“राज्य सरकार से कोई टकराव नहीं है” — मुख्य चुनाव आयुक्त ग्यानेश कुमार ने पश्चिम बंगाल में विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) पर कहा

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने सोमवार को स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग और राज्य सरकार के बीच किसी प्रकार का टकराव नहीं है। उन्होंने कहा, “आयोग अपना दायित्व निभा रहा है और राज्य सरकार भी अपना कार्य करेगी। मतदाता सूची तैयार करने और चुनाव कराने के लिए आवश्यक कार्मिक उपलब्ध कराना राज्यों की संवैधानिक जिम्मेदारी

“राज्य सरकार से कोई टकराव नहीं है” — मुख्य चुनाव आयुक्त ग्यानेश कुमार ने पश्चिम बंगाल में विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) पर कहा
28-10-2025 - 12:07 PM

नयी दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने सोमवार को स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग और राज्य सरकार के बीच किसी प्रकार का टकराव नहीं है।

उन्होंने कहा, “आयोग अपना दायित्व निभा रहा है और राज्य सरकार भी अपना कार्य करेगी। मतदाता सूची तैयार करने और चुनाव कराने के लिए आवश्यक कार्मिक उपलब्ध कराना राज्यों की संवैधानिक जिम्मेदारी है।”

यह बयान तब आया जब चुनाव आयोग (ECI) ने पूरे देश में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) की घोषणा की, जिसकी शुरुआत 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से की जा रही है।

ज्ञानेश कुमार ने बताया कि इस प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में नाम दर्ज करने वाले फॉर्म पहले से उपलब्ध जानकारी के आधार पर पहले से भरे हुए होंगे। इन विवरणों में पिछली मतदाता सूचियों और पहले किए गए SIR अभियानों से प्राप्त डेटा शामिल रहेगा।

उन्होंने कहा कि दूसरे चरण के SIR में भाग लेने वाले मतदान अधिकारियों का प्रशिक्षण मंगलवार से शुरू होगा।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा, इस विशेष पुनरीक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र मतदाता सूची से बाहर न रहे और कोई भी अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न हो।”

ज्ञानेश कुमार ने यह भी बताया कि SIR के तहत शामिल सभी राज्यों की मतदाता सूचियाँ आधी रात से “फ्रीज़” कर दी जाएँगी, यानी संशोधन कार्य अस्थायी रूप से रोक दिया जाएगा। इसके बाद बूथ स्तर अधिकारी (BLOs) प्रत्येक घर में यूनीक एन्म्यूरेशन फॉर्म’ वितरित करेंगे, जिसमें पहले से उपलब्ध मतदाता विवरण दर्ज होंगे।

उन्होंने आगे स्पष्ट किया, जिन लोगों के नाम इन फॉर्मों में दर्ज हैं, उन्हें यह सत्यापित करना होगा कि क्या उनके नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची में थे। यदि थे, तो उन्हें किसी अतिरिक्त दस्तावेज की आवश्यकता नहीं होगी। यहां तक कि यदि उनके माता-पिता के नाम पुराने रिकॉर्ड में हैं, तब भी उन्हें कोई अतिरिक्त प्रमाण देना नहीं होगा।”

CEC ने यह भी जानकारी दी कि 2002 से 2004 तक की मतदाता सूचियाँ अब सार्वजनिक रूप से देखने के लिए उपलब्ध कराई जाएंगी। लोग इन्हें voters.eci.gov.in वेबसाइट पर जाकर स्वयं देख और सत्यापित कर सकेंगे।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।