‘रबर की परत’: श्रीलंका के भानुका राजपक्षे का आरोप—भारतीय खिलाड़ी क्रिकेट में ‘खास बैट’ इस्तेमाल करते हैं, इसे बताया खुला राज़..!
श्रीलंका के बल्लेबाज़ भानुका राजपक्षे ने भारतीय क्रिकेटरों पर ‘खास बैट’ (स्पेशल बैट) इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि भारतीय खिलाड़ियों के बैट से असामान्य रूप से ज्यादा ताकत पैदा होती है, जिससे क्रिकेट जगत में एक नयी बहस छिड़..
श्रीलंका के बल्लेबाज़ भानुका राजपक्षे ने भारतीय क्रिकेटरों पर ‘खास बैट’ (स्पेशल बैट) इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि भारतीय खिलाड़ियों के बैट से असामान्य रूप से ज्यादा ताकत पैदा होती है, जिससे क्रिकेट जगत में एक नयी बहस छिड़ गई है।
यह बयान आईसीसी पुरुष टी20 वर्ल्ड कप 2026 में कोलंबो में खेले गए मुकाबले में श्रीलंका की आयरलैंड पर 20 रन की जीत के बाद सामने आया। राजपक्षे की टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि भारतीय बल्लेबाज़ों के पास ऐसा उपकरण हो सकता है, जो उन्हें अनुचित बढ़त देता है।
ICC के नियम क्या कहते हैं
आईसीसी के नियमों के मुताबिक, क्रिकेट बैट सिर्फ लकड़ी का ही बना होना चाहिए, उसमें किसी अन्य सामग्री का इस्तेमाल प्रतिबंधित है। बैट के आकार और सामग्री को लेकर भी सख्त सीमाएं तय हैं।
बैट के भीतर किसी भी तरह का छिपा हुआ या ताकत बढ़ाने वाला पदार्थ आईसीसी नियमों का उल्लंघन है। ऐसे उल्लंघनों का पता अंतरराष्ट्रीय मैचों के दौरान नियमित निरीक्षण के जरिए लगाया जाता है।
‘ऐसा लगता है जैसे रबर की परत लगी हो’
भानुका राजपक्षे ने कहा, “भारतीय खिलाड़ियों के पास ऐसे बैट हैं जो हमें मिलने वाले सबसे बेहतरीन बैट से भी कहीं बेहतर हैं। ऐसा महसूस होता है जैसे उनमें रबर की एक परत लगा दी गई हो। मुझे समझ नहीं आता कि ऐसा कैसे संभव है। ये बैट दूसरों के लिए खरीदे ही नहीं जा सकते, सभी खिलाड़ी यह जानते हैं।”
‘दूसरे ये बैट खरीद नहीं सकते’: क्या यह सच है?
एक अर्थ में यह बात सच है लेकिन जैसा राजपक्षे इशारा कर रहे हैं, वैसा नहीं। पेशेवर क्रिकेटर अक्सर “प्लेयर एडिशन” बैट इस्तेमाल करते हैं, जो दुकानों में बिकने वाले सामान्य बैट से अलग होते हैं। ये बैट खिलाड़ी की व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार तैयार किए जाते हैं।
उदाहरण के लिए, अभिषेक शर्मा का बैट सिर्फ उनके लिए होता है, किसी और के लिए नहीं। हर बैट को खिलाड़ी के स्विंग, ताकत और टाइमिंग के अनुसार आकार, वजन और बैलेंस में ढाला जाता है।
मसलन, विराट कोहली और रोहित शर्मा को डकबिल प्रोफाइल वाले बैट पसंद हैं। उनके बैट का वजन बेहद सटीक होता है, जिससे पिक-अप और नियंत्रण बेहतर रहता है।
CIEL स्पोर्ट्स के अनुसार, रोहित के बैट में ‘मिड-टू-लो स्वेल डिज़ाइन’ होता है। वहीं कोहली के बैट में ऊंची और मोटी स्पाइन होती है, जो नीचे की ओर जल्दी पतली (फ्लैट टो) हो जाती है।
ब्रांड दिखते हैं, बैट कोई और बनाता है
हालांकि बैट पर SG, SS, MRF या CEAT जैसे ब्रांड लिखे होते हैं लेकिन जरूरी नहीं कि वही कंपनी बैट का निर्माण भी करे। आईसीसी नियम किसी भी पंजीकृत स्पॉन्सर को अपने ब्रांड का लोगो बैट पर लगाने की अनुमति देते हैं, भले ही बैट का निर्माण SG, SS, BDM या BAS जैसे विशेषज्ञ निर्माता कर रहे हों।
यही वजह है कि विराट कोहली या रोहित शर्मा जैसे स्टार खिलाड़ियों के इस्तेमाल वाले सटीक बैट आम खरीदारों को बाजार में शायद ही मिलते हैं।
कानूनी तौर पर यह व्यवस्था वैध है क्योंकि बैट आंशिक रूप से विज्ञापन माध्यम भी होता है,
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