विनेश फोगाट को सुप्रीम कोर्ट से राहत, WFI की याचिका खारिज
भारतीय पहलवान Vinesh Phogat और Wrestling Federation of India (डब्ल्यूएफआई) के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद में विनेश फोगाट को एक और कानूनी राहत मिली है। गुरुवार, 4 जून को Supreme Court of India ने डब्ल्यूएफआई द्वारा दायर याचिका को "निष्प्रभावी" (Infructuous) बताते हुए खारिज..
भारतीय पहलवान Vinesh Phogat और Wrestling Federation of India (डब्ल्यूएफआई) के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद में विनेश फोगाट को एक और कानूनी राहत मिली है। गुरुवार, 4 जून को Supreme Court of India ने डब्ल्यूएफआई द्वारा दायर याचिका को "निष्प्रभावी" (Infructuous) बताते हुए खारिज कर दिया।
क्या था मामला?
डब्ल्यूएफआई ने Delhi High Court के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें विनेश फोगाट को राष्ट्रीय चयन ट्रायल्स में भाग लेने की अनुमति दी गई थी।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बाद की घटनाओं को देखते हुए यह याचिका अब अप्रासंगिक हो चुकी है, इसलिए इस पर आगे सुनवाई की आवश्यकता नहीं है।
राष्ट्रीय ट्रायल्स में खेली थीं विनेश
दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद विनेश फोगाट ने 53 किलोग्राम वर्ग के राष्ट्रीय चयन ट्रायल्स में हिस्सा लिया था।
उन्होंने प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए सेमीफाइनल तक का सफर तय किया लेकिन वहां उन्हें Meenakshi Goyat के हाथों हार का सामना करना पड़ा।
हार के बाद विनेश ने कहा था कि वह और अधिक मजबूती के साथ वापसी करेंगी और अपने संघर्ष को जारी रखेंगी।
WFI ने लगाए थे गंभीर आरोप
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान डब्ल्यूएफआई की ओर से कहा गया कि ट्रायल्स में भाग लेने की अनुमति मिलने के बाद विनेश फोगाट ने प्रतियोगिता में "अव्यवस्था" पैदा की।
संघ के वकील ने यह भी दलील दी कि दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के कुछ हिस्सों, विशेष रूप से पैरा 31 के बाद की टिप्पणियों को हटाया जाना चाहिए।
दिल्ली हाईकोर्ट ने WFI को लगाई थी फटकार
22 मई के अपने महत्वपूर्ण फैसले में दिल्ली हाईकोर्ट की खंडपीठ, जिसकी अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश Devendra Kumar Upadhyaya कर रहे थे, ने डब्ल्यूएफआई की कड़ी आलोचना की थी।
अदालत ने संघ के रवैये को "प्रतिशोधात्मक" (vindictive) और "पिछड़ी सोच वाला" (retrograde) बताया था।
हाईकोर्ट ने कहा था कि विनेश केवल इसलिए चयन मानदंडों को पूरा नहीं कर सकीं क्योंकि वह मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) पर थीं। अदालत ने स्पष्ट किया कि मातृत्व को महिला खिलाड़ियों के खिलाफ भेदभाव का आधार नहीं बनाया जा सकता।
शो-कॉज नोटिस पर भी जताई नाराजगी
हाईकोर्ट ने विनेश फोगाट को जारी किए गए एक कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) को भी "निंदनीय" (Deplorable) बताया था।
रिपोर्टों के अनुसार, नोटिस में Paris Olympics में वजन अधिक होने के कारण विनेश की अयोग्यता को "राष्ट्रीय शर्म" कहा गया था। अदालत ने टिप्पणी की थी कि ऐसी भाषा दुर्भावनापूर्ण (Mala Fide) मंशा को दर्शाती है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने डब्ल्यूएफआई की याचिका खारिज करते हुए कहा कि वह दिल्ली हाईकोर्ट की टिप्पणियों को दोहराना नहीं चाहता।
अदालत ने अपने आदेश में कहा, "बाद की परिस्थितियों को देखते हुए यह विशेष अनुमति याचिका (SLP) निष्प्रभावी हो गई है। इस न्यायालय को हाईकोर्ट के निष्कर्षों और टिप्पणियों को दोहराने वाला नहीं माना जाएगा। सभी मुद्दे भविष्य के लिए खुले रखे जाते हैं।"
इसका अर्थ है कि सुप्रीम कोर्ट ने मामले को समाप्त तो कर दिया है, लेकिन इससे जुड़े कानूनी प्रश्नों पर भविष्य में विचार की संभावना बनी हुई है।
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