ममता बनर्जी को विधानसभा में वापसी का प्रस्ताव, पूर्व टीएमसी नेता हुमायूं कबीर ने दिया बड़ा ऑफर
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आया है। Humayun Kabir ने गुरुवार को पूर्व मुख्यमंत्री Mamata Banerjee को राज्य विधानसभा में वापसी का रास्ता देने की पेशकश..
नयी दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आया है। Humayun Kabir ने गुरुवार को पूर्व मुख्यमंत्री Mamata Banerjee को राज्य विधानसभा में वापसी का रास्ता देने की पेशकश की है।
यह प्रस्ताव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कुछ ही महीने पहले कबीर ने All India Trinamool Congress (टीएमसी) छोड़कर नया राजनीतिक दल बनाया था और ममता सरकार के खिलाफ जोरदार अभियान चलाया था।
रेजिनगर सीट छोड़ने को तैयार
Aam Janata Unnayan Party (एजेयूपी) के संस्थापक हुमायूं कबीर ने 2026 के विधानसभा चुनाव में Nowda और Rejinagar दोनों सीटों पर जीत दर्ज की थी।
उन्होंने कहा कि यदि ममता बनर्जी चाहें तो वे रेजिनगर सीट से इस्तीफा देकर उन्हें उपचुनाव के जरिए विधानसभा पहुंचाने में मदद करेंगे।
कबीर ने कहा, "अगर ममता बनर्जी मेरे पास आती हैं, तो मैं उन्हें रेजिनगर से विधानसभा भेज सकता हूं। यदि वह नंदीग्राम से चुनाव लड़ेंगी तो नहीं जीत पाएंगी। लेकिन अगर वह चाहें तो मैं इस्तीफा दे दूंगा और अपनी सीट से उनकी जीत सुनिश्चित करूंगा।"
राजनीतिक विरोध से समर्थन तक
यह प्रस्ताव इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि हुमायूं कबीर पिछले एक वर्ष से ममता बनर्जी और उनकी सरकार के सबसे मुखर आलोचकों में शामिल रहे हैं।
टीएमसी से निष्कासन के बाद उन्होंने एजेयूपी की स्थापना की थी और राज्य सरकार के खिलाफ लगातार अभियान चलाया था। उन्होंने कई बार ममता सरकार को सत्ता से हटाने की मांग भी की थी।
इसके बावजूद अब उन्होंने ममता बनर्जी के प्रति सहानुभूति व्यक्त की है। उन्होंने कहा, "आज उनकी स्थिति देखकर दुख होता है.."
कबीर ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में ममता बनर्जी की स्थिति उन्हें दुखी करती है और वे उनके राजनीतिक योगदान को नहीं भूले हैं।
उन्होंने कहा, "आज जिस स्थिति में वह हैं, उसे देखकर मुझे दुख होता है। मैं आज जो कुछ भी हूं, उनकी वजह से हूं।"
हालांकि, उन्होंने अपने क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पकड़ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा,"हो सकता है कि अब उनकी बात कोई न सुने, लेकिन रेजिनगर में हुमायूं कबीर की बात अंतिम मानी जाती है।"
ममता बनर्जी के लिए चुनौतीपूर्ण दौर
हुमायूं कबीर का यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब ममता बनर्जी अपने राजनीतिक जीवन के सबसे कठिन दौरों में से एक का सामना कर रही हैं।
2026 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी को झटका लगा है और पार्टी के भीतर भी असंतोष और मतभेद की खबरें सामने आई हैं। लगभग तीन दशक पहले स्थापित पार्टी के लिए यह स्थिति एक बड़ी चुनौती मानी जा रही है।
राजनीतिक समीकरण बदलने के संकेत?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हुमायूं कबीर का यह बयान पश्चिम बंगाल की राजनीति में बदलते समीकरणों का संकेत हो सकता है।
एक समय ममता बनर्जी के करीबी रहे कबीर का पहले टीएमसी से अलग होना और फिर अब विधानसभा में उनकी वापसी के लिए सार्वजनिक रूप से समर्थन देना राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे रहा है।
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