पाकिस्तान का सबसे बड़ा जैकपॉट? बलूचिस्तान की ज़मीन के नीचे छिपा 70 अरब डॉलर का खज़ाना
आर्थिक तंगी से जूझ रहा पाकिस्तान अब अपनी उम्मीदें दुनिया के सबसे बड़े अप्रयुक्त तांबा और सोने के भंडारों में से एक पर टिका रहा है। बलूचिस्तान के रेको डिक (Reko Diq) खदान परियोजना के विकास के लिए एशियाई विकास बैंक (ADB) 410 मिलियन डॉलर का वित्तीय पैकेज देने जा रहा..
नयी दिल्ली। आर्थिक तंगी से जूझ रहा पाकिस्तान अब अपनी उम्मीदें दुनिया के सबसे बड़े अप्रयुक्त तांबा और सोने के भंडारों में से एक पर टिका रहा है। बलूचिस्तान के रेको डिक (Reko Diq) खदान परियोजना के विकास के लिए एशियाई विकास बैंक (ADB) 410 मिलियन डॉलर का वित्तीय पैकेज देने जा रहा है। यह जानकारी सूत्रों ने दी।
परियोजना का विशाल पैमाना
- कुल निवेश: 6.6 अरब डॉलर
- पहले चरण में उत्पादन लक्ष्य: 2 लाख मीट्रिक टन तांबा प्रति वर्ष
- आगे चलकर लक्ष्य: 4 लाख टन तक
- अनुमानित मुक्त नकदी प्रवाह (Free Cash Flow): 70 अरब डॉलर (37 वर्षों में)
- हिस्सेदारी: कनाडाई कंपनी बैरिक गोल्ड (Barrick Gold) – 50%, पाकिस्तान की केंद्र व प्रांतीय सरकारें – 50%
पाकिस्तान के लिए उम्मीद की किरण
इस्लामाबाद के लिए यह परियोजना ऐसे समय में आई है जब देश लगातार IMF के बेलआउट पैकेज, गिरते रुपये और बढ़ते कर्ज़ से परेशान है। अधिकारियों का मानना है कि रेको डिक खदान वैश्विक निवेशकों को पाकिस्तान के लगभग अप्रयुक्त खनिज क्षेत्र (Mineral Sector) की ओर आकर्षित करने का मंच बन सकती है, जिसमें भविष्य में रेयर अर्थ धातुओं की खोज भी शामिल हो सकती है।
फंडिंग का ढाँचा
- ADB पैकेज:
- 300 मिलियन डॉलर का ऋण बैरिक गोल्ड को
- 110 मिलियन डॉलर की गारंटी पाकिस्तान सरकार को
- इसके अलावा, डेवलपर्स अमेरिकी Export-Import Bank, Export Development Canada और जापान के JBIC से बातचीत कर रहे हैं।
- पहले ही विश्व बैंक की IFC से 700 मिलियन डॉलर की फंडिंग हासिल की जा चुकी है।
उत्पादन और भविष्य की योजना
- उत्पादन शुरू होने की उम्मीद: 2028 से
- बैरिक गोल्ड का अनुमान है कि 37 साल की तय अवधि से भी आगे यह खदान अपग्रेड और नई खोजों के सहारे जारी रह सकती है।
लंबा इंतज़ार और चुनौतियाँ
- कानूनी विवादों के कारण यह परियोजना वर्षों तक अटकी रही थी, जिसका समाधान 2022 में हुआ।
- अब रेको डिक खदान वास्तव में आगे बढ़ रही है।
- पाकिस्तान के लिए यह एक तरफ आर्थिक जीवनरेखा है, तो दूसरी ओर यह एक जोखिमभरा दांव भी है, क्योंकि देश का राजनीतिक और आर्थिक माहौल अस्थिर बना हुआ है।
सुरक्षा चुनौती
खदान बलूचिस्तान में स्थित है, जो लंबे समय से हिंसक विरोध-प्रदर्शनों का गढ़ रहा है। यहाँ कई बार रेलवे इन्फ्रास्ट्रक्चर तक पर हमले हुए हैं। ऐसे में परियोजना की सुरक्षा बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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