सरकार ने विजय माल्या के कर्ज चुकाने के दावे को किया खारिज – बकाया राशि अब भी करीब ₹7,000 करोड़
उद्योगपति और भगोड़े आर्थिक अपराधी विजय माल्या द्वारा यह दावा किया गया है कि उन्होंने बैंकों का सारा कर्ज चुका दिया है और इसके बावजूद उन्हें परेशान किया जा रहा है। लेकिन सरकार और बैंकों ने उनके इस दावे को "झूठा और भ्रामक" बताते हुए सख्ती से खारिज..
नयी दिल्ली। उद्योगपति और भगोड़े आर्थिक अपराधी विजय माल्या द्वारा यह दावा किया गया है कि उन्होंने बैंकों का सारा कर्ज चुका दिया है और इसके बावजूद उन्हें परेशान किया जा रहा है। लेकिन सरकार और बैंकों ने उनके इस दावे को "झूठा और भ्रामक" बताते हुए सख्ती से खारिज कर दिया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, माल्या अब भी बैंकों के ₹6,997 करोड़ का बकाया है।
मामला क्या है?
वर्ष 2013 में जब डेब्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल (DRT) में यह मामला दर्ज हुआ था, तब किंगफिशर एयरलाइंस पर कुल ₹6,848 करोड़ की गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (NPA) थीं, जिनमें नॉन-क्यूम्युलेटिव रिडीमेबल प्रेफरेंस शेयर्स भी शामिल थे। इसमें ब्याज और अन्य चार्ज जोड़ने के बाद DRT के आदेश के अनुसार कुल देनदारी ₹17,781 करोड़ (10 अप्रैल 2019 तक) आंकी गई।
अब तक बैंकों ने ₹10,815 करोड़ की वसूली की है, जिससे ₹6,997 करोड़ अब भी बकाया रह गया है।
माल्या का दावा
माल्या ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि उन्होंने बैंकों को ₹14,000 करोड़ चुका दिए, जबकि लोन की मूल राशि केवल ₹6,200 करोड़ थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद उन्हें परेशान किया जा रहा है।
सरकार और बैंकों की प्रतिक्रिया
सरकार और बैंक अधिकारियों ने कहा कि माल्या का दावा सिर्फ मूलधन (principal) के आधार पर किया गया है, जबकि किसी भी लोन में ब्याज और दंडात्मक ब्याज (penal interest) भी शामिल होता है। विशेष रूप से जब कोई डिफॉल्टर देश से भाग चुका हो, तो यह राशि और बढ़ जाती है।
एक सरकारी अधिकारी ने कहा, “कर्ज वसूली की प्रक्रिया सभी के लिए समान होती है, चाहे उधारकर्ता किसी भी जाति, समुदाय या क्षेत्र से हो। माल्या द्वारा लगाए गए मीडिया दबाव या पक्षपात के आरोप बिल्कुल निराधार और गुमराह करने वाले हैं।”
संपत्तियों की बिक्री से वसूली
जब माल्या देश छोड़कर भाग गए, तब प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जब्त की गई उनकी संपत्तियों को PMLA कोर्ट की अनुमति से बेचा गया। इसमें गोवा की मशहूर किंगफिशर विला जैसी अचल संपत्तियां शामिल थीं। बैंकों ने इन्हीं संपत्तियों की बिक्री से ₹10,815 करोड़ की वसूली की।
हालांकि संपत्ति बिक्री के समय कोर्ट ने यह शर्त रखी थी कि यदि भविष्य में उधारकर्ता बरी होते हैं, तो बैंकों को संपत्तियां वापस करनी होंगी।
लोन मंजूरी और बैंक अधिकारियों पर जांच
किंगफिशर को दिए गए लोन के पुनर्गठन (restructuring) की भी जांच चल रही है। पूर्व IDBI बैंक प्रमुख योगेश अग्रवाल सहित कई वरिष्ठ बैंक अधिकारियों को CBI द्वारा गिरफ्तार किया गया था। उन पर लोन देने में अनियमितता बरतने के आरोप हैं।
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