ओवैसी का पलटवार: “आजादी की लड़ाई में आरएसएस का कोई योगदान नहीं..!”
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को आजादी के आंदोलन में योगदान देने वाला बताया था। ओवैसी ने दावा किया कि देश की स्वतंत्रता के लिए लड़ाई में आरएसएस का कोई भी सदस्य शहीद नहीं..
हैदराबाद। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को आजादी के आंदोलन में योगदान देने वाला बताया था। ओवैसी ने दावा किया कि देश की स्वतंत्रता के लिए लड़ाई में आरएसएस का कोई भी सदस्य शहीद नहीं हुआ।
हैदराबाद के शैखपेट में विकास कार्यों के उद्घाटन के दौरान ओवैसी ने कहा, “प्रधानमंत्री ने कहा कि आरएसएस ने स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया था। मैं हैरान था कि यह कहानी कहां से आई। इतिहास गवाह है कि देश के लिए लड़ते हुए आरएसएस का एक भी कार्यकर्ता शहीद नहीं हुआ। अगर कोई नाम बता सके तो मैं सुनने को तैयार हूँ।”
हेडगेवार की भूमिका पर टिप्पणी
ओवैसी ने माना कि आरएसएस के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल रहे थे लेकिन यह सब संगठन की स्थापना से पहले की बात है।
उन्होंने कहा, “हेडगेवार ने ब्रिटिशों का विरोध किया, खिलाफत आंदोलन का समर्थन किया और एक साल जेल में भी रहे। लेकिन, यह सब आरएसएस के गठन से पहले था।”
'क्विट इंडिया मूवमेंट' में आरएसएस की गैर-भागीदारी
ओवैसी ने कहा कि 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन जैसे ऐतिहासिक आंदोलनों में आरएसएस की कोई भागीदारी नहीं थी।
उन्होंने ब्रिटिश दस्तावेज़ों का हवाला देते हुए कहा कि "ब्रिटिश आर्काइव्स साफ बताते हैं कि आरएसएस ने आजादी की लड़ाई में हिस्सा नहीं लिया और न ही ब्रिटिश सत्ता के लिए कोई खतरा पैदा किया।"
विचारधारा पर हमला
ओवैसी ने आरएसएस की वैचारिक स्थिति की भी आलोचना की। उन्होंने एम.एस. गोलवलकर की किताब “A Bunch of Thoughts” का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें मुसलमानों, ईसाइयों और वामपंथियों को “आंतरिक खतरा” बताया गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि शुरुआती दौर में आरएसएस ने भारतीय संविधान का भी विरोध किया था।
ओवैसी ने कहा, “प्रधानमंत्री इस विचारधारा की तारीफ करते हैं, जबकि यह संविधान, समानता और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों के खिलाफ है।”
मुस्लिम नेताओं की कुर्बानी का उल्लेख
ओवैसी ने स्वतंत्रता आंदोलन में मुस्लिमों के बलिदानों को भी याद किया। उन्होंने मौलवी आलाउद्दीन और तुर्रेबाज खान जैसे स्वतंत्रता सेनानियों का जिक्र करते हुए कहा, “अगर मैं पूरी कहानी गिनाने बैठूं तो कई लोग शर्मिंदा हो जाएंगे। लेकिन, आज प्रधानमंत्री एक ऐसे संगठन की तारीफ कर रहे हैं जिसने संविधान का विरोध किया और देशवासियों की कुर्बानियों को नज़रअंदाज़ किया।”
पीएम मोदी का बयान
ओवैसी की यह प्रतिक्रिया उस एक दिन बाद आई जब प्रधानमंत्री मोदी ने नई दिल्ली में आरएसएस की शताब्दी समारोह में संगठन की भूमिका की प्रशंसा की थी।
मोदी ने कहा था, “जैसे मानव सभ्यताएं महान नदियों के किनारे फली-फूलीं, वैसे ही आरएसएस की धारा में भी अनगिनत जीवन खिले और आगे बढ़े। स्थापना से लेकर आज तक संघ ने राष्ट्र निर्माण का महान उद्देश्य अपनाया है।”
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