बंगाल के फलता चुनाव में बड़ा सवाल: चुनाव से हटने के बाद भी टीएमसी के जहांगीर खान को कैसे मिले 3.7% वोट?

पश्चिम बंगाल की फलता विधानसभा सीट पर हुए पुनर्मतदान की मतगणना के दौरान एक दिलचस्प और राजनीतिक रूप से अहम तथ्य सामने आया। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवार जहांगीर खान ने चुनाव मैदान से हटने की सार्वजनिक घोषणा कर दी थी, इसके बावजूद उन्हें आधिकारिक नतीजों में 3.7 प्रतिशत वोट..

बंगाल के फलता चुनाव में बड़ा सवाल: चुनाव से हटने के बाद भी टीएमसी के जहांगीर खान को कैसे मिले 3.7% वोट?
25-05-2026 - 09:54 AM

पश्चिम बंगाल की फलता विधानसभा सीट पर हुए पुनर्मतदान की मतगणना के दौरान एक दिलचस्प और राजनीतिक रूप से अहम तथ्य सामने आया। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवार जहांगीर खान ने चुनाव मैदान से हटने की सार्वजनिक घोषणा कर दी थी, इसके बावजूद उन्हें आधिकारिक नतीजों में 3.7 प्रतिशत वोट मिले।

24 मई को घोषित नतीजों में भाजपा उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने एक लाख से अधिक वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज की। उन्हें कुल वोटों का 70 प्रतिशत से ज्यादा समर्थन मिला। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) के शंभू नाथ कुर्मी करीब 20 प्रतिशत वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। कांग्रेस के अब्दुर रज्जाक मुल्ला को लगभग 4.8 प्रतिशत वोट मिले।

इन सबके बीच सबसे अधिक चर्चा टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान को मिले 3.7 प्रतिशत वोटों की रही। खास बात यह रही कि खान ने 21 मई को हुए पुनर्मतदान में खुद अपना वोट तक नहीं डाला था।

जहांगीर खान ने चुनाव से हटने का फैसला क्यों किया?

जहांगीर खान ने 19 मई को, यानी पुनर्मतदान से दो दिन पहले, चुनावी मुकाबले से हटने की घोषणा की थी। उन्होंने इसके पीछे मुख्य कारण के तौर पर नए मुख्यमंत्री और भाजपा नेता Suvendu Adhikari द्वारा फलता क्षेत्र के विकास के लिए किए गए वादों को बताया।

41 वर्षीय जहांगीर खान, जो दक्षिण 24 परगना जिले में एक प्रभावशाली मुस्लिम कारोबारी और राजनीतिक चेहरा माने जाते हैं, ने कहा था, “मुख्यमंत्री ने फलता के विकास के लिए विशेष पैकेज की घोषणा की है। इसी वजह से मैंने पुनर्मतदान की प्रक्रिया से हटने का फैसला किया है।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं फलता का बेटा हूं और चाहता हूं कि यह इलाका शांति और विकास के रास्ते पर आगे बढ़े। मेरा सपना था कि फलता ‘सोनार फलता’ बने। लोगों की शांति और समृद्धि के लिए मैं पीछे हट रहा हूं।”

हालांकि, खान के इस बयान के बाद All India Trinamool Congress ने स्पष्ट किया कि चुनाव से हटने का फैसला उनका व्यक्तिगत निर्णय था और पार्टी ने इसकी अनुमति नहीं दी थी।

बंगाल चुनाव और हिंसा का माहौल

पश्चिम बंगाल में 15 वर्षों तक सत्ता में रही Mamata Banerjee के नेतृत्व वाली टीएमसी को इस चुनाव में बड़ा झटका लगा और भाजपा ने 294 में से 293 सीटों के नतीजों के बाद सत्ता हासिल कर ली।

फलता सीट पर पुनर्मतदान कराने का फैसला चुनाव आयोग ने हिंसा और चुनावी गड़बड़ियों की शिकायतों के बाद लिया था। आरोप थे कि मतदान के दौरान भाजपा समर्थकों और टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक घटनाएं हुईं। मतदाताओं ने यह भी आरोप लगाया था कि टीएमसी कार्यकर्ता ईवीएम पर अन्य उम्मीदवारों के नामों पर काली टेप लगा रहे थे।

इस दौरान जहांगीर खान और चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त आईपीएस अधिकारी Ajay Pal Sharma के बीच भी तीखी बहस देखने को मिली थी।

फिर ईवीएम पर नाम क्यों बना रहा?

दरअसल, जहांगीर खान का चुनाव से हटना केवल एक राजनीतिक घोषणा थी, कानूनी तौर पर मान्य वापसी नहीं।

जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 37 के अनुसार, कोई भी उम्मीदवार केवल नामांकन पत्रों की जांच पूरी होने के बाद तय समय सीमा के भीतर ही अपना नाम वापस ले सकता है। एक बार यह समयसीमा समाप्त हो जाने के बाद उम्मीदवारों की अंतिम सूची कानूनी रूप से तय हो जाती है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण, जिसमें फलता सीट शामिल थी, के लिए नाम वापसी की अंतिम तारीख 13 अप्रैल थी। जबकि जहांगीर खान ने 19 मई को चुनाव से हटने की घोषणा की। यानी कानूनी समयसीमा खत्म होने के कई सप्ताह बाद।

इसी वजह से उनका नाम और टीएमसी का चुनाव चिन्ह ईवीएम से हटाया नहीं जा सका।

पुनर्मतदान में पुराने उम्मीदवार ही क्यों रहे?

चुनाव आयोग ने 29 अप्रैल को हुए मूल मतदान में “गंभीर चुनावी अपराध और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने” की शिकायतों के बाद 21 मई को फलता के सभी 285 बूथों पर दोबारा मतदान कराने का आदेश दिया था। लेकिन, नियमों के अनुसार पुनर्मतदान उसी उम्मीदवार सूची और उसी ईवीएम कॉन्फ़िगरेशन के साथ कराया जाता है, जो मूल मतदान के समय मौजूद थी।

इसलिए जहांगीर खान का नाम और टीएमसी का “दो फूल” चुनाव चिन्ह ईवीएम पर बना रहा। ऐसे में जो मतदाता टीएमसी के समर्थन में वोट देना चाहते थे, या जिन्हें खान के हटने की जानकारी नहीं थी, उन्होंने उसी बटन को दबाया। हर ऐसा वोट कानूनी रूप से वैध माना गया और उसकी गिनती की गई।

रिपोर्ट के अनुसार, जहांगीर खान को मिले वोटों में लगभग एक-चौथाई पोस्टल बैलेट से आए थे, जिन्हें संभवतः उनके चुनाव से हटने की घोषणा से पहले ही डाला जा चुका था।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।