सरप्राइज बीजेपी उम्मीदवार ने मध्य प्रदेश की राज्यसभा चुनावी जंग को बनाया रोमांचक, तीसरी सीट पर कांटे की टक्कर
मध्य प्रदेश में 18 जून को होने वाला राज्यसभा चुनाव अब एक दिलचस्प राजनीतिक मुकाबले में बदल गया है। चार्टर्ड फ्लाइट से विधायकों को बेंगलुरु भेजना, नोटों से भरे बैगों के आरोप और बीजेपी द्वारा अचानक तीसरा उम्मीदवार उतारना—इन सबने चुनाव को राजनीतिक ड्रामा बना..
मध्य प्रदेश में 18 जून को होने वाला राज्यसभा चुनाव अब एक दिलचस्प राजनीतिक मुकाबले में बदल गया है। चार्टर्ड फ्लाइट से विधायकों को बेंगलुरु भेजना, नोटों से भरे बैगों के आरोप और बीजेपी द्वारा अचानक तीसरा उम्मीदवार उतारना—इन सबने चुनाव को राजनीतिक ड्रामा बना दिया है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि राज्य की तीसरी राज्यसभा सीट आखिर किसके खाते में जाएगी।
राज्यसभा चुनाव का गणित
230 सदस्यीय मध्य प्रदेश विधानसभा में राज्यसभा का चुनाव जीतने के लिए किसी उम्मीदवार को 58 वोटों की आवश्यकता होती है।
बीजेपी के पास 164 विधायक हैं, जिसके आधार पर वह तीन खाली सीटों में से दो सीटें आसानी से जीत सकती है। पार्टी ने वरिष्ठ नेताओं तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल को उम्मीदवार बनाया है।
बीजेपी का सरप्राइज दांव
इसके बाद बीजेपी ने सभी को चौंकाते हुए तीसरे उम्मीदवार के रूप में मध्य प्रदेश मत्स्य कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष महेश केवट को मैदान में उतार दिया। उनका मुकाबला कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन से होगा।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, "बीजेपी ने महेश केवट को राज्यसभा भेजकर समाज के सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की अपनी प्रतिबद्धता को साबित किया है।"
संख्या का खेल
164 विधायकों वाली बीजेपी को दो सीटें जीतने के लिए 116 वोटों की जरूरत है। इसके बाद उसके पास तीसरे उम्मीदवार के लिए 48 वोट बचते हैं।
दूसरी ओर कांग्रेस को लगातार झटके लगे हैं।
- विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद कांग्रेस के पास अब 61 विधायक रह गए हैं।
- मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा को मतदान करने से भी रोक दिया है।
इसके अलावा, कांग्रेस के टिकट पर चुनी गईं निर्मला सप्रे के राज्यसभा चुनाव में बीजेपी का समर्थन करने की संभावना जताई जा रही है। वहीं भारतीय आदिवासी पार्टी के विधायक कमलेश्वर डोडियार भी बीजेपी के साथ माने जा रहे हैं।
फिर भी कागजी गणित के आधार पर तीसरी सीट के मुकाबले में कांग्रेस को मामूली बढ़त दिखाई देती है।
कांग्रेस अपने विधायकों को बेंगलुरु क्यों भेज रही है?
यदि आंकड़े कांग्रेस के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं, तो फिर उसके विधायकों को कर्नाटक क्यों भेजा जा रहा है? इसका कारण है क्रॉस वोटिंग और दल-बदल का डर। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि बीजेपी के कुछ नेताओं ने उनके विधायकों से संपर्क कर उन्हें धन का लालच दिया है।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दावा किया कि कुछ विधायकों ने उन्हें बताया कि बीजेपी उन्हें खरीदने की कोशिश कर रही है और उनके पास "नोटों से भरे बैग" लेकर पहुंची है। हालांकि बीजेपी ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
बेंगलुरु क्यों?
किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से बचने के लिए कांग्रेस ने अपने विधायकों को बेंगलुरु भेजने का फैसला किया है, जहां वे मतदान तक रहेंगे।
कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार होने के कारण पार्टी को वहां अपने विधायकों को सुरक्षित रखने में सुविधा दिखाई दे रही है।
विधायकों को अलग-अलग समूहों में चार्टर्ड फ्लाइट के जरिए भेजा जा रहा है और मतदान से ठीक पहले उन्हें भोपाल वापस लाया जाएगा।
बीजेपी प्रवक्ता हितेश बाजपेयी ने कहा कि यदि कांग्रेस को अपने विधायकों पर भरोसा होता तो उन्हें राज्य से बाहर भेजने की जरूरत ही नहीं पड़ती।
कांग्रेस का जवाब
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह कदम केवल पार्टी को एकजुट रखने के लिए उठाया गया है। कांग्रेस विधायक विक्रांत भूरिया ने कहा, "वे संवैधानिक अधिकारों की हत्या करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे।"
वहीं कांग्रेस विधायक झूमा सोलंकी ने कहा, "हाईकमान और प्रदेश नेतृत्व ने हमें एकजुट रहने के निर्देश दिए हैं। हम सभी साथ जा रहे हैं। हमारी उम्मीदवार मजबूत हैं और वे 100 प्रतिशत जीतेंगी। सभी विधायक समझदार हैं और हम सब एक हैं।"
उड़ान को लेकर भी विवाद
बाद में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सज्जन सिंह वर्मा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस विधायकों को लेकर बेंगलुरु जाने वाली फ्लाइट को भोपाल एयरपोर्ट से उड़ान भरने की अनुमति नहीं दी जा रही थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार घबराहट में कांग्रेस की रणनीति को विफल करने और लोकतंत्र को कुचलने की कोशिश कर रही है।
2020 की राजनीतिक घटना का साया
कांग्रेस की यह सतर्कता छह साल पहले हुई एक बड़ी राजनीतिक घटना से जुड़ी हुई है। साल 2020 में कमलनाथ सरकार उस समय गिर गई थी जब ज्योतिरादित्य सिंधिया और कांग्रेस के 22 विधायक पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए थे।
इसी घटनाक्रम के बाद मध्य प्रदेश में बीजेपी की सत्ता में वापसी हुई थी। यह घटना आज भी राज्य में कांग्रेस के लिए सबसे बड़े राजनीतिक झटकों में से एक मानी जाती है।
राज्यसभा चुनाव 2026 का व्यापक परिदृश्य
18 जून को देश के 10 राज्यों की कुल 24 राज्यसभा सीटों के लिए मतदान होगा। बीजेपी के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) उच्च सदन में अपनी संख्या और मजबूत करने की कोशिश करेगा।
वर्तमान में राज्यसभा की 245 सदस्यीय संरचना में:
- बीजेपी के पास 113 सदस्य हैं।
- बीजेपी नेतृत्व वाले एनडीए के कुल 149 सदस्य हैं।
- जिन 24 सीटों पर चुनाव हो रहा है, उनमें से 12 सीटें फिलहाल बीजेपी और 4 सीटें कांग्रेस के पास हैं।
इसके अलावा महाराष्ट्र और तमिलनाडु में एक-एक राज्यसभा सीट के लिए उपचुनाव भी कराए जाएंगे।
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट अब केवल संख्या का नहीं बल्कि रणनीति, पार्टी अनुशासन और विधायकों की एकजुटता का इम्तिहान बन गई है। बीजेपी का अप्रत्याशित उम्मीदवार, कांग्रेस की बेंगलुरु रणनीति और 2020 की राजनीतिक यादें इस चुनाव को बेहद रोमांचक बना रही हैं। अब 18 जून को होने वाला मतदान ही तय करेगा कि तीसरी सीट पर किसका कब्जा होगा।
What's Your Reaction?