क्यों गर्मा रहा है भगवान जगन्नाथ मंदिर का गर्भगृह? रहस्य जानने में जुटे भू वैज्ञानिक
<p><em><strong>मंदिर के गर्भगृह के अचानक गर्म हो जाने का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूजा के लिए रखा गया घी तुरंत पिघल जा रहा है</strong></em></p>
रांची में धुर्वा स्थित ऐतिहासिक भगवान जगन्नाथ मंदिर इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। वजह है मंदिर के गर्भगृह के फर्श का अचानक गर्म हो जाना। गर्भगृह के अचानक गर्म हो जाने का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूजा के लिए रखा गया घी तुरंत पिघल जा रहा है। इस अद्भुत और अकल्पनीय दृश्य को देखकर सबसे पहले मंदिर के पुजारी गण अचंभित हुए बाद में यह बात धीरे-धीरे पूरे इलाके में फैल गई है।
गर्भगृह का निर्माण वर्ष 2000 में नये सिरे से हुआ
करीब 330 साल पुराना यह ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर झारखंड में आस्था का एक प्रमुख केंद्र रहा है। पुजारी रामेश्वर पाढ़ी ने बताया कि वर्ष 2000 में भगवान जगन्नाथ के गर्भगृह का निर्माण नए सिरे से किया गया था। निर्माण कार्य में ग्रेनाइट पत्थर का जगह जगह पर इस्तेमाल किया गया है।
जांच कराने की चल रही बात
ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मंदिर के गर्भगृह का गर्म होना अब जांच का विषय बन गया है। खान और भूतत्व विभाग की माने तो जमीन के अंदर रेडियो एक्टिव कई तत्व होते हैं, इस कारण रेडिएशन से कभी-कभी सतह का गर्म होना देखा जाता है। खासकर रांची में लाइमस्टोन के कई पेच जमीन के अंदर मौजूद हैं लाइमस्टोन के अधिक मात्रा जमीन के अंदर होने से भी कभी-कभी सतह गर्म हो जाता है।
नागवंशी राजाओं ने बनवाया
रांची के धुर्वा स्थित भगवान जगन्नाथ का मंदिर इतिहास के कई पन्नों को अपने आप में समेटे हुए हैं। वर्ष 1691 में बड़का गढ़ के नागवंशी राजा ठाकुर एनी नाथ शाहदेव ने भगवान जगन्नाथ मंदिर का निर्माण करवाया था। मंदिर निर्माण के पीछे कई कहानियां जुड़ी हुई हैं।
समाज को जोड़ता है मंदिर
इस मंदिर में निर्माण काल से अब तक समाज को जोड़ने का काम किया है। पूरे परिवार को मंदिर की घंटी देने, मुंडा परिवार को झंडा फहराने और पगड़ी देने की जिम्मेदारी दी गई थी। वही, लोहरा परिवार रथ की मरम्मत का कार्य और कुम्हार परिवार मिट्टी के बर्तन की व्यवस्था करते आ रहा है।
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