‘वोट चोरी’ के आरोपों के बीच कांग्रेस ने चुनाव आयोग की बैठकों का बहिष्कार किया
‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर चुनाव आयोग (EC) पर लगातार हमलावर रही कांग्रेस पार्टी अब आयोग की बैठकों से दूर हो गई है। पिछले साढ़े तीन महीनों से मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों के शीर्ष नेतृत्व के साथ चुनाव आयोग द्वारा की जा रही संरचित बैठकों में कांग्रेस अकेली राष्ट्रीय पार्टी है जिसने भाग नहीं..
नयी दिल्ली। ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर चुनाव आयोग (EC) पर लगातार हमलावर रही कांग्रेस पार्टी अब आयोग की बैठकों से दूर हो गई है। पिछले साढ़े तीन महीनों से मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों के शीर्ष नेतृत्व के साथ चुनाव आयोग द्वारा की जा रही संरचित बैठकों में कांग्रेस अकेली राष्ट्रीय पार्टी है जिसने भाग नहीं लिया।
कांग्रेस का रुख
चुनाव आयोग ने सोमवार को प्रेस नोट में कहा, “15 मई, 2025 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के अध्यक्ष को बैठक का आमंत्रण दिया गया था। पार्टी ने इसे स्थगित करने का अनुरोध किया और बाद की तिथियों के लिए आयोग के संपर्क का कोई जवाब नहीं दिया।”
राहुल गांधी पर निशाना
- राहुल गांधी ने हाल ही में एक अखबार में लिखे लेख में आरोप लगाया था कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मतदाता सूची में गड़बड़ी और शाम 5 बजे के बाद असामान्य रूप से बढ़े मतदान की घटनाएँ हुईं।
- इसके बाद चुनाव आयोग ने उन्हें 12 जून को बैठक के लिए आमंत्रित किया, लेकिन राहुल गांधी की ओर से कोई जवाब नहीं आया।
- इस बीच राहुल गांधी बिहार में अपनी “वोटर अधिकार यात्रा” निकाल रहे हैं और 65 लाख नामों के विलोपन का मुद्दा उठा रहे हैं।
चुनाव आयोग की सफाई
- EC ने सोमवार को कहा कि उसने पहले ही 7.2 करोड़ मतदाताओं की ड्राफ्ट मतदाता सूची में से 99.1% के दस्तावेज़ प्राप्त कर लिए हैं।
- जहाँ तक 65 लाख हटाए गए नामों का सवाल है, उस पर अब तक केवल 1.4 लाख दावे और आपत्तियाँ (लगभग 2%) आई हैं।
- इनमें से केवल 10 आपत्तियाँ कांग्रेस के बूथ-स्तरीय एजेंटों से आई हैं, बाकी सीधे मतदाताओं ने दाखिल की हैं।
आयोग की पहल
पिछले छह महीनों में चुनाव आयोग ने 28,000 प्रतिनिधियों से संवाद किया है..
- 4,719 बैठकें आयोजित हुईं
- 40 बैठकें मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) ने लीं
- 800 बैठकें जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEOs) ने लीं
- 3,879 बैठकें मतदाता पंजीकरण अधिकारियों (EROs) ने लीं
- इसके बाद मई में 6 राष्ट्रीय दलों में से 5 के प्रमुखों और जुलाई-अगस्त में 17 राज्य दलों के नेताओं से मुलाकात कर उनके मुद्दे सुने गए।
चुनाव आयोग ने कहा,“ये सक्रिय बैठकें आयोग की नई पहल हैं। यह पहल सभी हितधारकों के साथ मौजूदा कानूनी ढाँचे के अनुरूप चुनाव प्रक्रिया को और मजबूत करने की आयोग की व्यापक दृष्टि से मेल खाती है।”
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