भारत-चीन के बीच निवेश पर नई पहल, BRICS शिखर सम्मेलन में बड़े पैकेज का हो सकता है ऐलान

भारत और चीन के बीच निवेश को बढ़ावा देने के लिए नए ढांचे पर बातचीत चल रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देश निवेश संबंधों को मजबूत करने के लिए एक नए फ्रेमवर्क पर विचार कर रहे हैं। माना जा रहा है कि आगामी BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान इससे जुड़े किसी बड़े निवेश पैकेज का ऐलान भी हो सकता है।

भारत-चीन के बीच निवेश पर नई पहल, BRICS शिखर सम्मेलन में बड़े पैकेज का हो सकता है ऐलान
27-08-2026 - 11:35 AM
27-08-2026 - 12:27 PM

भारत और चीन कारोबारी संबंधों को फिर से गति देने के लिए एक नए निवेश ढांचे पर विचार कर रहे हैं। प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य दोनों देशों की कंपनियों के बीच सीधे कारोबारी संपर्क बढ़ाना और भारत में चीनी निवेश की प्रक्रिया को तेज करना है। छह साल से जारी ठंडे संबंधों के बाद दोनों पड़ोसी देश धीरे-धीरे आर्थिक और कूटनीतिक रिश्तों में सुधार की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

द इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की 12-13 सितंबर को होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन के लिए भारत यात्रा के दौरान बीजिंग नई दिल्ली के लिए किसी निवेश पैकेज की घोषणा कर सकता है। इस दौरान शी जिनपिंग की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात भी संभावित है। रिपोर्ट के अनुसार, इस बैठक की जमीन तैयार करने में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की हालिया बीजिंग यात्रा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

विशेष आर्थिक क्षेत्र का प्रस्ताव

दोनों देशों के बीच जिन प्रस्तावों पर चर्चा चल रही है, उनमें समुद्री मार्गों तक आसान पहुंच वाले विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) की स्थापना भी शामिल है। इसके अलावा चीनी इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियों को भारतीय बाजार में अधिक पहुंच देने पर भी विचार किया जा रहा है। इनमें चीन की प्रमुख इलेक्ट्रिक वाहन कंपनी BYD का नाम भी शामिल है।

एक अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव भारत में चीनी वित्तपोषण से एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग जोन स्थापित करने का है। इसके जरिए भारत में तैयार उत्पादों को तीसरे देशों के बाजारों तक निर्यात करने में मदद मिल सकती है। बीजिंग इस प्रस्ताव को लेकर उत्सुक बताया जा रहा है और शी जिनपिंग की 2019 के बाद पहली भारत यात्रा के दौरान संभावित निवेश की घोषणा की जा सकती है।

बड़ा नहीं, लेकिन रणनीतिक हो सकता है निवेश पैकेज

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित निवेश पैकेज का आकार बहुत बड़ा होने की संभावना नहीं है। दोनों देश फिलहाल छह साल तक जमे रहे तनाव के बाद रिश्तों को धीरे-धीरे सामान्य बनाने और मतभेदों को नियंत्रित करने पर जोर दे रहे हैं।

भारत गैर-रणनीतिक क्षेत्रों में चीनी निवेश के लिए मंजूरी की प्रक्रिया को और आसान बनाने पर भी विचार कर रहा है। हालांकि, वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC), रक्षा और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों से जुड़े निवेश पर मौजूदा प्रतिबंध जारी रहने की संभावना है।

चीन से तकनीक और कच्चे माल की सुगम आपूर्ति चाहता है भारत

नई दिल्ली की प्राथमिकताओं में चीन से तकनीक और महत्वपूर्ण कच्चे माल की निर्बाध एवं भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित करना भी शामिल है। भारत चाहता है कि इन आपूर्ति मार्गों को अधिक पूर्वानुमेय बनाया जाए, ताकि भारतीय उद्योगों को आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता में अनिश्चितता कम हो।

इसके साथ ही भारत चीन से देश में अधिक निवेश करने और भारत से चीनी बाजार में आयात बढ़ाने की मांग भी कर रहा है। खास तौर पर औद्योगिक उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने पर जोर है, ताकि दोनों देशों के बीच मौजूद भारी व्यापार घाटे को कम किया जा सके।

BRICS बैठक पर टिकी निगाहें

यदि निवेश ढांचे और संभावित पैकेज पर सहमति बनती है, तो सितंबर में होने वाला BRICS शिखर सम्मेलन भारत-चीन आर्थिक संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकता है। हालांकि, दोनों देशों के बीच संवेदनशील रणनीतिक मुद्दे अब भी मौजूद हैं, इसलिए आर्थिक रिश्तों में सुधार की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाए जाने के संकेत हैं।

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