तेजस्वी यादव होंगे सीएम फेस, बिहार में सत्ता आई तो महागठबंधन बना सकता है तीन डिप्टी सीएम
बिहार विधानसभा चुनावों के बाद अगर महागठबंधन (INDIA ब्लॉक) सत्ता में आता है, तो राज्य में तीन उपमुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं, एक-एक दलित, मुस्लिम और अति पिछड़ा वर्ग (EBC) समुदाय से। यह जानकारी बुधवार को राजद और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने..
पटना। बिहार विधानसभा चुनावों के बाद अगर महागठबंधन (INDIA ब्लॉक) सत्ता में आता है, तो राज्य में तीन उपमुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं, एक-एक दलित, मुस्लिम और अति पिछड़ा वर्ग (EBC) समुदाय से। यह जानकारी बुधवार को राजद और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने दी।
सूत्रों के मुताबिक, महागठबंधन की सीटों के बंटवारे की बातचीत लगभग अंतिम चरण में है, और इसके साथ ही तीन डिप्टी सीएम की योजना पर भी सहमति बन रही है।
तेजस्वी यादव होंगे चेहरा
महागठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री पद का चेहरा तेजस्वी यादव होंगे। वे पिछड़े वर्ग से आते हैं और अब तक दो बार उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं। हालांकि सहयोगी दलों की ओर से औपचारिक समर्थन की घोषणा अभी बाकी है।
तेजस्वी का मुकाबला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेता और वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से होगा। एनडीए के पास फिलहाल दो उपमुख्यमंत्री हैं, सम्राट चौधरी (ओबीसी) और विजय कुमार सिन्हा (भूमिहार)।
सीट बंटवारे का फार्मूला
राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने बताया कि सीट बंटवारे का जो फॉर्मूला तय हो रहा है, उसके अनुसार —
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दल |
संभावित सीटें |
2020 की तुलना में बदलाव |
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राजद |
लगभग 125 सीटें |
19 सीटें कम (2020 में 143) |
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कांग्रेस |
50–55 सीटें |
— |
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वामदल |
करीब 25 सीटें |
— |
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अन्य सहयोगी (VIP, LJP-पारस गुट, JMM आदि) |
शेष सीटें |
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तिवारी ने कहा, “यह फॉर्मूला इस बात का संकेत है कि तेजस्वी यादव अब गठबंधन के निर्विवाद मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बन चुके हैं। यह उनका मास्टरस्ट्रोक है, जिससे वे राजद की छवि को यादव-केन्द्रित राजनीति से आगे बढ़ाकर दलित, अल्पसंख्यक और अति पिछड़े वर्गों को बराबर की हिस्सेदारी देने की दिशा में ले जाना चाहते हैं।”
राहुल गांधी का समावेशी संकेत
कांग्रेस नेता प्रवीण सिंह कुशवाहा ने कहा कि तीन डिप्टी सीएम की योजना राहुल गांधी की “समावेशी राजनीति” को दर्शाती है। उन्होंने कहा, “यह प्रतीकात्मक निर्णय सामाजिक न्याय की अवधारणा को और व्यापक रूप में पुनः परिभाषित करने का प्रयास है।”
वीआईपी की प्रतिक्रिया
वीआईपी (विकासशील इंसान पार्टी) के प्रवक्ता देव ज्योति ने कहा कि यह योजना तेजस्वी यादव की दूरदर्शिता को दर्शाती है। उन्होंने दावा किया, “गुरुवार शाम तक तेजस्वी यादव को महागठबंधन का आधिकारिक मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित किया जाएगा, और उनके डिप्टी में से एक हमारे नेता मुकेश सहनी होंगे।”
विरोधी दलों की आलोचना
रालोमो (उपेंद्र कुशवाहा गुट) के महासचिव राम पुकार शर्मा ने कहा कि महागठबंधन के नेता “हवाई किले” बना रहे हैं। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, “उन्हें पता है कि यह गठबंधन तीन अंकों तक भी नहीं पहुंचेगा, फिर भी वे घोषणाएं कर रहे हैं। उन्हें अपने मंत्रिमंडल की सूची भी घोषित कर देनी चाहिए।”
जन सुराज पार्टी के अनिल कुमार सिंह ने इस योजना को “चुनाव पूर्व दिखावा” बताते हुए कहा कि यह व्यावहारिक रूप से असंभव है। उन्होंने कहा, “उनके लिए 123 के जादुई आंकड़े तक पहुंचना मुश्किल है। यह योजना तेजस्वी की उस चिंता से उपजी है कि कहीं वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी, जिन्होंने खुद को डिप्टी सीएम घोषित कर दिया है, पाला न बदल लें। इतना बड़ा सत्ता-साझाकरण प्रशासनिक टकराव और आंतरिक कलह पैदा कर सकता है... साथ ही यह तेजस्वी की अपनी राजनीतिक पकड़ को कमजोर भी कर सकता है।”
बिहार में डिप्टी सीएम पद का इतिहास
अब तक बिहार में 10 उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं।
- पहले डिप्टी सीएम अनुग्रह नारायण सिन्हा (कांग्रेस) थे, जिन्होंने श्रीकृष्ण सिंह के साथ 11 वर्ष से अधिक समय तक काम किया।
- समाजवादी नेता कर्पूरी ठाकुर ने इस पद पर 329 दिन काम करने के बाद मुख्यमंत्री पद संभाला।
- जगदेव प्रसाद (शोषित समाज दल) ने केवल चार दिन तक उपमुख्यमंत्री पद संभाला, जबकि राम जयपाल सिंह यादव (कांग्रेस) 1970 के दशक की राजनीतिक उठापटक में 220 दिन पद पर रहे।
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