निलाविलक्कु विवाद: फातिमा तहलिया के दीप प्रज्ज्वलन पर समस्ता की आपत्ति.. कहा, गैर-इस्लामी धार्मिक प्रथाओं से रहें दूर
केरल में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) की विधायक Fathima Thahiliya द्वारा पारंपरिक ‘निलाविलक्कु’ (दीप प्रज्ज्वलन) करने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब और गहरा गया है। इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए Samastha Kerala Jamiyyathul Ulama की केंद्रीय मुशावरा (परामर्श परिषद) ने मुसलमानों से ऐसी रस्मों और समारोहों में भाग लेने से बचने का
केरल में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) की विधायक Fathima Thahiliya द्वारा पारंपरिक ‘निलाविलक्कु’ (दीप प्रज्ज्वलन) करने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब और गहरा गया है। इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए Samastha Kerala Jamiyyathul Ulama की केंद्रीय मुशावरा (परामर्श परिषद) ने मुसलमानों से ऐसी रस्मों और समारोहों में भाग लेने से बचने का आह्वान किया है, जिनका इस्लामी शिक्षाओं में कोई आधार नहीं है और जो अन्य धर्मों की धार्मिक परंपराओं से जुड़ी मानी जाती हैं।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में पेराम्ब्रा से विधायक फातिमा तहलिया की कुछ तस्वीरें और वीडियो सामने आए थे, जिनमें वह अपने निर्वाचन क्षेत्र में एक रेस्तरां के उद्घाटन समारोह के दौरान पारंपरिक दीपक (निलाविलक्कु) जलाती दिखाई दीं।
इस घटना के बाद उनकी पार्टी के कुछ नेताओं और समर्थकों ने आलोचना की, जबकि धार्मिक और सामाजिक हलकों में यह बहस छिड़ गई कि क्या इस प्रकार का कार्य इस्लाम की दृष्टि से स्वीकार्य है।
समस्ता की केंद्रीय बैठक में हुई चर्चा
गुरुवार को कोझिकोड में आयोजित केंद्रीय मुशावरा की बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता संगठन के प्रमुख Sayyid Muhammad Jifri Muthukoya Thangal ने की।
समस्ता के आधिकारिक मुखपत्र Suprabhatham में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, परिषद ने कहा कि निलाविलक्कु जलाने की परंपरा ऐतिहासिक रूप से गैर-मुस्लिम समुदायों द्वारा धार्मिक अनुष्ठान के रूप में निभाई जाती रही है।
इस्लामी दृष्टिकोण पर समस्ता का मत
परिषद ने स्पष्ट किया कि:
- यदि कोई मुसलमान दीप प्रज्ज्वलन जैसी रस्म में इस विश्वास के साथ भाग लेता है कि उससे जुड़े धार्मिक सिद्धांत सही हैं, और वे इस्लाम की शिक्षाओं के विपरीत हैं, तो यह स्थिति धर्मत्याग (अपोस्टेसी) तक मानी जा सकती है।
- यदि कोई व्यक्ति ऐसे विश्वास के बिना केवल गैर-मुस्लिम परंपराओं की नकल करते हुए यह कार्य करता है, तब भी इसे इस्लामी दृष्टि से अनुचित और पापपूर्ण माना जाएगा।
- हालांकि, यदि निलाविलक्कु का उपयोग केवल प्रकाश के साधन के रूप में किया जाए और उससे कोई धार्मिक महत्व न जोड़ा जाए, तो यह स्वीकार्य है।
सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की अपील
मुशावरा परिषद ने यह भी कहा कि सांप्रदायिक सौहार्द, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। साथ ही मुसलमानों से आग्रह किया गया कि वे ऐसे धार्मिक मामलों को हल्के में न लें और इस्लामी सिद्धांतों के प्रति सजग रहें।
समस्ता नेता की अप्रत्यक्ष टिप्पणी
इस विवाद से पहले समस्ता के वरिष्ठ नेता Abdul Hameed Faizi Ambalakkadavu ने फेसबुक पर एक पोस्ट लिखकर अप्रत्यक्ष रूप से फातिमा तहलिया की आलोचना की थी।
बिना किसी का नाम लिए उन्होंने लिखा, "नेतृत्व की जिम्मेदारी संभालने वाले लोग धर्म की सीमाएं लांघ रहे हैं। जिन्हें उन्हें सुधारना चाहिए, वे चुप हैं और गलतियों को सही ठहराने में लगे हैं। पैगंबर का यह कथन कितना सही था कि एक समय ऐसा आएगा जब गलत को सही समझा जाने लगेगा।"
वीएचपी ने किया समर्थन
दूसरी ओर, Vishwa Hindu Parishad की नेता K P Sasikala ने फातिमा तहलिया का समर्थन किया है।
राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज
फातिमा तहलिया द्वारा दीप प्रज्ज्वलन का यह मामला अब केवल एक धार्मिक बहस तक सीमित नहीं रह गया है। यह मुद्दा धार्मिक पहचान, सांस्कृतिक परंपराओं, सार्वजनिक जीवन में धार्मिक प्रतीकों की भूमिका और विभिन्न समुदायों के बीच सामाजिक सहभागिता जैसे व्यापक प्रश्नों को भी सामने ला रहा है।
जहां समस्ता इसे इस्लामी सिद्धांतों से जुड़ा विषय मान रही है, वहीं कुछ लोग इसे केरल की साझा सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक सौहार्द का हिस्सा बता रहे हैं। ऐसे में यह विवाद आने वाले दिनों में भी राज्य की राजनीति और सामाजिक विमर्श का महत्वपूर्ण विषय बना रह सकता है।
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