टूटी हुई फैक्स मशीन जिसने जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक तूफान खड़ा किया: एक सत्यपाल मलिक क्षण जो वायरल हो गया
जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक, जिनका मंगलवार को निधन हो गया, को उनकी अनेक भूमिकाओं के लिए याद किया जाएगा लेकिन उनके कार्यकाल का एक सबसे विचित्र और राजनीतिक रूप से विस्फोटक क्षण एक टूटी हुई फैक्स मशीन से जुड़ा है, जो आज भी चर्चा ..
नयी दिल्ली/श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक, जिनका मंगलवार को निधन हो गया, को उनकी अनेक भूमिकाओं के लिए याद किया जाएगा लेकिन उनके कार्यकाल का एक सबसे विचित्र और राजनीतिक रूप से विस्फोटक क्षण एक टूटी हुई फैक्स मशीन से जुड़ा है, जो आज भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
यह मामला 2018 का है.. अनुच्छेद 370 और 35A के हटाए जाने से कुछ ही महीने पहले। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) के साथ अपना गठबंधन तोड़ दिया था, जिससे राज्य में राजनीतिक अनिश्चितता पैदा हो गई।
ड्रामा शुरू होता है
इस अनिश्चितता के बीच PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने अचानक दावा किया कि उन्हें नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और कांग्रेस का समर्थन प्राप्त है.. कुल मिलाकर 56 विधायकों का बहुमत। उन्होंने इस समर्थन पत्र को राजभवन में फैक्स किया, ताकि सरकार बनाने का दावा प्रस्तुत किया जा सके।
लेकिन यहां ट्विस्ट आया, राज्यपाल कार्यालय ने दावा किया कि उन्हें कोई फैक्स मिला ही नहीं।
इसी दौरान पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के सज्जाद लोन ने भी दावा किया कि उन्होंने भी अपनी ओर से समर्थन पत्र भेजा है। जब फैक्स मशीन काम नहीं कर रही थी, तो लोन ने व्यंग्य करते हुए ट्वीट किया, "फैक्स काम नहीं कर रहा। हमने व्हाट्सएप पर माननीय राज्यपाल के PA को भेज दिया है।"
विधानसभा भंग और सियासी हलचल
राजभवन में दोनों ओर से दावे पहुंचे नहीं थे या कहें, “फैक्स मशीन खराब थी”। राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने बिना किसी को सरकार बनाने का मौका दिए सीधे ही विधानसभा भंग कर दी। उन्होंने इसके पीछे घोड़ों की खरीदफरोख्त और अस्थिरता का हवाला दिया।
महबूबा मुफ्ती ने तीखा हमला किया और कहा,"हैरानी की बात है कि हमारा पत्र फैक्स से नहीं पहुंच सका, लेकिन विधानसभा भंग करने वाला पत्र तुरंत निकल गया!"
ओमर अब्दुल्ला (जो अब मुख्यमंत्री हैं) ने भी चुटकी ली, "राजभवन को तत्काल एक नई फैक्स मशीन की ज़रूरत है।"
राज्यपाल मलिक का पक्ष
बाद में एक साक्षात्कार में सत्यपाल मलिक ने अपने निर्णय का बचाव किया और कहा, "वहां स्थिर सरकार की कोई संभावना नहीं थी। घोड़े खरीद-फरोख्त (हॉर्स ट्रेडिग) की रिपोर्टें थीं। मैंने वही किया जो ज़रूरी था।"
अब जब श्रद्धांजलियाँ आ रही हैं…
अब जब देश सत्यपाल मलिक को श्रद्धांजलि दे रहा है, यह “फैक्स मशीन” प्रकरण उनके कार्यकाल की सबसे अजीब लेकिन ऐतिहासिक घटनाओं में गिना जा रहा है.. एक ऐसा प्रतीक जिसने लोकतंत्र, तकनीक और सियासत को एक साथ जोड़ दिया।
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