सुप्रीम कोर्ट के एसआईआर फैसले को याचिकाकर्ताओं और देश के विपक्ष ने बताया, ‘न्यायपालिका के लिए काला दिन’.. बीजेपी ने किया बचाव

Supreme Court of India द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) को वैध ठहराए जाने के फैसले पर बुधवार को विपक्षी नेताओं और याचिकाकर्ताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कई याचिकाकर्ताओं ने इसे “न्यायपालिका के लिए काला दिन” बताया, जबकि Bharatiya Janata Party ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का बचाव करते हुए आलोचकों पर लोकतांत्रिक संस्थाओं..

सुप्रीम कोर्ट के एसआईआर फैसले को याचिकाकर्ताओं और देश के विपक्ष ने बताया, ‘न्यायपालिका के लिए काला दिन’.. बीजेपी ने किया बचाव
28-05-2026 - 10:54 AM

Supreme Court of India द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) को वैध ठहराए जाने के फैसले पर बुधवार को विपक्षी नेताओं और याचिकाकर्ताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कई याचिकाकर्ताओं ने इसे “न्यायपालिका के लिए काला दिन” बताया, जबकि Bharatiya Janata Party ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का बचाव करते हुए आलोचकों पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया।

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को चुनाव आयोग द्वारा कराए जा रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखते हुए कहा कि यह प्रक्रिया “स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव” सुनिश्चित करने की संवैधानिक आवश्यकता को आगे बढ़ाती है।

यह फैसला उन याचिकाओं पर आया था जिन्हें Association for Democratic Reforms, Mahua Moitra, Manoj Jha, K. C. Venugopal, Supriya Sule, राजनीतिक कार्यकर्ता Yogendra Yadav और अन्य ने दायर किया था। इन याचिकाओं में बिहार और अन्य राज्यों में चुनाव आयोग द्वारा जारी SIR अधिसूचनाओं को चुनौती दी गई थी।

प्रशांत भूषण बोले – “न्यायपालिका के लिए काला दिन”

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता Prashant Bhushan ने इस फैसले को “न्यायपालिका के लिए काला दिन” करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कई राज्यों में चुनाव एक “पूरी तरह पक्षपातपूर्ण” SIR प्रक्रिया के आधार पर कराए गए, जिसमें “10 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं के नाम” एक “अस्पष्ट और गैर-पारदर्शी प्रक्रिया” के जरिए हटा दिए गए।

योगेंद्र यादव ने भी उठाए सवाल

राजनीतिक कार्यकर्ता और याचिकाकर्ता Yogendra Yadav ने भी फैसले और अदालत की कार्यवाही की आलोचना की।

सोशल मीडिया मंच X पर पोस्ट करते हुए यादव ने कहा कि वह फैसला सुनने अदालत नहीं गए, क्योंकि उनके अनुसार “मामला बहुत पहले ही तय हो चुका था।” उन्होंने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट ने धीरे-धीरे SIR प्रक्रिया की संवैधानिक वैधता की जांच से ध्यान हटाकर केवल शिकायत निवारण तक मामले को सीमित कर दिया।

यादव ने यह भी दावा किया कि अदालत ने चुनाव आयोग को संवैधानिक सवालों के पूरी तरह हल हुए बिना चुनाव और SIR के अगले चरण जारी रखने की अनुमति दे दी, जिससे यह प्रक्रिया “fait accompli” यानी पहले से तय परिणाम जैसी बन गई।

उन्होंने न्यायपालिका पर लाखों मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने की अनुमति देने का आरोप लगाया और इस फैसले की तुलना आपातकाल के दौरान दिए गए विवादास्पद ADM Jabalpur case फैसले से की। यादव ने इसे “संवैधानिक आत्मसमर्पण” बताते हुए कहा कि यह “संविधान की आखिरी दीवार के ढहने” की शुरुआत साबित हो सकता है।

बीजेपी ने किया पलटवार

इन आलोचनाओं पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए Amit Malviya ने कहा कि यह “बेहद दुर्भाग्यपूर्ण” है कि सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता रहे लोग ही अब देश की सर्वोच्च संवैधानिक अदालत की मंशा पर सवाल उठा रहे हैं, सिर्फ इसलिए क्योंकि फैसला उनके पक्ष में नहीं आया।

मालवीय ने कहा कि किसी फैसले से असहमति जताना और कानूनी उपाय अपनाना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन अदालत पर मताधिकार छीनने में सहयोग देने का आरोप लगाना “लापरवाह, गैर-जिम्मेदाराना और संस्थाओं में जनता के विश्वास को कमजोर करने वाला” है।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने “सभी पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने” के बाद SIR की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा है। ऐसे में फैसले को पहले से तय बताना संवैधानिक प्रक्रियाओं के प्रति अवमानना को दर्शाता है।

बीजेपी नेता ने Yogendra Yadav पर व्यक्तिगत हमला करते हुए आरोप लगाया कि वह “एक कार्यकर्ता के रूप में खुद को पेश करते हुए अव्यवस्था, विकृति और राजनीतिक नाटकबाजी पर फलते-फूलते हैं।”

उन्होंने कहा कि भारत का लोकतंत्र “उन स्वयंभू योद्धाओं की निराशावादी सोच से कहीं अधिक मजबूत है, जो केवल उसी संस्था को वैध मानते हैं जो उनके अनुसार फैसला दे।”

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।