बीजेपी एमएलसी ने किया गौहत्या प्रतिबंध कानून और गौ-रक्षक गतिविधियों का विरोध
गौ-रक्षकों की आक्रामक गतिविधियों ने महाराष्ट्र की महायुति सरकार के भीतर मतभेदों को उजागर कर दिया है। सत्ता पक्ष के भाजपा के एमएलसी सदाभाऊ खोत ने गाय, बैल और बैलों की हत्या पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून पर नाराज़गी जताई और कहा कि यह प्रतिबंध केवल भारतीय नस्ल की गायों तक..
मुंबई। गौ-रक्षकों की आक्रामक गतिविधियों ने महाराष्ट्र की महायुति सरकार के भीतर मतभेदों को उजागर कर दिया है। सत्ता पक्ष के भाजपा के एमएलसी सदाभाऊ खोत ने गाय, बैल और बैलों की हत्या पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून पर नाराज़गी जताई और कहा कि यह प्रतिबंध केवल भारतीय नस्ल की गायों तक सीमित होना चाहिए।
इससे पहले उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की थी, जिसके बाद पुलिस ने परिपत्र जारी किया कि केवल वही अवैध पशु परिवहन पर कार्रवाई कर सकते हैं, निजी लोग नहीं।
गोहत्या प्रतिबंध और गौ-रक्षकों की गतिविधियाँ राज्य में विवाद का विषय बन गई हैं। मानसून सत्र में भाजपा नेतृत्व वाली महायुति सरकार ने बीफ़ तस्करी की शिकायतों का हवाला देते हुए कहा कि वह गौहत्या प्रतिबंध कानून को और कड़ा करेगी तथा बार-बार अपराध करने वालों की सज़ा बढ़ाएगी।
पशुपालकों और व्यापारियों की परेशानियाँ
जुलाई में कत्लखानों और पशु व्यापार से जुड़े कुरैशी समुदाय ने पुलिस और कथित गो-रक्षकों द्वारा की जा रही परेशानियों का विरोध किया। आरोप है कि वे न केवल गाड़ियाँ जब्त करते हैं बल्कि मवेशियों का परिवहन करने वालों पर हमला भी करते हैं।
इसके बाद उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की और बैठक के बाद पुलिस ने परिपत्र जारी किया कि निजी व्यक्तियों को ट्रांसपोर्ट वाहनों की जांच करने का कोई अधिकार नहीं है।
सदाभाऊ खोत का विरोध
इसी बीच भाजपा के एमएलसी सदाभाऊ खोत ने गाय, बैल और बैलों की हत्या पर लगे प्रतिबंध का विरोध किया। उन्होंने कहा, “किसानों के लिए डेयरी आय का दूसरा साधन है और उनके आर्थिक तंत्र का हिस्सा है। पहले किसान अनुपयोगी गाय और बैल बेच दिया करते थे, लेकिन अब इस कानून की वजह से वे ऐसा नहीं कर सकते, क्योंकि कोई खरीदार नहीं है।”
उन्होंने कहा कि किसानों से यह अतिरिक्त आय छिन गई है और अब उन्हें अनुपयोगी मवेशियों का पालन-पोषण करने का बोझ उठाना पड़ रहा है।
खोत ने समझाया,“दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए किसान राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों से गाय लाते थे। वे दूध उत्पादन के लिए बैल भी बेचते या मंगवाते थे। लेकिन अब गौ-रक्षकों के हमलों और छापेमारी की वजह से पशु परिवहन कठिन हो गया है और इससे दूध उत्पादन की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है।” उन्होंने आरोप लगाया कि कई गौ-रक्षक अब उगाही करने वाले बन चुके हैं।
भारतीय नस्ल तक सीमित करने की मांग
खोत ने कहा—“यह गोहत्या प्रतिबंध कानून सिर्फ भारतीय नस्ल की गायों पर लागू होना चाहिए। हाइब्रिड जर्सी गायों को इसमें शामिल करने का कोई तुक नहीं है।” उन्होंने बताया कि किसानों के पास 90% जर्सी-हाइब्रिड गायें हैं और सिर्फ 10% ही भारतीय नस्ल की हैं।
खोत ने यह भी माँग की कि गौशालाएँ किसानों से गायें बाज़ार भाव पर खरीदें, न कि मुफ्त में लें।
“भारत में रहता हूँ, भारत के किसानों के बीच”
खोत ने कहा कि वह अब चुप नहीं रह सकते, क्योंकि वे किसान परिवार से आते हैं। किसानों के बीच जीवन बिताने वाले होने के नाते वे उनकी पीड़ा और आर्थिक तनाव को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते।
उन्होंने कहा,“सरकार के लिए किसान केवल गुलाम हैं और गुलामों को अपनी आवाज़ उठाने का हक़ नहीं है।” उन्होंने यह भी कहा कि“मैं भारत में रहता हूँ, जहाँ किसान रहते हैं, न कि उस इंडिया में जो किसानों की समस्याओं से बहुत दूर है।”
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