उड़ान' सीरियल की यादगार पुलिस अधिकारी का यूँ अलविदा कहना फैंस को रुला गया ,नहीं रही कविता चौधरी
<p>67 साल की उम्र में जानी-मानी एक्ट्रेस-प्रोड्यूसर कविता चौधरी ने दुनिया को अलविदा कह दिया। वो कैंसर से पीड़ित थीं और उनका इलाज चल रहा था। एक्ट्रेस की मौत की खबर से उनके चाहने वाले सदमे में हैं। हर कोई सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजली अर्पित कर रहा है। </p>
दूरदर्शन के चर्चित धारावाहिक उड़ान में IPSकल्याणी सिंह का किरदार निभा कर नब्बे के दशक में लड़कियों और महिलाओं की प्रेरणा बनने वाली एक्ट्रेस कविता चौधरी के अचानक मौत की खबर से उन्हें जानने चाहने वाले में हैं। आज का दिन टेलीविजन दर्शकों के लिए काफी भारी साबित हुआ। दूरदर्शन के चर्चित धारावाहिक ‘उड़ान’ की लीड एक्ट्रेस की अब मृत्यु हो गई है। कविता चौधरी (Kavita Chaudhary) का अचानक यूं दुनिया से चले जाना अब फैंस की आंखें भिगो गया है।
'उड़ान' से मिली थी कविता चौधरी को पहचान
1989 में 'उड़ान' दूरदर्शन चैनल पर टेलीकास्ट किया गया था। यह उस समय का बेहद पॉपुलर सीरियल था। शो में कविता ने आईपीएस अधिकारी कल्याणी सिंह की भूमिका निभाई थी। उन्होंने शो का लेखन ओर निर्देशन भी किया था। ये शो उनकी बहन कंचन चौधरी भट्टाचार्य के जीवन पर आधारित था, जो किरण बेदी के बाद दूसरी आईपीएस अधिकारी बनी थीं। उस समय कविता अपने शो 'उड़ान' के माध्यम से महिला सशक्तिकरण की मिसाल बन गई थीं, क्योंकि उस समय में फिल्मों ओर टेलीविजन में महिला आईपीएस अधिकारियों का ज्यादा प्रतिनिधित्व नहीं था।
इन शोज में भी किया था कविता ने काम
'उड़ान' के बाद कविता ने अपने करियर में 'योर ऑनर' और 'आईपीएस डायरीज़' जैसे शो का निर्माण भी किया था। कविता को 1980 और 1990 के दशक में फेमस सर्फ विज्ञापनों में ललिताजी की भूमिका निभाने के लिए भी जाना जाता था। एड में उन्होंने एक बुद्धिमान गृहिणी की भूमिका निभाई थी। कविता चौधरी के निधन से उनके फैंस और परिवार व दोस्त सदमे में हैं।
NSD से निकली एक्ट्रेस थीं कविता
एक्ट्रेस कविता चौधरी कविता की मौत की खबर उनके भतीजे अजय सयाल ने मीडिया को दी है। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी आखिरी सांस अमृतसर के पार्वति देवी अस्पताल में ली, जहां उनका इलाज चल रहा था
एक्टर अनंग देसाई ने भी उनकी मौत को लेकर प्रेस के साथ बात की। उन्होंने कहा, "मुझे आज सुबह पता चला कि कविता अब नहीं रही। उनका कल रात निधन हो गया। ये बहुत ही दुख की बात है। वो नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में हमारी बेचमेट थी। हमने ट्रेनिंग के दौरान एनएसडी में तीन साल तक साथ पढ़ाई की। मैं, सतीश कौशिक, अनुपम खेर, गोविंद नामदेव हम सब एक बैच में थे।वे अमृतसर से थीं और वहीं उनका निधन हुआ। मैंने लगभग 15 दिन पहले उनसे बात की थी जब वो मुंबई में थी। उनकी तबीयत ठीक नहीं थी। कविता के भतीजे ने मुझे सुबह उनकी मौत के बारे में बताया।"
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