दिल्ली कोर्ट ने मेधा पाटकर के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया
नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर के खिलाफ बुधवार को दिल्ली की एक अदालत ने गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया। यह कार्रवाई एक पुराने मानहानि मामले में कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करने पर की गई है..
नयी दिल्ली। नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर के खिलाफ बुधवार को दिल्ली की एक अदालत ने गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया। यह कार्रवाई एक पुराने मानहानि मामले में कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करने पर की गई है। कोर्ट ने उन्हें प्रोबेशन बॉन्ड (अच्छे आचरण की जमानत) भरने और 1 लाख रुपये का जुर्माना जमा करने का निर्देश दिया था, जिसका पालन उन्होंने नहीं किया।
यह मानहानि का मामला दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना द्वारा 23 साल पहले यानी 24 नवंबर 2000 को दर्ज किया गया था, जब वे गुजरात में एक गैर-सरकारी संस्था (NGO) के प्रमुख थे।
कोर्ट की कार्यवाही:
- अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विशाल सिंह ने 70 वर्षीय मेधा पाटकर को 8 अप्रैल को दोषी ठहराते हुए उन्हें "अच्छे आचरण" के आधार पर प्रोबेशन पर रिहा किया था लेकिन शर्त यह थी कि वे 1 लाख रुपये का जुर्माना भरें।
- बुधवार को इस मामले में पाटकर की कोर्ट में उपस्थिति, प्रोबेशन बॉन्ड जमा करने और जुर्माना भरने का दिन था।
- सक्सेना के वकील गजिंदर कुमार ने बताया कि न तो मेधा पाटकर कोर्ट में पेश हुईं और न ही उन्होंने किसी आदेश का पालन किया।
कोर्ट की टिप्पणियाँ:
- कोर्ट ने पाटकर द्वारा कार्यवाही टालने के लिए दी गई याचिका को "शरारतपूर्ण और निरर्थक" (mischievous and frivolous) करार दिया।
- कोर्ट ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर के माध्यम से NBW जारी किया है।
- वकील ने यह भी कहा कि अगर अगली सुनवाई (3 मई) तक आदेश का पालन नहीं किया गया, तो कोर्ट 8 अप्रैल को दिए गए सौम्य सजा आदेश (benevolent sentence) को बदलने पर विचार करेगा।
मामले की पृष्ठभूमि:
- वीके सक्सेना ने यह मुकदमा इसलिए दायर किया था क्योंकि मेधा पाटकर ने 2000 में एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर उन्हें "कायर" कहा था और हवाला लेनदेन में शामिल होने का आरोप लगाया था।
- पिछले साल 24 मई को एक मजिस्ट्रेट अदालत ने माना कि पाटकर के बयान न केवल मानहानिपूर्ण थे बल्कि सक्सेना की सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाने के इरादे से बनाए गए थे।
- यह भी कहा गया कि पाटकर का आरोप कि सक्सेना "गुजरात की जनता और संसाधनों को विदेशी हितों के हाथों गिरवी रख रहे हैं", उनकी ईमानदारी और सार्वजनिक सेवा पर सीधा हमला था।
- 1 जुलाई को अदालत ने मेधा पाटकर को 5 महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई थी, जिसके बाद उन्होंने सत्र न्यायालय में अपील दायर की।
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