केरल वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति पर UDF और IUML दुविधा में, हाईकोर्ट में याचिका से बढ़ा दबाव
केरल राज्य वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की अनिवार्य नियुक्ति को लेकर इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) राजनीतिक दुविधा में फंस गए हैं। यह स्थिति उस समय और जटिल हो गई जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश उपाध्यक्ष शोन जॉर्ज ने केरल हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर कर बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों..
तिरुवनंतपुरम। केरल राज्य वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की अनिवार्य नियुक्ति को लेकर इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) राजनीतिक दुविधा में फंस गए हैं। यह स्थिति उस समय और जटिल हो गई जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश उपाध्यक्ष शोन जॉर्ज ने केरल हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर कर बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल नहीं किए जाने को चुनौती दी।
कानून के तहत दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति अनिवार्य
केंद्र सरकार के वक्फ (संशोधन) अधिनियम की धारा 41 के अनुसार, प्रत्येक राज्य वक्फ बोर्ड में कम से कम दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति कानूनी रूप से अनिवार्य है। इस प्रावधान का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में धर्मनिरपेक्ष निगरानी, कार्यात्मक विविधता और संस्थागत जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
11 सदस्यीय बोर्ड में केवल 9 मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति
केरल सरकार ने 4 फरवरी 2026 को जारी आदेश के तहत 11 सदस्यीय वक्फ बोर्ड का गठन किया, लेकिन उसमें केवल 9 मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति की गई। शेष दो पदों को भविष्य में नियुक्ति के लिए खाली छोड़ दिया गया।
याचिकाकर्ता ने बोर्ड की वैधता पर उठाए सवाल
अपनी याचिका में शोन जॉर्ज ने तर्क दिया है कि गैर-मुस्लिम प्रतिनिधित्व के बिना बोर्ड का संचालन सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है।
उन्होंने दावा किया कि इस स्थिति में वक्फ बोर्ड अपना कानूनी अधिकार क्षेत्र खो देता है और उसके द्वारा लिए गए सभी प्रशासनिक एवं निगरानी संबंधी फैसले शून्य और अवैध माने जाने चाहिए।
हाईकोर्ट ने मांगा राज्य सरकार का जवाब
केरल हाईकोर्ट ने इस याचिका पर राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। इससे राजनीतिक व्यवस्था पर तत्काल समाधान निकालने का कानूनी दबाव बढ़ गया है और मामले को लंबा खींचने या राजनीतिक रणनीति अपनाने की गुंजाइश काफी कम हो गई है।
IUML और UDF के सामने दोहरी चुनौती
यह मुद्दा IUML और उसके सहयोगी गठबंधन UDF के लिए दोधारी तलवार साबित हो सकता है।
- यदि वे वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति का खुलकर समर्थन करते हैं या इसे सहजता से लागू करते हैं, तो उन्हें अपने पारंपरिक मुस्लिम वोट बैंक और सहयोगी धार्मिक संगठनों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है।
- वहीं, यदि IUML और UDF इस कानूनी प्रावधान का कड़ा विरोध करते हैं, तो उन पर धार्मिक कट्टरता का आरोप लग सकता है, जिससे उनकी धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक छवि प्रभावित हो सकती है और भाजपा को राजनीतिक लाभ मिल सकता है।
मुनंबम भूमि विवाद पर भी केंद्र सरकार का नोटिस
इस बीच, केंद्र सरकार ने केरल वक्फ बोर्ड को मुनंबम भूमि विवाद के मामले में भी नोटिस जारी किया है।
नोटिस में बोर्ड से पूछा गया है कि उसने विवादित मुनंबम भूमि को 'उम्मीद' (Umeed) पोर्टल, जो वक्फ संपत्तियों का केंद्रीकृत डिजिटल रजिस्टर है, पर किस आधार पर अपलोड किया। बोर्ड को पांच दिनों के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया गया है।
404 एकड़ विवादित भूमि को पोर्टल पर दर्ज करने पर विवाद
केंद्र सरकार को शिकायत मिली थी कि एर्नाकुलम जिले के मुनंबम क्षेत्र की लगभग 404 एकड़ विवादित भूमि को पिछले महीने वक्फ बोर्ड ने अपने विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए 'उम्मीद' पोर्टल पर दर्ज कर दिया।
इस घटनाक्रम के बाद वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली और कानूनी प्रक्रिया को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।
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