आरबीआई का ऋण पूर्वभुगतान शुल्क और प्री-पेमेंट पेनल्टी खत्म करने का प्रस्ताव
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक मसौदा परिपत्र जारी किया है, जिसमें बैंकों को निर्देश दिया गया है कि वे ऋण पूर्वभुगतान (फोरक्लोज़र) शुल्क और प्री-पेमेंट पेनल्टी न लगाएं।
नयी दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक मसौदा परिपत्र जारी किया है, जिसमें बैंकों को निर्देश दिया गया है कि वे ऋण पूर्वभुगतान (फोरक्लोज़र) शुल्क और प्री-पेमेंट पेनल्टी न लगाएं।
इसका मतलब यह है कि यदि कोई उधारकर्ता फ्लोटिंग रेट लोन को समय से पहले चुकाना चाहता है या पूरी तरह से खत्म करना चाहता है, तो बैंक उस पर कोई अतिरिक्त शुल्क या पेनल्टी नहीं लगा पाएगा।
क्या कहा गया है मसौदा परिपत्र में?
आरबीआई द्वारा 21 फरवरी को जारी किए गए मसौदा परिपत्र में कहा गया है, "वर्तमान दिशानिर्देशों के अनुसार, कुछ विनियमित संस्थाओं (REs) को व्यक्तिगत उधारकर्ताओं को व्यवसाय के अलावा किसी अन्य उद्देश्य के लिए स्वीकृत फ्लोटिंग रेट टर्म लोन पर पूर्वभुगतान शुल्क या पेनल्टी लगाने की अनुमति नहीं है, चाहे वे एकल उधारकर्ता हों या सह-आवेदक के साथ।"
आरबीआई ने इस मसौदे पर अंतिम दिशानिर्देश जारी करने से पहले 21 मार्च 2025 तक जनता और अन्य हितधारकों से सुझाव और प्रतिक्रिया मांगी है।
सूक्ष्म और लघु उद्यमों (MSE) के लिए राहत
आरबीआई ने इस मसौदे में सूक्ष्म और लघु उद्यमों (MSEs) के लिए आसान और सस्ती वित्तीय पहुंच को जरूरी बताया है। इसके तहत, बैंकों को गैर-व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए सभी फ्लोटिंग रेट लोन के पूर्वभुगतान या फोरक्लोज़र की अनुमति बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के देनी होगी।
इसके अलावा, केंद्रीय बैंक ने कहा है कि "टियर 1 और टियर 2 शहरी सहकारी बैंक (Primary Urban Co-operative Banks) और बेस लेयर NBFCs को छोड़कर, अन्य सभी विनियमित संस्थाओं को व्यक्तियों और MSE उधारकर्ताओं को दिए गए फ्लोटिंग रेट लोन के फोरक्लोज़र/प्री-पेमेंट पर कोई शुल्क या पेनल्टी नहीं लगानी चाहिए।"
हालांकि, MSE उधारकर्ताओं के लिए यह नियम केवल 7.50 करोड़ रुपये तक के कुल स्वीकृत ऋण सीमा पर लागू होगा।
बैंकों की अनियमित प्रथाओं पर आरबीआई की सख्ती
आरबीआई ने पाया कि कुछ विनियमित संस्थाएं MSE ऋणों पर फोरक्लोज़र शुल्क लगाने के लिए विभिन्न तरीके अपनाती हैं।
आरबीआई ने यह भी उल्लेख किया कि "कुछ संस्थाओं द्वारा ऋण अनुबंधों में ऐसे प्रतिबंधात्मक प्रावधान जोड़े गए हैं, जिनका उद्देश्य उधारकर्ताओं को दूसरे बैंक में स्थानांतरित होने से रोकना है, जिससे वे कम ब्याज दर या बेहतर सेवाओं का लाभ नहीं उठा पाते हैं।"
इस मसौदा परिपत्र के लागू होने के बाद उधारकर्ताओं को अपनी पसंद के अनुसार ऋण चुकाने और बैंक बदलने की अधिक स्वतंत्रता मिलेगी।
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