सुनील गावस्कर ने सुझावों के साथ बीसीसीआई को सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली के नाम याद दिलाये
सुनील गावस्कर के पास बीसीसीआई के लिए कुछ क्रांतिकारी सुझाव हैं। एक ऐसा सुझाव जिसमें सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़ और भारतीय महान खिलाड़ी शामिल..
सुनील गावस्कर के पास बीसीसीआई के लिए कुछ क्रांतिकारी सुझाव हैं। एक ऐसा सुझाव जिसमें सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़ और भारतीय महान खिलाड़ी शामिल हैं।
हाल ही में, गावस्कर इस बात से प्रभावित नहीं हुए कि ईस्ट जोन ने दलीप ट्रॉफी का फाइनल किस तरह जीता। इशान किशन की कप्तानी वाली टीम ने पहली पारी की बढ़त के आधार पर बीसीसीआई की घरेलू ट्रॉफी उठाई। एक स्वस्थ बढ़त के बावजूद, ईस्ट जोन ने दूसरी पारी में बल्लेबाजी की और एक दिन शेष रहते फाइनल में साउथ जोन के लिए दरवाजे पूरी तरह बंद कर दिए। गावस्कर ने कुछ क्रांतिकारी सोच अपनाने की मांग की।
उन्होंने लिखा, "बहुत पहले जब मैं बीसीसीआई तकनीकी समिति का अध्यक्ष था, तो हमने कुछ क्रांतिकारी फैसले लिये थे जैसे रणजी ट्रॉफी की जोनल प्रणाली को खत्म करना और एलीट तथा प्लेट टूर्नामेंट शुरू करना। इस तरह, खिलाड़ियों को केवल अपने जोन में खेलने के बजाय देश के विभिन्न हिस्सों में और अलग-अलग मौसम स्थितियों में खेलने का अनुभव मिला। अंक प्रणाली को भी बदलकर केवल पहली पारी की बढ़त के लिए एक अंक, सीधे तौर पर जीत के लिए दो अंक और कोई बोनस अंक न रखना कर दिया गया था, जिन्हें हेरफेर किया जा सकता था," गावस्कर ने अपनी बात मिड-डे समाचार पत्र के लिए लिखे एक आलेख में व्यक्त किये हैं।
गावस्कर ने बीसीसीआई से अपने दायरे का विस्तार करने और देश में खेल की बेहतरी के लिए भारत के महान खिलाड़ियों को शामिल करने का आह्वान किया।
गावस्कर ने लिखा, "आज बीसीसीआई में चयन समितियों और सीएसी (CAC) को छोड़कर कोई भी समिति नहीं बची है। शायद समय आ गया है कि सीएसी और उसके चयनकर्ताओं तथा कोच के चयन के दायरे का विस्तार किया जाए और घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों और भारतीय क्रिकेट से जुड़ी हर चीज पर भी नजर डाली जाए।"
उन्होंने लिखा, "कुछ ऐसे अविश्वसनीय रूप से अनुभवी पूर्व क्रिकेटर हैं जिनकी विशेषज्ञता का उपयोग इस समिति में रहने के लिए किया जा सकता है। सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली, रवि शास्त्री, अनिल कुंबले, हरभजन सिंह, वीरेंद्र सहवाग जैसे नाम कुछ उदाहरण के लिए है, कैसे रहेंगे? अध्यक्ष और सचिव भी इसमें शामिल होंगे।"
उन्होंने लिखा,"जब यह समिति कोच, कप्तान और एनसीए (NCA) के प्रमुख के साथ बातचीत करती है, तो इसका एक ऐसा प्रभाव होता है जिसका कोई मुकाबला नहीं है। महिला क्रिकेट के लिए भी ऐसी ही एक समिति होनी चाहिए, जहां भारतीय क्रिकेट को आगे ले जाने के फैसले लेने के लिए अनुभव और विशेषज्ञता का मिलन हो। इसके बारे में सोचने मात्र से ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। क्या यह कभी होगा या यह सिर्फ एक सपना है?"
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