‘क्वाड से आधिकारिक रूप से बाहर निकलें’: अमेरिकी अधिकारी की चेतावनी के बाद लेखक की प्रतिक्रिया
द ग्रेट रीसेट और द न्यू ग्लोबल ऑर्डर के लेखक नवरोप सिंह ने गुरुवार को कहा कि अगर अमेरिका अपने टैरिफ (शुल्क) के “नखरों” पर अड़ा रहता है, तो भारत को क्वाड गठबंधन से आधिकारिक रूप से बाहर निकल जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि एक समय ऐसा आएगा जब अमेरिका के लगाए गए प्रतिबंध या शुल्क का कोई महत्व नहीं ..
नयी दिल्ली। द ग्रेट रीसेट और द न्यू ग्लोबल ऑर्डर के लेखक नवरोप सिंह ने गुरुवार को कहा कि अगर अमेरिका अपने टैरिफ (शुल्क) के “नखरों” पर अड़ा रहता है, तो भारत को क्वाड गठबंधन से आधिकारिक रूप से बाहर निकल जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि एक समय ऐसा आएगा जब अमेरिका के लगाए गए प्रतिबंध या शुल्क का कोई महत्व नहीं रहेगा।
सिंह ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “एक समय के बाद ये प्रतिबंध/शुल्क मायने नहीं रखेंगे। 50% से ऊपर, चाहे 100% हो या 200%, इसका मतलब है वर्चुअल व्यापार प्रतिबंध। अगर ट्रंप प्रशासन 27 तारीख को 50% या उससे अधिक शुल्क लगाता है, तो हमें शर्त रखनी चाहिए कि पहले इन रूसी तेल पर लगाए गए शुल्क/प्रतिबंध हटाए जाएं, तभी किसी व्यापार समझौते की बात हो। और साथ ही, हमें क्वाड से आधिकारिक रूप से बाहर निकल जाना चाहिए।”
At some point of time these sanctions/tariffs wont matter. Above 50% be it 100, 200% doesnt matter its a virtual trade embargo. If Trump Administration does go ahead with 50% on 27th or higher. We should put a condition to remove these Russian Oil tariffs/sanctions then we are… — Navroop Singh (@TheNavroopSingh) August 14, 2025
उनकी यह टिप्पणी अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के उस बयान के कुछ घंटों बाद आई, जिसमें उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर नई दिल्ली रूसी तेल खरीदना बंद नहीं करता है, तो भारत पर अधिक और सेकेंडरी टैरिफ लगाए जा सकते हैं।
बेसेंट ने ब्लूमबर्ग टीवी को दिए इंटरव्यू में कहा कि प्रतिबंध “बढ़ सकते हैं” या “ढीले हो सकते हैं”, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि शुक्रवार को डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन के बीच अलास्का में होने वाली बैठक का नतीजा क्या निकलता है। उन्होंने कहा, “यूरोपियों को इन प्रतिबंधों में हमारे साथ शामिल होना होगा… अब या कभी नहीं का वक्त है। हमने भारतीयों पर रूसी तेल खरीदने के लिए सेकेंडरी टैरिफ लगाए हैं। और अगर चीजें ठीक नहीं रहीं, तो प्रतिबंध या सेकेंडरी टैरिफ बढ़ भी सकते हैं।”
ट्रंप और उनका प्रशासन बार-बार भारत पर आरोप लगाता रहा है कि वह रूसी तेल और ऊर्जा खरीदकर रूस-यूक्रेन युद्ध को वित्तपोषित कर रहा है। वहीं, नई दिल्ली का कहना है कि वह भारतीय नागरिकों के हितों को प्राथमिकता देगा और रूसी तेल खरीदने से ईंधन कीमतों में स्थिरता बनी रहती है।
भारत ने यह भी कहा कि रूसी तेल सस्ता मिलता है, जिससे नागरिकों के लिए ईंधन किफायती रहता है। साथ ही, उसने अमेरिका और यूरोपीय देशों की ढोंगपूर्ण नीति की ओर भी इशारा किया, जो खुद भी रूसी आयात कर चुके हैं।
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