आई-पैक छापे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में ईडी बनाम ‘दीदी’ आमने-सामने: एफआईआर पर रोक, टाइमिंग पर सवाल, रुकावट के आरोप से इनकार

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री का वैधानिक एजेंसियों की कार्रवाई के दौरान “परिसरों में घुस जाने का एक चौंकाने वाला पैटर्न” रहा है। शीर्ष अदालत ईडी की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कोलकाता में पिछले हफ्ते आई-पैक (I-PAC) पर की गई छापेमारी के दौरान कथित हस्तक्षेप का मुद्दा उठाया..

आई-पैक छापे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में ईडी बनाम ‘दीदी’ आमने-सामने: एफआईआर पर रोक, टाइमिंग पर सवाल, रुकावट के आरोप से इनकार
16-01-2026 - 10:48 AM

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री का वैधानिक एजेंसियों की कार्रवाई के दौरान परिसरों में घुस जाने का एक चौंकाने वाला पैटर्न” रहा है। शीर्ष अदालत ईडी की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कोलकाता में पिछले हफ्ते आई-पैक (I-PAC) पर की गई छापेमारी के दौरान कथित हस्तक्षेप का मुद्दा उठाया गया है। आई-पैक वह राजनीतिक परामर्श फर्म है, जो तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए काम करती है।

सुप्रीम कोर्ट ने आई-पैक पर छापों से जुड़े मामले में ईडी अधिकारियों के खिलाफ पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर पर रोक लगा दी। अदालत ने कहा कि यह मामला केंद्रीय एजेंसियों की जांच में कथित हस्तक्षेप जैसे गंभीर और दूरगामी सवाल उठाता है।

ईडी की मांग: वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को निलंबित किया जाए

ईडी द्वारा दायर याचिका में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT), गृह मंत्रालय (MHA) और पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है कि कथित हस्तक्षेप के लिए प्रमुख पुलिस अधिकारियों को निलंबित किया जाए। इनमें डीजीपी राजीव कुमार, मनोज कुमार वर्मा (कोलकाता पुलिस आयुक्त) और प्रियव्रत राय (डीसीपी, साउथ कोलकाता) शामिल हैं।

ईडी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और एएसजी एसवी राजू ने कहा, यह एक बेहद चौंकाने वाला पैटर्न दर्शाता है। पहले भी जब वैधानिक प्राधिकरणों ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल किया, मुख्यमंत्री परिसरों में पहुंच गईं।

तुषार मेहता ने आगे कहा, डायरेक्टर, कमिश्नर उनके साथ थे। वे सहयोगी थे। अधिकारी राजनीतिक नेताओं के साथ धरने पर बैठे। एक अधिकारी व्यक्तिगत रूप से आहत था… सीबीआई के जॉइंट डायरेक्टर के घर का घेराव किया गया… पत्थरबाजी हुई।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: हाई कोर्ट में ‘अराजकता’ से हम परेशान

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने पिछले शुक्रवार कलकत्ता हाई कोर्ट में आई-पैक छापे से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान हुई अराजकता’ की कड़ी निंदा की।
शुक्रवार को ईडी छापों को लेकर हाई कोर्ट में भारी हंगामा हुआ, जिसके चलते जज को यह कहते हुए सुनवाई स्थगित करनी पड़ी कि उनके कोर्ट रूम में भारी व्यवधान” पैदा किया गया।

तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत से कहा, हमारी याचिका की सुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में वकील और अन्य लोग हाई कोर्ट में घुस आए। यह तब होता है जब लोकतंत्र की जगह भीड़तंत्र आ जाता है।”
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, कलकत्ता हाई कोर्ट में हुई घटनाओं से हम बहुत व्यथित हैं..

ममता बनर्जी की ओर से कपिल सिब्बल की दलील

पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि ममता बनर्जी ने किसी तरह की रुकावट नहीं डाली। उन्होंने बताया कि ईडी की तलाशी के दौरान आई-पैक प्रमुख प्रतीक जैन का लैपटॉप और उनका निजी आईफोन ले जाया गया।

सिब्बल के मुताबिक, “12.05 बजे तक कोई जब्ती नहीं हुई थी। प्रतीक जैन के लैपटॉप में चुनाव से जुड़ी सारी जानकारी होगी। उन्होंने लैपटॉप और निजी आईफोन ले लिया, बस यही हुआ। कोई बाधा नहीं डाली गई। यह ईडी द्वारा साइन किया गया है… आई-पैक के पास पार्टी का सामग्री है, इसलिए ईडी वहां गई। यह ईडी की पूरी तरह से दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई है, ताकि वे ज्यादा से ज्यादा सामग्री इकट्ठा कर सकें।

छापों की टाइमिंग पर सवाल

कपिल सिब्बल ने ईडी की कार्रवाई की टाइमिंग पर भी सवाल उठाया, जो पश्चिम बंगाल में चुनाव से कुछ महीने पहले हुई। उन्होंने कहा कि जिस मामले के आधार पर ईडी ने छापेमारी का दावा किया है, उसमें आखिरी बयान 2024 में दर्ज हुआ था, तो फिर अब तक एजेंसी क्या कर रही थी?

सिब्बल ने कहा, आई-पैक के पास डेटा की एक श्रृंखला है। जब ईडी वहां गई, तो उन्हें पता था कि पार्टी का बहुत सारा डेटा वहां होगा। चुनाव के बीच वहां जाने की क्या जरूरत थी? कोयला घोटाले में आखिरी बयान 24.02.2024 को दर्ज हुआ था। तब से वे क्या कर रहे थे? चुनाव के बीच इतनी जल्दी क्यों? अगर आप जानकारी अपने हाथ में ले लेंगे, तो हम चुनाव कैसे लड़ेंगे? चेयरमैन को वहां जाने का अधिकार था। अगर हम वीडियो दिखाएं, तो झूठ उजागर हो जाएंगे। हम भी बेहद परेशान हैं। ईडी को पार्टी ऑफिस के उस हिस्से में क्यों जाना चाहिए, जहां सारी जानकारी मौजूद है?”

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने तलाशी लिए गए परिसरों की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया, प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया और काउंटर एफिडेविट मांगा। एफआईआर पर रोक 3 फरवरी को अगली सुनवाई तक जारी रहेगी।

आई-पैक छापे और कोलकाता में हाई ड्रामा

इस मामले की सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट की पीठ में जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचोली शामिल हैं। ईडी ने यह याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की है।

गुरुवार को कोलकाता में उस वक्त हाई ड्रामा देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ईडी की छापेमारी के बीच आई-पैक प्रमुख प्रतीक जैन के आवास पर “अचानक पहुंच गईं”। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी उनकी पार्टी टीएमसी की हार्ड डिस्क, आंतरिक दस्तावेज और संवेदनशील डेटा “लूटने” की कोशिश कर रहे थे।

ममता बनर्जी के ईडी कार्यालय और प्रतीक जैन के आवास पर जाने के दृश्य सामने आए, जिनमें वह पुलिसकर्मियों से घिरी नजर आईं और मीडिया व अन्य लोगों की भीड़ के बीच दस्तावेज हाथ में लिए बाहर निकलती दिखीं।

ईडी के मुताबिक, यह तलाशी अभियान मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच से जुड़ा था। छापे आई-पैक (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) के कार्यालय में भी डाले गए, जो पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी टीएमसी के लिए राजनीतिक परामर्श देने के साथ-साथ उसकी आईटी और मीडिया सेल भी संभालता है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।