"भारत में रहने का अधिकार केवल नागरिकों को.." सुप्रीम कोर्ट का रोहिंग्या पर बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने 8 मई को रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थियों के दिल्ली से कथित निर्वासन के मामले में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि यदि भारत में रह रहे रोहिंग्या अवैध विदेशी पाए जाते हैं, तो उन्हें निर्वासित किया जाएगा
नयी दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने 8 मई को रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थियों के दिल्ली से कथित निर्वासन के मामले में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि यदि भारत में रह रहे रोहिंग्या अवैध विदेशी पाए जाते हैं, तो उन्हें निर्वासित किया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि भारत में निवास का अधिकार केवल भारतीय नागरिकों को प्राप्त है, और विदेशी नागरिकों के मामले Foreigners Act के तहत निपटाए जाएंगे।
मुख्य बिंदु
- याचिकाकर्ता वरिष्ठ वकील कोलिन गोंसाल्वेस और प्रशांत भूषण ने अपील की कि रोहिंग्या म्यांमार में नरसंहार से भागे हैं और उन्हें संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी मान्यता प्राप्त है।
- उनका तर्क था कि UNHCR द्वारा जारी शरणार्थी कार्ड उन्हें भारत में रहने का अधिकार देता है।
केंद्र सरकार और कोर्ट की दलीलें
- सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि रोहिंग्या विदेशी हैं और भारत उन्हें शरणार्थी के रूप में मान्यता नहीं देता।
- उन्होंने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी सम्मेलन (UN Refugee Convention) का सदस्य नहीं है, इसलिए UNHCR की मान्यता भारत के लिए बाध्यकारी नहीं है।
- उन्होंने यह भी बताया कि पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने असम और जम्मू-कश्मीर से रोहिंग्या के निर्वासन को रोकने से इनकार किया था।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
- जस्टिस सूर्यकांत, दीपांकर दत्ता, और एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा, “भारत में कहीं भी निवास करने का अधिकार केवल भारतीय नागरिकों को है। विदेशी नागरिकों के मामलों का निर्णय Foreigners Act के तहत किया जाएगा।”
- हालांकि कोर्ट ने माना कि अनुच्छेद 21 (जीवन के अधिकार) का दायरा रोहिंग्याओं पर भी लागू होता है, फिर भी उन्हें विदेशी माना जाएगा।
अगली सुनवाई
कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई 2025 को निर्धारित की है।
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