जुमे के खुत्बे में मीरवाइज ने प्रधानमंत्री मोदी का किया उल्लेख, वीडियो वायरल

कश्मीर के प्रमुख धर्मगुरु और अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक की जुमे की नमाज के दौरान की गई टिप्पणी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर दिए गए उनके बयान को कई सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने प्रधानमंत्री की प्रशंसा के रूप में देखा..

जुमे के खुत्बे में मीरवाइज ने प्रधानमंत्री मोदी का किया उल्लेख, वीडियो वायरल
29-06-2026 - 09:12 AM

कश्मीर के प्रमुख धर्मगुरु और अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक की जुमे की नमाज के दौरान की गई टिप्पणी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर दिए गए उनके बयान को कई सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने प्रधानमंत्री की प्रशंसा के रूप में देखा है। श्रीनगर की जामिया मस्जिद में नमाजियों को संबोधित करते हुए मीरवाइज ने कहा कि नरेंद्र मोदी भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले प्रधानमंत्रियों में से एक हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि प्रधानमंत्री बनने के शुरुआती दौर में मोदी ने क्षेत्रीय सहयोग और पड़ोसी देशों के साथ संबंध सुधारने पर विशेष जोर दिया था।

 बयानों पर छिड़ी सोशल मीडिया बहस

 मीरवाइज के भाषण के वीडियो और क्लिप्स तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। कई लोगों ने दावा किया कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की सराहना की है। अपने संबोधन में मीरवाइज ने कहा कि जब प्रधानमंत्री मोदी ने पहली बार पदभार संभाला था, तब उन्होंने दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने और पड़ोसी देशों के साथ संबंध मजबूत करने की इच्छा जताई थी।

उनके अनुसार, उस समय इन पहलों ने पूरे दक्षिण एशिया में उम्मीद की एक नई किरण जगाई थी। उन्होंने कहा कि भारत के सबसे लंबे समय तक कार्यरत नेताओं में शामिल होने के कारण प्रधानमंत्री मोदी के पास एक बार फिर उसी सहयोग और संवाद की भावना को पुनर्जीवित करने तथा भारत और पाकिस्तान के बीच सार्थक बातचीत की प्रक्रिया शुरू करने का अवसर है।

 टकराव नहीं, संवाद ही समाधान

 पश्चिम एशिया के हालिया घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए मीरवाइज ने कहा कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच हुए टकराव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल सैन्य कार्रवाई से स्थायी शांति स्थापित नहीं की जा सकती। उनका कहना था कि लंबे संघर्ष और भारी जनहानि के बावजूद अंततः देशों को बातचीत की मेज पर लौटना ही पड़ता है।

उन्होंने अपने पिता मीरवाइज मौलवी फारूक, जिनकी वर्ष 1990 में हत्या कर दी गई थी, को याद करते हुए कहा कि पिछले तीन दशकों से अधिक समय से वे भी हिंसा के बजाय संवाद की वकालत करते रहे हैं। मीरवाइज के अनुसार, स्थायी शांति के लिए धैर्य, कूटनीति और अलग विचार रखने वाले पक्षों से भी बातचीत करने की इच्छा आवश्यक है।

 उन्होंने यह भी कहा कि अतीत में हुर्रियत नेताओं और पूर्व प्रधानमंत्रियों अटल बिहारी वाजपेयी तथा मनमोहन सिंह के बीच हुई बातचीत ने राजनीतिक मतभेदों के बावजूद अविश्वास कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।