‘बिना आवंटन के सरकारी जमीन पर कब्जा कैसे किया?’ गुजरात हाईकोर्ट ने टीएमसी सांसद यूसुफ पठान को लगाई कड़ी फटकार
गुजरात हाईकोर्ट ने सोमवार को पूर्व भारतीय क्रिकेटर और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद यूसुफ पठान को वडोदरा नगर निगम (VMC) की जमीन पर कथित कब्जे के मामले में कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने सवाल उठाया कि बिना किसी वैध आवंटन प्रक्रिया को पूरा किए और बिना भुगतान किए उन्होंने सार्वजनिक भूमि पर कब्जा कैसे कर लिया..
गुजरात हाईकोर्ट ने सोमवार को पूर्व भारतीय क्रिकेटर और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद यूसुफ पठान को वडोदरा नगर निगम (VMC) की जमीन पर कथित कब्जे के मामले में कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने सवाल उठाया कि बिना किसी वैध आवंटन प्रक्रिया को पूरा किए और बिना भुगतान किए उन्होंने सार्वजनिक भूमि पर कब्जा कैसे कर लिया और उसकी घेराबंदी कैसे कर दी।
'औपचारिकताएं पूरी किए बिना किसी जमीन पर कब्जा नहीं किया जा सकता'
मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति डी.एन. रे की खंडपीठ यूसुफ पठान की उस अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने हाईकोर्ट के एकल पीठ के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें "अतिक्रमणकारी" (Encroacher) करार दिया गया था।
सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक रूप से कहा, "किसी भी संपत्ति पर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी किए बिना उसका भौतिक कब्जा नहीं लिया जा सकता। जो व्यक्ति सार्वजनिक जमीन पर बिना वैधानिक प्रक्रिया के कब्जा करता है, वह अदालत से राहत की मांग नहीं कर सकता।"
अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यूसुफ पठान को दो सप्ताह के भीतर जमीन खाली करनी पड़ सकती है और सार्वजनिक संपत्ति के उपयोग एवं कब्जे के लिए उन्हें हर्जाना भी देना पड़ सकता है।
यूसुफ पठान की ओर से क्या दलील दी गई?
यूसुफ पठान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शालिन मेहता ने अदालत में कहा कि अक्टूबर 1999 की गुजरात सरकार की नीति के तहत अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों को कुछ शर्तों के साथ जमीन आवंटित करने का प्रावधान था। उनका कहना था कि यह दस्तावेज पहले एकल पीठ के समक्ष पेश नहीं किया गया था।
उन्होंने यह भी दलील दी कि वडोदरा नगर निगम ने 978 वर्गमीटर के भूखंड को बाजार मूल्य पर यूसुफ पठान को आवंटित करने का प्रस्ताव पारित किया था और इसे निगम की सामान्य सभा की मंजूरी भी मिल चुकी थी।
राज्य सरकार की मंजूरी नहीं मिलने से आवंटन अमान्य
खंडपीठ ने कहा कि यह प्रस्ताव कभी वैध आवंटन का रूप नहीं ले सका क्योंकि इसके लिए राज्य सरकार की अनिवार्य मंजूरी नहीं मिली थी।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नगर निगम के पास बिना नीलामी के जमीन आवंटित करने की कोई स्वतंत्र नीति नहीं थी।
साथ ही न्यायालय ने उन नगर निगम अधिकारियों पर भी सवाल उठाए, जिन्होंने कथित रूप से यूसुफ पठान को जमीन की घेराबंदी और कब्जा करने की अनुमति दी। अदालत ने पूरे मामले में जांच कराने की चेतावनी भी दी।
जब यूसुफ पठान के वकील ने कहा कि क्रिकेटर ने जमीन का सक्रिय उपयोग नहीं किया है, तो अदालत ने टिप्पणी की कि बिना वैध आवंटन के सार्वजनिक भूमि की घेराबंदी करना भी एक अपराध माना जाएगा।
मामले की अगली सुनवाई 15 जून को होगी।
लोकसभा चुनाव जीतने के बाद मिला था नोटिस
पश्चिम बंगाल की बहरामपुर लोकसभा सीट से जून 2024 में टीएमसी सांसद चुने जाने के कुछ ही दिनों बाद यूसुफ पठान को भाजपा शासित वडोदरा नगर निगम ने कथित अतिक्रमण हटाने का नोटिस जारी किया था।
6 जून 2024 को जारी नोटिस में कहा गया कि तांदलजा क्षेत्र स्थित टीपी स्कीम नंबर-22 और फाइनल प्लॉट नंबर-90 की 978 वर्गमीटर जमीन पर उनका कथित कब्जा है। यह भूखंड पठान परिवार के बंगले के पास स्थित है, जहां यूसुफ पठान, उनके भाई इरफान पठान और उनका परिवार रहता है।
2012 में किया था जमीन आवंटन का आवेदन
नोटिस के अनुसार, मार्च 2012 में यूसुफ पठान ने इस जमीन को आवंटित करने के लिए आवेदन किया था।
प्रक्रिया के तहत आवेदन स्टैंडिंग कमेटी और फिर जनरल बोर्ड के पास भेजा गया। मूल्यांकन समिति द्वारा न्यूनतम मूल्य तय किए जाने के बाद इसे बिना नीलामी 99 वर्ष की लीज पर विशेष मामले के रूप में राज्य सरकार को मंजूरी के लिए भेजा गया।
इसके बावजूद नगर निगम का आरोप है कि उन्होंने जमीन पर कब्जा कर लिया और उसकी घेराबंदी कर दी।
2025 में एकल पीठ ने भी माना था अतिक्रमण
अगस्त 2025 में गुजरात हाईकोर्ट की एकल पीठ ने राज्य सरकार के फैसले को सही ठहराते हुए कहा था कि बिना भुगतान के लंबे समय तक सार्वजनिक भूमि पर कब्जा बनाए रखने से कोई कानूनी अधिकार उत्पन्न नहीं होता।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की थी कि यदि समाज के लिए आदर्श माने जाने वाले प्रसिद्ध व्यक्तियों को इस तरह की राहत दी जाती है, तो इससे समाज में गलत संदेश जाएगा और न्यायपालिका पर लोगों का विश्वास कमजोर होगा।
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