नॉर्वे शतरंज में इतिहास रचने के बाद प्रज्ञानानंदा का मजेदार बयान: "अभी मैं गुस्से में हूं, पहले कुछ खाऊंगा"
भारतीय ग्रैंडमास्टर R Praggnanandhaa ने नॉर्वे शतरंज टूर्नामेंट जीतकर इतिहास रच दिया है। 19 वर्षीय प्रज्ञानानंदा इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता का खिताब जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। हालांकि इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद जब उनसे जश्न की योजनाओं के बारे में पूछा गया, तो उनका जवाब बेहद दिलचस्प और मजेदार..
भारतीय ग्रैंडमास्टर R Praggnanandhaa ने नॉर्वे शतरंज टूर्नामेंट जीतकर इतिहास रच दिया है। 19 वर्षीय प्रज्ञानानंदा इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता का खिताब जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। हालांकि इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद जब उनसे जश्न की योजनाओं के बारे में पूछा गया, तो उनका जवाब बेहद दिलचस्प और मजेदार था।
उन्होंने हंसते हुए कहा, "अभी मैं गुस्से में हूं, इसलिए शायद पहले कुछ खाने जाऊंगा।"
चार लगातार जीत के दम पर बने चैंपियन
टूर्नामेंट की शुरुआत प्रज्ञानानंदा के लिए उतार-चढ़ाव भरी रही, लेकिन अंतिम चरण में उन्होंने शानदार वापसी करते हुए लगातार चार क्लासिकल मुकाबले जीत लिए और खिताब अपने नाम कर लिया।
अंतिम दौर में उन्होंने जर्मनी के Vincent Keymer को हराया। हालांकि केवल अपनी जीत से उन्हें खिताब नहीं मिलता। उन्हें यह भी उम्मीद करनी थी कि अमेरिकी ग्रैंडमास्टर Wesley So अपने मुकाबले में या तो हारें या क्लासिकल गेम ड्रॉ करें।
वेस्ली सो और Alireza Firouzja के बीच क्लासिकल मुकाबला ड्रॉ रहा और मैच आर्मगेडन तक पहुंचा। इससे प्रज्ञानानंदा की उम्मीदें बनी रहीं।
दूसरे मैच पर भी थी नजर
प्रज्ञानानंदा ने बताया कि वे अपने मुकाबले के साथ-साथ वेस्ली सो और फिरोजा के मैच पर भी नजर रख रहे थे।
उन्होंने कहा, "मैं उस मैच पर नजर रख रहा था लेकिन वह मेरे नियंत्रण में नहीं था। मेरा पूरा ध्यान अपने खेल पर था। लगातार चार जीत के बाद भी अगर मैं टूर्नामेंट नहीं जीत पाता, तो भी ठीक था। मेरा लक्ष्य सिर्फ अपना सर्वश्रेष्ठ खेलना था।"
‘चार लगातार जीत? मैंने कभी सोचा भी नहीं था’
आर्मगेडन में जीत के बाद वेस्ली सो ने कहा था कि प्रज्ञानानंदा के लगातार चार क्लासिकल मैच जीतने की संभावना सिर्फ एक प्रतिशत थी।
इस पर भारतीय खिलाड़ी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "एक प्रतिशत भी काफी उदार अनुमान है। अगर टूर्नामेंट से पहले मुझसे पूछा जाता तो मैं कहता कि बस एक मैच जीतना चाहता हूं। इतने मजबूत खिलाड़ियों के बीच लगातार चार जीत की मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी।"
वापसी का राज क्या था?
जब उनसे पूछा गया कि दूसरे चरण में अचानक उनका प्रदर्शन इतना शानदार कैसे हो गया, तो उन्होंने किसी जादुई फॉर्मूले से इनकार किया।
प्रज्ञानानंदा ने कहा कि उन्होंने समय प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया और तेजी से चालें चलने की कोशिश की। उन्होंने कहा,"मैं पहले हिस्से में भी अच्छा खेल रहा था लेकिन कुछ चीजें मेरे पक्ष में नहीं गईं। बाद में मैंने समय का बेहतर उपयोग करने और तेज खेलने पर ध्यान दिया। इससे खेल पर मेरा नियंत्रण बढ़ा।"
पसंदीदा जीत कौन सी रही?
प्रज्ञानानंदा के लिए टूर्नामेंट की सबसे यादगार जीत चुनना आसान नहीं था।
उन्होंने कहा कि अंतिम दो राउंड के मुकाबले बेहद खास रहे।
- एक मुकाबले में उन्होंने काले मोहरों से जबरदस्त दबाव झेलते हुए जीत हासिल की।
- जबकि विन्सेंट कीमर के खिलाफ अंतिम मुकाबले को उन्होंने "साफ-सुथरा और उच्च गुणवत्ता वाला खेल" बताया।
मैग्नस कार्लसन और गुकेश का प्रदर्शन
इस टूर्नामेंट में पूर्व विश्व चैंपियन Magnus Carlsen का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा। हालांकि उन्होंने मौजूदा विश्व चैंपियन D Gukesh के खिलाफ दोनों क्लासिकल मुकाबले जीतकर चौथा स्थान हासिल किया।
मां की भविष्यवाणी हुई सच
प्रज्ञानानंदा ने एक भावुक पारिवारिक किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि 1 जून को उनकी मां से बातचीत हुई थी और उनकी मां ने कहा था कि जून का महीना उनके लिए शुभ साबित होगा।
प्रज्ञानानंदा ने मुस्कुराते हुए कहा, "उन्होंने कहा था कि जून आ गया है इसलिए सब अच्छा होगा। अब ट्रॉफी जीतने के बाद लगता है कि इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता था।"
अब क्या है अगला लक्ष्य?
लगातार कई बड़े टूर्नामेंट खेलने के बाद प्रज्ञानानंदा ने स्वीकार किया कि वे काफी थक चुके हैं। उन्होंने कहा कि इस साल वे पिछले वर्ष की तुलना में थोड़ा हल्का कार्यक्रम रखना चाहते हैं।
उनकी अगली प्रतियोगिता World Rapid Team Championship होगी, जहां वे Ramesh Chess Gurukul टीम का प्रतिनिधित्व करेंगे। इसके बाद वे कुछ समय का विश्राम भी लेंगे।
भारत में बढ़ रही शतरंज की लोकप्रियता
प्रज्ञानानंदा ने खुशी जताई कि भारत में शतरंज की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है और इस वर्ष नॉर्वे शतरंज का प्रसारण भी भारत में किया गया।
उन्होंने कहा कि यदि भारतीय खिलाड़ियों की उपलब्धियां और अधिक लोगों को शतरंज की ओर आकर्षित करती हैं, तो यह उनके लिए बेहद खुशी की बात होगी।
नॉर्वे शतरंज का खिताब जीतकर प्रज्ञानानंदा ने न केवल अपने करियर की सबसे बड़ी सफलता हासिल की है, बल्कि भारतीय शतरंज के स्वर्णिम भविष्य की एक और मजबूत तस्वीर भी पेश की है।
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