"पैरों में गिरकर माफी मांगूंगी...": कर्नाटक सामूहिक दफन मामले में महिला ने पलटा बयान
कर्नाटक के धर्मस्थल में 2003 में कथित रूप से लापता हुई बेटी के मामले में शिकायत करने वाली महिला ने अब अपने बयान से पलटी मार ली है। महिला ने कहा है कि उसे कुछ लोगों ने संपत्ति विवाद के मामले में “भ्रमित” कर झूठे आरोप..
बेंगलुरु। कर्नाटक के धर्मस्थल में 2003 में कथित रूप से लापता हुई बेटी के मामले में शिकायत करने वाली महिला ने अब अपने बयान से पलटी मार ली है। महिला ने कहा है कि उसे कुछ लोगों ने संपत्ति विवाद के मामले में “भ्रमित” कर झूठे आरोप लगवाए थे।
सुजाता, जिसने जुलाई में धर्मस्थल मंदिर से अपनी बेटी के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी, ने कहा कि वह उस समय मानसिक रूप से बहुत परेशान थी लेकिन अब वह अपने “पापों की माफी” मांगने के लिए तैयार है।
राज्य पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) धर्मस्थल में कथित सामूहिक दफन, हत्या और बलात्कार के आरोपों की जांच कर रही है, जिसने राज्यभर में भारी राजनीतिक और सामाजिक हलचल पैदा कर दी है।
विवाद की पृष्ठभूमि
पिछले महीने एक “मुखौटा पहने व्यक्ति” जिसकी पहचान बाद में सीएन चिनैय्या के रूप में हुई, ने दावा किया था कि उसने धर्मस्थल में कई शवों को दफनाया था, जिनमें कुछ महिलाओं के शवों पर यौन उत्पीड़न के संकेत थे।
उसके आरोप मंदिर प्रशासन से जुड़े लोगों की ओर इशारा कर रहे थे। बाद में चिनैय्या को झूठी गवाही (perjury) के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
कुछ दिनों बाद सुजाता ने दावा किया था कि उसकी बेटी अनन्या, जो एक मेडिकल छात्रा थी, 2003 में मंदिर परिसर से लापता हो गई थी।
“अनन्या एक काल्पनिक नाम था”
अब सुजाता ने खुलासा किया है कि “अनन्या” कोई वास्तविक व्यक्ति नहीं थी। उसने कहा, “‘अनन्या’ नाम एक यूट्यूबर शिवशंकर ने बनाया था, जो ‘हाय करुनाडु’ नाम से चैनल चलाता है। उसी के कहने पर मैंने यह आरोप लगाए।”
SIT द्वारा पूछताछ के बाद सुजाता ने कहा कि उसकी मानसिक परेशानी की जड़ उसके पिता की संपत्ति का विवाद था। उसने बताया, “मेरे पिता की संपत्ति को लेकर विवाद था। परिवार ने मुझे मृत मान लिया था। बाद में पता चला कि संपत्ति वीरेंद्र हेगड़े को दी गई है। बाद में समझ में आया कि संपत्ति बेचने के लिए सभी बच्चों के हस्ताक्षर जरूरी थे, जो नहीं हुए। इससे मुझे गहरा दुख हुआ।” धर्मस्थल मंदिर के धर्माधिकारी वीरेंद्र हेगड़े मंदिर के प्रबंधक हैं।
“मुझसे झूठे आरोप लगवाए गए”
सुजाता ने कहा कि वह सामाजिक कार्यकर्ता गिरीश मत्तनावर और एक अन्य व्यक्ति जयंत टी से मिली, जो चिनैय्या के दावों का समर्थन कर रहे थे। ये दोनों उसे दिल्ली ले गए, जहां उसकी मुलाकात एक वकील धनंजय से कराई गई। उन्होंने बताया, “इन्हीं लोगों ने मुझसे वीरेंद्र हेगड़े के भाई हर्षेंद्र हेगड़े पर झूठे आरोप लगवाए।”
महिला ने यह भी स्वीकार किया कि उसने एक महिला वसंती की तस्वीर का उपयोग किया और दावा किया कि वही उसकी बेटी अनन्या है। उन्होंने कहा, “असल में वसंती, रंगप्रसाद के बेटे की पत्नी हैं। मुझे पूरी योजना की जानकारी नहीं थी। मैं नहीं जानती थी कि हमारे साथ खोपड़ी वाला मुखौटा पहने आदमी भी होगा। वकील धनंजय निर्दोष हैं, उन्होंने मेरा इस्तेमाल किया।”
सुजाता ने बताया कि उसने SIT को सभी विवरण दे दिए हैं और जांच दल ने उसके साथ उचित व्यवहार किया है। उन्होंने बताया, “उन्होंने मुझ पर कोई दबाव नहीं डाला। मैं अब बूढ़ी हो चुकी हूं और बस सभी से माफी मांगना चाहती हूं। मुझसे गलती हुई। मैं जानती हूं कि मुझे कोई न्याय नहीं मिलेगा लेकिन मैंने कभी धर्मस्थल या वीरेंद्र हेगड़े के बारे में बुरा नहीं कहा। लोगों ने मेरा फायदा उठाया और अब मुझे छोड़ दिया।”
भावनात्मक रूप से टूट चुकी सुजाता ने कहा, “अगर कुछ नहीं सुधरा, तो मैं एक हफ्ते के भीतर धर्मस्थल जाऊंगी, वीरेंद्र हेगड़े के चरणों में गिरकर अपने पापों की माफी मांगूंगी। उसके बाद तय करूंगी कि आगे क्या करना है। मुझे लगता है कि अब मेरे पास जीने का कोई साधन नहीं बचा है, और शायद मौत ही मेरा एकमात्र विकल्प है।” धर्मस्थल से जुड़े आरोपों की SIT जांच अभी जारी है।
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