पाकिस्तानी सेना प्रमुख मुनीर ने खुद को सम्मानित किया, सियासी नेताओं को भी बंटे इनाम..भारत पर ‘जीत’ का दावा..!
पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने खुद को ही देश का दूसरा सर्वोच्च वीरता पदक हिलाल-ए-जुर्रत (भारत के महावीर चक्र के बराबर) प्रदान कर दिया है। यह घोषणा पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस पर..
इस्लामाबाद/नयी दिल्ली। पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने खुद को ही देश का दूसरा सर्वोच्च वीरता पदक हिलाल-ए-जुर्रत (भारत के महावीर चक्र के बराबर) प्रदान कर दिया है। यह घोषणा पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस पर की गई।
मुनीर को यह सम्मान अप्रैल–मई में भारत के साथ हुए हालिया संघर्ष (ऑपरेशन सिंदूर व पाकिस्तानी ऑपरेशन बुनयानुम मारसूस व मार्का-ए-हक) में उनकी "नेतृत्व क्षमता, साहस और देशभक्ति" के लिए दिया गया।
पृष्ठभूमि
- 22 अप्रैल को पाहलगाम आतंकी हमलों के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया।
- पाकिस्तान ने इसे "मार्का-ए-हक" (सत्य की लड़ाई) करार देते हुए अपनी ‘निर्णायक जीत’ बताया।
- इसके बाद इस ‘जीत’ के नाम पर राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व को बड़े पैमाने पर सम्मानित किया गया।
सम्मानित हुए प्रमुख नाम
- एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्दू व नेवल चीफ एडमिरल नावेद अशरफ – निशान-ए-इम्तियाज़ (मिलिट्री)
- जनरल साहिर शमशाद मिर्ज़ा (जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी प्रमुख) – निशान-ए-इम्तियाज़
- ISI प्रमुख ले. जनरल मुहम्मद असीम मलिक, DG ISPR ले. जनरल अहमद शरीफ चौधरी, DG मिलिट्री इंटेलिजेंस मेजर जनरल वाजिद अज़ीज़ समेत कई खुफिया और ऑपरेशनल अफसर – हिलाल-ए-इम्तियाज़ (मिलिट्री)
- गृहमंत्री मोहित्सन नक़वी – निशान-ए-इम्तियाज़ (आंतरिक सुरक्षा बनाए रखने के लिए)
- PPP चेयरमैन बिलावल भुट्टो ज़रदारी – निशान-ए-इम्तियाज़ (अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की पैरवी करने के लिए)
- उनके साथ गए कूटनीतिक दल – शेरी रहमान, हिना रब्बानी खार, मुसादिक मलिक, खुर्म दास्तगीर, फैसल सुबज़वारी, तहमीना जानजुआ, जलिल अब्बास जिलानी आदि – हिलाल-ए-इम्तियाज़
अन्य पुरस्कार
- 8 सितारा-ए-जुर्रत
- 5 तमगा-ए-जुर्रत
- 24 सितारा-ए-बसालत
- 45 तमगा-ए-बसालत
- 146 इम्तियाज़ी असनाद (mentions in dispatches)
- 259 COAS प्रशंसा पत्र
इस समारोह को पाकिस्तान सरकार ने "भारत पर कूटनीतिक और सैन्य जीत का उत्सव" बताया। यह कदम पाकिस्तान की घरेलू राजनीति और सेना के मनोबल को साधने की कोशिश माना जा रहा है, लेकिन भारत में इसे "स्वयं को सम्मानित करने की नाटकीयता" करार दिया जा रहा है।
What's Your Reaction?