल ही में अमेरिका यात्रा के दौरान आतंकवाद पर भारत की "जीरो टॉलरेंस नीति" को लेकर एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था, जो केंद्र सरकार की कूटनीतिक पहल का हिस्सा था। इस यात्रा के दौरान 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर उनके कुछ बयान कांग्रेस के ही कुछ नेताओं को नागवार गुज़रे।
पैनामा में प्रवासी भारतीयों के एक कार्यक्रम में थरूर ने कहा था, “2016 में उरी हमले के बाद पहली बार भारत ने नियंत्रण रेखा (LoC) पार कर आतंकवादी अड्डे पर हमला किया। यहां तक कि करगिल युद्ध के दौरान भी भारत ने LoC पार नहीं की थी।”
उनके इस बयान पर पार्टी के भीतर से तीखी प्रतिक्रिया आई। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का एक पुराना वीडियो क्लिप साझा किया जिसमें वे कहते हैं कि यूपीए सरकार के दौरान भी कई सर्जिकल स्ट्राइक हुए थे। खेड़ा ने बिना टिप्पणी किए थरूर को टैग किया जो एक मौन आलोचना मानी गई।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भी सरकार की उस पहल की आलोचना की जिसमें थरूर जैसे विपक्षी नेताओं को विदेशी प्रतिनिधिमंडल में शामिल किया गया। उन्होंने इसे "घटिया राजनीतिक चाल" बताया और कहा कि ऐसा बिना किसी औपचारिक परामर्श के किया गया। रमेश ने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “कांग्रेस पार्टी प्रधानमंत्री और भाजपा के स्तर तक नहीं गिरेगी।”
कांग्रेस नेता उदित राज ने तो यहां तक कह दिया कि थरूर को "भाजपा का सुपर प्रवक्ता" नियुक्त कर देना चाहिए।उदित राज ने X पर पोस्ट किया, “मेरे प्रिय शशि थरूर, काश मैं प्रधानमंत्री मोदी से आग्रह कर पाता कि वे आपके भारत लौटने से पहले ही आपको विदेश मंत्री घोषित कर दें। आपने कांग्रेस के स्वर्णिम इतिहास को इस प्रकार नीचा दिखाया, मानो मोदी जी से पहले भारत ने कभी LoC पार ही नहीं की हो।”
पार्टी के भीतर से मिल रही आलोचनाओं के बीच, शशि थरूर ने कहा था कि अभी अंदरूनी बहस का वक्त नहीं है।
What's Your Reaction?