स्लोवाकिया ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का किया समर्थन, दोनों देशों के रिश्ते बने 'कॉम्प्रिहेंसिव पार्टनरशिप'
मध्य यूरोप के देश स्लोवाकिया की ऐतिहासिक यात्रा पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली है। स्लोवाकिया ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के सुधारित स्वरूप में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन किया..
ब्रातिस्लावा। मध्य यूरोप के देश स्लोवाकिया की ऐतिहासिक यात्रा पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली है। स्लोवाकिया ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के सुधारित स्वरूप में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन किया है। साथ ही दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को 'कॉम्प्रिहेंसिव पार्टनरशिप' (व्यापक साझेदारी) के स्तर तक बढ़ाने का फैसला किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के बीच सोमवार को हुई वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद सहित बहुपक्षीय संस्थाओं में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने कहा कि इन संस्थाओं को वर्तमान वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों के अनुरूप अधिक प्रतिनिधित्वकारी, समावेशी और प्रभावी बनाया जाना चाहिए।
UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता को मिला समर्थन
संयुक्त बयान में कहा गया कि इस संदर्भ में भारत ने सुरक्षा परिषद के सुधारित और विस्तारित स्वरूप में स्थायी सदस्यता के लिए स्लोवाकिया के निरंतर समर्थन की सराहना की।
प्रधानमंत्री मोदी और रॉबर्ट फिको ने संयुक्त राष्ट्र को केंद्र में रखकर बहुपक्षीय व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और वैश्विक मंचों पर आपसी समन्वय बढ़ाने पर सहमति जताई।
भारत लंबे समय से यह तर्क देता रहा है कि 15 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की वर्तमान संरचना पुरानी हो चुकी है और यह आज की वैश्विक वास्तविकताओं का सही प्रतिनिधित्व नहीं करती।
भारत की स्थायी सदस्यता की मांग को ब्राजील, जर्मनी और जापान सहित जी-4 समूह के अन्य सदस्य देशों के अलावा कई यूरोपीय देशों का भी समर्थन प्राप्त है।
वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका हैं, जबकि 10 अस्थायी सदस्य दो वर्ष के लिए चुने जाते हैं।
NSG सदस्यता पर भी मिला समर्थन
स्लोवाकिया ने 48 देशों वाले परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (NSG) में भारत की सदस्यता के प्रति भी अपना रचनात्मक और सकारात्मक रुख दोहराया।
पहली भारतीय प्रधानमंत्री यात्रा, रिश्तों को नई ऊंचाई
1993 में स्लोवाकिया की स्वतंत्रता के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली यात्रा है। इस दौरान दोनों देशों ने रणनीतिक, आर्थिक, तकनीकी और सुरक्षा क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से अपने संबंधों को व्यापक साझेदारी में बदलने का निर्णय लिया।
प्रधानमंत्री मोदी यूरोप के सप्ताहभर के दौरे के तहत ब्रातिस्लावा पहुंचे थे।
आतंकवाद पर सख्त रुख
दोनों नेताओं ने स्वतंत्र, खुला और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र, अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान और समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
भारत और स्लोवाकिया ने आतंकवाद के सभी स्वरूपों, विशेष रूप से सीमा पार आतंकवाद की कड़ी निंदा की।
दोनों देशों ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले की भी कड़ी निंदा की, जिसमें लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के आतंकवादियों ने 26 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
संयुक्त आतंकवाद निरोधक कार्य समूह बनेगा
भारत और स्लोवाकिया ने आतंकवाद से निपटने के लिए एक संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group on Counter-Terrorism) बनाने पर सहमति जताई।
दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध समिति द्वारा सूचीबद्ध आतंकवादियों, उनके सहयोगियों, प्रायोजकों, वित्तपोषकों और समर्थकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
इसके अलावा, दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र में कॉम्प्रिहेंसिव कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल टेररिज्म (CCIT) को जल्द अंतिम रूप देकर अपनाने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति व्यक्त की।
रक्षा और साइबर सुरक्षा सहयोग होगा मजबूत
रक्षा क्षेत्र में दोनों नेताओं ने रक्षा प्रौद्योगिकी, अनुसंधान एवं विकास, क्षमता निर्माण और रक्षा उद्योग सहयोग को मजबूत करने पर सहमति जताई। इस दौरान रक्षा सहयोग पर लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) पर हस्ताक्षर का भी स्वागत किया गया।
दोनों देशों ने महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना की सुरक्षा, साइबर अपराध की रोकथाम और सुरक्षित, स्थिर तथा लचीले डिजिटल वातावरण के निर्माण में सहयोग बढ़ाने का भी निर्णय लिया।
इसके साथ ही उभरते क्वांटम खतरों से सूचना प्रौद्योगिकी प्रणालियों की सुरक्षा तथा पोस्ट-क्वांटम सुरक्षा व्यवस्था के लिए संयुक्त तैयारी पर भी सहमति बनी।
भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते पर जोर
दोनों नेताओं ने जनवरी में भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर वार्ता पूरी होने का स्वागत करते हुए इसके जल्द हस्ताक्षर और क्रियान्वयन की आवश्यकता बताई, ताकि व्यापार और निवेश के नए अवसर खुल सकें।
कई क्षेत्रों में बढ़ेगा सहयोग
भारत और स्लोवाकिया ने मौसम विज्ञान, जल विज्ञान, ऑटोमोबाइल निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, रेलवे, स्वच्छ ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और श्रम गतिशीलता जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।
इसके अलावा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर, स्टार्टअप, नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र, अनुसंधान संस्थानों, प्रौद्योगिकी कंपनियों, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और मशीन-टू-मशीन (M2M) तकनीकों में भी साझेदारी मजबूत करने का निर्णय लिया गया।
भारत-स्लोवाकिया के बीच सीधी हवाई सेवा पर विचार
दोनों देशों ने आर्थिक, व्यावसायिक और जन-से-जन संपर्क को बढ़ावा देने के लिए भारत और स्लोवाकिया के बीच सीधी हवाई सेवा शुरू करने की संभावनाओं का भी अध्ययन करने पर सहमति जताई।
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