"मेरा काम लोगों की जान बचाना है, न कि उन्हें मारना..." — 11/7 मुंबई ट्रेन ब्लास्ट केस से बरी हुए डॉ. तनवीर अंसारी की आपबीती

“मैं 2001 में भुज भूकंप के दौरान रेड क्रिसेंट सोसाइटी ऑफ इंडिया की टीम का हिस्सा था। मेरा काम ज़िंदगियाँ बचाना है, किसी की जान लेना नहीं…” ये शब्द हैं डॉ. तनवीर अंसारी (50) के, जिन्होंने 19 साल जेल में बिताए, और सोमवार को अमरावती जेल से रिहा..

"मेरा काम लोगों की जान बचाना है, न कि उन्हें मारना..." — 11/7 मुंबई ट्रेन ब्लास्ट केस से बरी हुए डॉ. तनवीर अंसारी की आपबीती
25-07-2025 - 11:05 AM
22-04-2026 - 05:53 PM

मुंबई। मैं 2001 में भुज भूकंप के दौरान रेड क्रिसेंट सोसाइटी ऑफ इंडिया की टीम का हिस्सा था। मेरा काम ज़िंदगियाँ बचाना है, किसी की जान लेना नहीं…”  ये शब्द हैं डॉ. तनवीर अंसारी (50) के, जिन्होंने 19 साल जेल में बिताए, और सोमवार को अमरावती जेल से रिहा हुए, जब बॉम्बे हाई कोर्ट ने 11/7 मुंबई लोकल ट्रेन बम धमाकों के मामले में उन्हें और 11 अन्य को बरी कर दिया।

अंसारी दक्षिण मुंबई के आगिपाड़ा इलाके के निवासी हैं और उन्हें इस केस में साज़िशकर्ता बताया गया था।
गुरुवार को डोंगरी स्थित जमीयत उलमा-ए-हिंद के दफ्तर में टाइम्स ऑफ इंडिया  से बात करते हुए उन्होंने कहा,हम भी आतंकवाद के शिकार हैं। एटीएस (ATS) की जांच हम पर और धमाकों में मारे गए या घायल हुए लोगों — दोनों पर अन्याय है। असली गुनहगार आज भी आज़ाद घूम रहे हैं।”
हम उन लोगों के साथ हैं जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया या जो धमाके में घायल हुए।”

माँ की मौत पर भी नहीं बन पाए थे मौजूद

डॉ. अंसारी साबू सिद्दीकी अस्पताल में ICU प्रभारी थे। जेल के सबसे दुखद पलों को याद करते हुए उन्होंने कहा, मैं अपनी ही माँ का इलाज नहीं कर पाया जो अस्पताल के ICU में भर्ती थीं। 2007 में उनकी मौत हो गई। एटीएस ने हमें प्रताड़ित किया, हमारे परिवारों को धमकाया। उन्होंने मुझे डंडों और चप्पलों से मारा।
उन्होंने मुझे ₹25 लाख और एक फ्लैट ऑफर किया ताकि मैं सरकारी गवाह बन जाऊं लेकिन मैंने इनकार कर दिया। मेरा इस धमाके से कोई लेना-देना नहीं था।”

बेटी को गोद में लिया डेढ़ साल बाद

जब उन्हें गिरफ्तार किया गया, उनकी पत्नी तीन महीने की गर्भवती थीं। अंसारी ने कहा, मेरी बेटी का जन्म जेल में रहने के दौरान हुआ। मैंने उसे अपनी गोद में डेढ़ साल बाद उठाया। मेरी पत्नी ने अकेले बहुत कुछ झेला  और मेरी बेटी 19 साल मेरे बिना बड़ी हुई। आज वह डॉक्टर बनना चाहती है, यह मेरे लिए गर्व की बात है।”

"मुझे अस्पताल से जबरन घसीट ले गए"

डॉ. अंसारी ने बताया कि कैसे उन्हें 2006 में अस्पताल से जबरन गिरफ्तार किया गया, क्राइम ब्रांच के अफसर मुझे अस्पताल से घसीटकर ले गए, मेरा एप्रन फाड़ दिया और कई दिनों तक अवैध हिरासत में रखा। बाद में एटीएस ने दिखाया कि मुझे उसी दौरान 'गिरफ्तार' किया गया। उन्होंने मुझ पर नार्को टेस्ट, ब्रेन मैपिंग और लाई डिटेक्टर टेस्ट किए, लेकिन कुछ नहीं मिला।
यह सब सिर्फ अपनी झूठी जांच को वैज्ञानिक दिखाने के लिए किया गया।”

जेल में पढ़ाई पूरी की, मरीजों का इलाज किया

जेल में रहते हुए डॉ. अंसारी ने डिजास्टर मैनेजमेंट का सर्टिफिकेट कोर्स, राजनीति विज्ञान में BA और MA की डिग्री हासिल की। उन्होंने कहा, मैं एटीएस से कहना चाहता हूं, आपने मेरी ज़िंदगी बर्बाद कर दी, अब कम से कम मेरी नौकरी लगवाने में मदद करो,”
उन्होंने बताया कि उन्होंने अमरावती जेल के अस्पताल में असिस्टेंट के रूप में 2022 से 2024 के दौरान मरीजों का इलाज किया।

SIMI केस में भी बरी हो चुके

2001 में उनके खिलाफ प्रतिबंधित संगठन SIMI से कथित संबंध का भी केस दर्ज हुआ था, जिसमें वे 2012 में बरी हो चुके हैं।

यह कहानी न केवल न्यायिक प्रणाली की गंभीर खामियों की ओर इशारा करती है, बल्कि यह भी बताती है कि आतंकवाद के झूठे आरोपों में फंसे लोग और उनके परिवार किस मानसिक, सामाजिक और आर्थिक त्रासदी से गुजरते हैं।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।