रेयर अर्थ मैग्नेट्स में भारत हुआ ‘आत्मनिर्भर’, कैबिनेट ने 7,280 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी
दिल्ली। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को घोषणा की कि केंद्र सरकार ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए 7,280 करोड़ रुपये की Rare Earth Permanent Magnets (REPM) योजना को मंजूरी दे दी है..
नयी दिल्ली। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को घोषणा की कि केंद्र सरकार ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए 7,280 करोड़ रुपये की Rare Earth Permanent Magnets (REPM) योजना को मंजूरी दे दी है।
इस योजना के तहत 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MTPA) क्षमता वाले हाई-परफॉर्मेंस रेयर अर्थ स्थायी चुंबक (REPMs) बनाने की मैन्युफैक्चरिंग सुविधाएँ स्थापित की जाएँगी, जिससे भारत को इस क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर’ बनाया जा सके।
REPM क्या हैं और क्यों महत्वपूर्ण हैं?
Rare Earth Permanent Magnets दुनिया के सबसे शक्तिशाली चुंबकों में से होते हैं। इनका उपयोग होता है:
- इलेक्ट्रिक वाहनों में
- नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणों में (जैसे विंड टर्बाइन्स)
- इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में
- एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र में
भारत अभी तक इन चुंबकों का अधिकांश हिस्सा आयात करता है। यह परियोजना देश में पहली बार पूरी तरह एकीकृत REPM उत्पादन यूनिट्स स्थापित करेगी, जिससे आयात निर्भरता कम होगी, रोजगार उत्पन्न होंगे, और भारत के नेट ज़ीरो 2070 लक्ष्य को मजबूती मिलेगी।
योजना में क्या-क्या शामिल है?
मुख्य प्रावधान
- ₹6,450 करोड़ — पांच वर्षों तक बिक्री आधारित प्रोत्साहन (Incentives)
- ₹750 करोड़ — पूंजी सब्सिडी (Capital Subsidy)
- कुल उत्पादन क्षमता: 6,000 MTPA
इसके जरिए उन यूनिट्स को विकसित किया जाएगा जो पूरी प्रक्रिया संभालेंगी..
- रेयर अर्थ ऑक्साइड से धातु बनाना
- धातुओं से मिश्रधातु तैयार करना
- अंतिम उत्पाद — शक्तिशाली स्थायी चुंबक तैयार करना
यह पूर्ण एंड-टू-एंड क्षमता भारत में पहली बार विकसित होगी।
कितनी यूनिटें बनेंगी?
- कुल 5 यूनिट्स स्थापित की जाएँगी
- प्रत्येक यूनिट की क्षमता: 1,200 MTPA
- चयन प्रक्रिया: वैश्विक प्रतिस्पर्धी बोली (Global Competitive Bidding)
समयसीमा और महत्व
योजना कितने समय चलेगी?
- कुल अवधि: 7 वर्ष
- पहले 2 वर्ष: उत्पादन इकाइयों की स्थापना
- अगले 5 वर्ष: बिक्री आधारित प्रोत्साहनों का लाभ
यह योजना क्यों अहम है?
भारत में REPMs की मांग..
- 2025 की तुलना में 2030 तक दोगुनी होने की उम्मीद
- EV सेक्टर, अक्षय ऊर्जा, उद्योग और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स में तेज़ वृद्धि इसका मुख्य कारण है
लाभ
- भारत की सप्लाई चेन मजबूत होगी
- आयात पर निर्भरता कम होगी
- वैश्विक रेयर-अर्थ सप्लाई जोखिम से सुरक्षा मिलेगी
भारत के ऊर्जा परिवर्तन (Energy Transition) और Net Zero 2070 लक्ष्य में तेजी आएगी
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