पूर्व ASI निदेशक केके मोहम्मद की अपील: ज्ञानवापी और कृष्ण जन्मभूमि हिंदू समाज को स्वेच्छा से सौंपे मुस्लिम समुदाय
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक और प्रख्यात पुरातत्वविद् केके मोहम्मद ने एक बार फिर मुस्लिम समुदाय से वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा स्थित शाही ईदगाह परिसर को स्वेच्छा से हिंदू समुदाय को सौंपने की अपील..
नयी दिल्ली। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक और प्रख्यात पुरातत्वविद् केके मोहम्मद ने एक बार फिर मुस्लिम समुदाय से वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा स्थित शाही ईदगाह परिसर को स्वेच्छा से हिंदू समुदाय को सौंपने की अपील की है। उनका कहना है कि ये दोनों स्थल ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से हिंदुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
एक मीडिया बातचीत के दौरान केके मोहम्मद ने अपने लंबे समय से चले आ रहे रुख को दोहराते हुए कहा कि उनके व्यापक पुरातात्विक अध्ययन और स्थल निरीक्षण के आधार पर मथुरा की कृष्ण जन्मभूमि और वाराणसी का ज्ञानवापी परिसर मूल रूप से मंदिर थे।
'मैं स्वयं इन स्थलों का निरीक्षण कर चुका हूं'
केके मोहम्मद ने कहा,
उन्होंने अपने दावों के समर्थन में मुगल सम्राट औरंगजेब के शासनकाल के आधिकारिक इतिहास ग्रंथ 'आलमगीर-नामा' का भी उल्लेख किया।
'स्वेच्छा से समाधान से बढ़ेगा सांप्रदायिक सौहार्द'
केके मोहम्मद का मानना है कि यदि इन विवादित स्थलों का समाधान आपसी सहमति और स्वैच्छिक तरीके से किया जाता है, तो इससे देश में सांप्रदायिक सद्भाव को मजबूती मिलेगी।
उन्होंने कहा कि अयोध्या विवाद के दौरान भी उन्होंने इसी प्रकार शांतिपूर्ण समाधान की वकालत की थी।
इंडोनेशिया का दिया उदाहरण
पूर्व एएसआई अधिकारी ने कहा कि भारतीय मुसलमानों को मथुरा और वाराणसी के मुद्दे पर सौहार्दपूर्ण दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मुस्लिम बहुल देश इंडोनेशिया में भी रामायण और महाभारत जैसी हिंदू महाकाव्य वहां की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा हैं।
उनके अनुसार, भारत में भी पारस्परिक सम्मान और सांस्कृतिक समन्वय की भावना को इसी तरह बढ़ावा दिया जा सकता है।
कौन हैं केके मोहम्मद?
केके मोहम्मद (करिंगामन्नू कुझियिल मोहम्मद) देश के प्रतिष्ठित पुरातत्वविद् हैं और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पूर्व उत्तरी क्षेत्रीय निदेशक रह चुके हैं।
उन्हें भारतीय पुरातत्व के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए वर्ष 2019 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
उनकी प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हैं—
- फतेहपुर सीकरी में इबादत खाना की खोज।
- मध्य प्रदेश के बटेश्वर मंदिर समूह का संरक्षण एवं पुनर्स्थापन।
- भारतीय पुरातत्व के कई महत्वपूर्ण शोध कार्यों में योगदान।
राम जन्मभूमि उत्खनन दल के सदस्य रहे
केके मोहम्मद वर्ष 1976-77 में पुरातत्वविद् बी.बी. लाल के नेतृत्व में बाबरी मस्जिद स्थल पर एएसआई द्वारा किए गए उत्खनन दल के सदस्य भी रहे थे।
वह लगातार यह दावा करते रहे हैं कि उस उत्खनन में मस्जिद के नीचे पहले से मौजूद एक मंदिर संरचना के स्पष्ट पुरातात्विक प्रमाण मिले थे।
क्या है शाही ईदगाह विवाद?
मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण मुगल सम्राट औरंगजेब के शासनकाल में हुआ था।
इसी संबंध में हिंदू पक्ष की ओर से 18 अलग-अलग वाद (सूट) दायर किए गए हैं, जिनमें प्रमुख मांगें हैं—
- विवादित भूमि के स्वामित्व का अधिकार,
- मस्जिद संरचना को हटाने की मांग,
- मूल मंदिर का पुनर्स्थापन,
- तथा स्थल पर किसी भी प्रकार के आगे के परिवर्तन पर स्थायी रोक लगाने की मांग।
मामला न्यायालय में विचाराधीन
ज्ञानवापी और शाही ईदगाह दोनों विवाद वर्तमान में न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। विभिन्न पक्ष अपने-अपने ऐतिहासिक, धार्मिक और कानूनी दावों के साथ अदालत में अपनी बात रख रहे हैं। ऐसे में इन मामलों पर अंतिम निर्णय संबंधित न्यायालयों द्वारा ही लिया जाएगा।
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