हमने खो दिए दो और जांबाज, आखिर कब विदा लेगा ये ‘उड़ता कॉफिन’ मिग-21?
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फिर एक हादसा, फिर दर्दनाक तस्वीरें, आग के गोले की शक्ल में गिरता विमान और रेतीले धोरों पर पड़े हमारे दो होनहार पायलटों के क्षत-विक्षत शव... गुरुवार, 28 जुलाई रात सवा नौ बजे देश के सामने यह बेहद दर्दनाक खबर आई है। राजस्थान के बाड़मेर जिले के बायतु इलाके में भीमड़ा गांव के पास भारतीय सेना का मिग-21 विमान क्रैश हो गया। इस हादसे में दोनों पायलटों की मौत हो गई।
यह पहला मिग हादसा नहीं, फिर भी न जाने क्या वजहें हैं कि इस विमान को भारतीय सेना से बाहर नहीं किया जा रहा। साल 2021 में इस विमान से पांच हादसे हुए थे। एक आंकड़े के मुताबिक पिछले छह दशकों में मिग-21 से जुड़ी हुई 400 से अधिक दुर्घटनाएं हुई हैं, जिसमें 200 से अधिक पायलटों की जान गई है।
कभी भारत की शान था, आज बन गया शाप
इस विमान को भारतीय सेना के खेमे में 1960 दशक में शामिल किया गया था। 1971 के युद्ध में सुपरसोनिक लड़ाकू विमान मिग-21 ने पूर्वी और पश्चिमी मोर्चों पर जमकर कहर बरपाया था। इसकी ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसने बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तानी वायुसेना के 13 लड़ाकू विमान मार गिराए थे, जबकि इसके बदले हमें सिर्फ एक को खोना पड़ा था। बालाकोट एयरस्ट्राइक के दौरान पाकिस्तान के आधुनिक एफ-16 लड़ाकू विमान को भी मिग-21 ने खदेड़ा था। उस वक्त उसको विंग कमांडर अभिनंदन ही उड़ा रहे थे।
डरावनी रिपोर्ट मजबूरी में उड़ा रहे मिग
संसद के बजट सत्र में रक्षा मंत्रालय की राज्यसभा में पेश रिपोर्ट डराने वाली है क्योंकि इसमें बताया है कि हादसों में शहीद जवानों में 34 वायुसेना के, 7 थल सेना के और 1 नौसेना के हैं। रिपोर्ट कहती है कि नए विमानों को सैन्य बलों को सौंपने की प्रक्रिया में देरी के कारण सेना को जर्जर चीता, चेतक और मिग-21 जैसे विमानों को उड़ाना पड़ रहा है।
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