ईंधन संकट के डर से पाकिस्तान में सख्ती, पीएम शहबाज शरीफ ने स्कूल बंद करने और चार दिन का कार्य सप्ताह लागू किया
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच संभावित ईंधन संकट की आशंका को देखते हुए Pakistan सरकार ने ईंधन खपत कम करने के लिए कई कड़े कदमों की घोषणा की है। सोमवार को प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने देश में अस्थायी रूप से स्कूल बंद करने, सरकारी कर्मचारियों के लिए चार दिन का कार्य सप्ताह लागू करने और सरकारी विभागों के ईंधन भत्ते में कटौती जैसे फैसले..
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच संभावित ईंधन संकट की आशंका को देखते हुए Pakistan सरकार ने ईंधन खपत कम करने के लिए कई कड़े कदमों की घोषणा की है। सोमवार को प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने देश में अस्थायी रूप से स्कूल बंद करने, सरकारी कर्मचारियों के लिए चार दिन का कार्य सप्ताह लागू करने और सरकारी विभागों के ईंधन भत्ते में कटौती जैसे फैसले किए।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार का कहना है कि ये कदम ईंधन बचाने और क्षेत्रीय संकट के कारण संभावित आपूर्ति बाधाओं से निपटने के लिए उठाए जा रहे हैं।
दो हफ्ते बंद रहेंगे स्कूल
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने टीवी पर देश को संबोधित करते हुए बताया कि पूरे पाकिस्तान में 16 मार्च से सभी स्कूल दो हफ्तों के लिए बंद रहेंगे।
साथ ही विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों को तुरंत ऑनलाइन कक्षाओं में शिफ्ट करने का निर्देश दिया गया है।
सरकारी विभागों के ईंधन भत्ते में 50% कटौती
सरकार ने ईंधन बचाने के लिए सरकारी खर्च में भी कटौती का फैसला लिया है।
शहबाज शरीफ ने कहा कि अगले दो महीनों के लिए सरकारी विभागों के ईंधन भत्ते में 50 प्रतिशत की कटौती की जाएगी।
चार दिन का कार्य सप्ताह
ईंधन खपत कम करने के लिए सरकार ने सरकारी दफ्तरों में चार दिन का कार्य सप्ताह लागू करने का भी निर्णय लिया है। हालांकि इस व्यवस्था से बैंकों को बाहर रखा गया है।
नयी योजना के तहत..
- सरकारी दफ्तर सप्ताह में सिर्फ चार दिन खुलेंगे
- 50% सरकारी कर्मचारी घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) करेंगे
- इससे आने-जाने में इस्तेमाल होने वाले ईंधन की बचत होगी
मध्य पूर्व संघर्ष का असर
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। इस वजह से तेल की कीमतों में तेजी आने का खतरा भी बना हुआ है।
पाकिस्तान अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयातित ईंधन पर निर्भर है, इसलिए वैश्विक ऊर्जा संकट का असर उस पर जल्दी पड़ता है।
सरकार के ये कदम देश में ईंधन की मांग कम करने और संभावित आपूर्ति संकट से निपटने की रणनीति का हिस्सा बताए जा रहे हैं।
What's Your Reaction?