21 जुलाई के 'शहीद दिवस' आयोजन के लिए तृणमूल कांग्रेस ने मांगी अनुमति, कोलकाता पुलिस को लिखा पत्र
अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) ने 21 जुलाई को आयोजित होने वाले 'शहीद दिवस' कार्यक्रम के लिए कोलकाता पुलिस आयुक्त को पत्र लिखकर अनुमति मांगी है। पार्टी ने विक्टोरिया हाउस, एस्प्लेनेड के सामने इस कार्यक्रम के आयोजन के साथ-साथ 19 से 21 जुलाई तक आवश्यक व्यवस्थाएं करने की भी अनुमति का अनुरोध किया..
अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) ने 21 जुलाई को आयोजित होने वाले 'शहीद दिवस' कार्यक्रम के लिए कोलकाता पुलिस आयुक्त को पत्र लिखकर अनुमति मांगी है। पार्टी ने विक्टोरिया हाउस, एस्प्लेनेड के सामने इस कार्यक्रम के आयोजन के साथ-साथ 19 से 21 जुलाई तक आवश्यक व्यवस्थाएं करने की भी अनुमति का अनुरोध किया है। पत्र में कहा गया है कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में कई वर्षों से 21 जुलाई को विक्टोरिया हाउस के सामने 'शहीद दिवस' मनाया जाता रहा है और पार्टी इस वर्ष भी इस परंपरा को जारी रखना चाहती है।
पत्र में लिखा गया है, "पश्चिम बंगाल की लोकतांत्रिक परंपरा से जुड़े इस लंबे सामाजिक-राजनीतिक आयोजन की भावना को वर्ष 2026 में भी निरंतर बनाए रखने के उद्देश्य से अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस 21 जुलाई 'शहीद दिवस' का आयोजन करेगी। इसलिए हम आपसे 19 से 21 जुलाई 2026 तक आवश्यक अनुमति प्रदान करने का अनुरोध करते हैं।"
पार्टी ने यह भी बताया कि हालांकि मुख्य कार्यक्रम 21 जुलाई को शाम 4 बजे तक समाप्त हो जाएगा, लेकिन बड़ी संख्या में एकत्रित लोगों के सुरक्षित और व्यवस्थित रूप से वापस जाने में कुछ अतिरिक्त समय लग सकता है।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि इस वर्ष कार्यक्रम में आने वाली भीड़ का आकार पिछले वर्षों के समान ही रहने की संभावना है। इसमें कहा गया, "रिकॉर्ड और संदर्भ के लिए यह उल्लेखनीय है कि लोगों की संख्या पिछले कई वर्षों की तरह ही रहने की संभावना है, जिसका पूरा विवरण आपके कार्यालय के पास उपलब्ध है।" पार्टी ने पुलिस से अनुरोध किया कि वह इस आवेदन पर विचार कर यथासंभव एक सप्ताह के भीतर अपनी स्वीकृति प्रदान करे।
क्या है 'शहीद दिवस' का महत्व?
हर वर्ष 21 जुलाई को मनाया जाने वाला 'शहीद दिवस' वर्ष 1993 की उस घटना की याद में आयोजित किया जाता है, जब तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार के शासनकाल में पुलिस की गोलीबारी में युवा कांग्रेस के 13 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी। उस समय ममता बनर्जी युवा कांग्रेस की प्रमुख नेता थीं और वही इस विरोध रैली का नेतृत्व कर रही थीं। आरोप है कि इसी रैली पर पुलिस ने गोली चलाई थी, जिसके बाद से 21 जुलाई को 'शहीद दिवस' के रूप में मनाया जाता है।
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