चीन का खतरा और सैन्य सुधार: नए CDS राजा सुब्रमणि के सामने बड़ी चुनौतियां
भारत सरकार द्वारा जनरल एनएस राजा सुब्रमणि को अगले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) के रूप में नियुक्त किए जाने के बाद अब ध्यान भारतीय सेना के लंबे समय से लंबित सैन्य पुनर्गठन पर केंद्रित हो गया है। यह प्रक्रिया उनके पूर्ववर्ती जनरल अनिल चौहान द्वारा शुरू की गई थी, जिसका..
भारत सरकार द्वारा जनरल एनएस राजा सुब्रमणि को अगले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) के रूप में नियुक्त किए जाने के बाद अब ध्यान भारतीय सेना के लंबे समय से लंबित सैन्य पुनर्गठन पर केंद्रित हो गया है। यह प्रक्रिया उनके पूर्ववर्ती जनरल अनिल चौहान द्वारा शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य सेना को एकीकृत थिएटर कमांड संरचना में बदलना है।
वर्तमान में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार के रूप में कार्यरत जनरल सुब्रमणि 31 मई को CDS का पदभार संभालेंगे। उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब थिएटर कमांड का पूरा खाका तैयार हो चुका है और सरकार की अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रहा है।
शीर्ष रक्षा सूत्रों के अनुसार, जनरल सुब्रमणि के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी — “उस ढांचे को खड़ा करना जिसकी नींव जनरल अनिल चौहान ने रखी थी।”
थिएटर कमांड का ब्लूप्रिंट तैयार
मौजूदा CDS जनरल अनिल चौहान ने सेना, नौसेना और वायुसेना प्रमुखों के साथ मिलकर एकीकृत थिएटर कमांड का प्रारूप तैयार किया है। इस मसौदे में तीन प्रमुख थिएटर कमांड प्रस्तावित किए गए हैं:
- उत्तरी थिएटर कमांड
- पश्चिमी थिएटर कमांड
- समुद्री (मेरिटाइम) थिएटर कमांड
इनका उद्देश्य अलग-अलग भौगोलिक खतरों का सामना करना और संयुक्त युद्ध क्षमता को मजबूत बनाना है।
यह प्रस्ताव पिछले दो वर्षों से चर्चा में था और इसमें तीनों सेनाओं द्वारा उठाई गई चिंताओं पर लंबी विचार-विमर्श प्रक्रिया चली। अब यह मसौदा कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रहा है। मंजूरी मिलने के बाद इसे लागू करने की मुख्य जिम्मेदारी नए CDS पर होगी।
नए CDS के सामने तीन प्रमुख प्राथमिकताएं
सरकारी सूत्रों ने बताया कि जनरल सुब्रमणि का कार्यकाल मुख्य रूप से तीन महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर केंद्रित रहेगा।
आधुनिक युद्ध में तीनों सेनाओं के बीच तालमेल
आज के युद्ध तेजी से बदल रहे हैं। वे छोटे समय के, तकनीक-आधारित और बहु-आयामी (मल्टी-डोमेन) होते जा रहे हैं। ऐसे में नए CDS की प्राथमिकता सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच बेहतर परिचालन समन्वय स्थापित करना होगी।
इसके तहत निम्न कदम शामिल होंगे:
- संयुक्त सैन्य योजना
- साझा संचार नेटवर्क
- एकीकृत लॉजिस्टिक्स व्यवस्था
ताकि थल, जल, वायु, अंतरिक्ष और साइबर क्षेत्र में बिना बाधा के संयुक्त अभियान चलाए जा सकें।
आत्मनिर्भरता पर जोर
भविष्य के युद्धों की तैयारी के लिए रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाना भी नई प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।
जनरल सुब्रमणि से उम्मीद है कि वे निम्न क्षेत्रों में स्वदेशीकरण को तेज करेंगे:
- अत्याधुनिक हथियार
- ड्रोन तकनीक
- AI आधारित सैन्य प्रणालियां
- इलेक्ट्रॉनिक युद्ध उपकरण
इसके लिए CDS, DRDO, रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों और निजी उद्योगों के साथ मिलकर काम करेंगे, ताकि आयात पर निर्भरता कम हो और मजबूत घरेलू रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जा सके।
भविष्य के युद्धों की तैयारी
युद्ध तकनीक तेजी से बदल रही है। ड्रोन स्वार्म, लोइटरिंग म्यूनिशन, हाइपरसोनिक हथियार और अंतरिक्ष आधारित सैन्य प्रणालियां युद्ध की प्रकृति बदल रही हैं।
ऐसे में नए CDS को भविष्य के युद्धों के लिए व्यापक रणनीति तैयार करनी होगी, जिसमें शामिल होंगे:
- साइबर युद्ध क्षमता
- अंतरिक्ष युद्ध तैयारी
- सूचना युद्ध (इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर)
थिएटर कमांड और चीन-पाकिस्तान चुनौती
थिएटर कमांड को स्वतंत्रता के बाद भारत का सबसे बड़ा सैन्य सुधार माना जा रहा है। इसका उद्देश्य वर्तमान 17 अलग-अलग सेवा कमांडों की जगह संयुक्त कमांड व्यवस्था स्थापित करना है, जो एक ही ऑपरेशनल कमांडर के अधीन काम करेंगी।
इस बदलाव से..
- संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा
- दोहराव कम होगा
- चीन और पाकिस्तान से आने वाले खतरों पर तेज और समन्वित प्रतिक्रिया संभव होगी
हालांकि कई जटिल चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं, जैसे..
- सैन्य संसाधनों का बंटवारा
- संयुक्त स्टाफ संरचना बनाना
- अधिकारियों को त्रि-सेवा भूमिकाओं के लिए प्रशिक्षित करना
जनरल राजा सुब्रमणि क्यों माने जा रहे हैं उपयुक्त
जनरल एनएस राजा सुब्रमणि को उत्तरी और पूर्वी दोनों सैन्य क्षेत्रों में परिचालन अनुभव प्राप्त है, इसलिए उन्हें इन चुनौतियों से निपटने के लिए उपयुक्त माना जा रहा है।
सेना प्रमुख के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने “जॉइंटमैनशिप” यानी तीनों सेनाओं के संयुक्त संचालन पर विशेष जोर दिया था।
“भारत शक्ति” और “तरंग शक्ति” जैसे सैन्य अभ्यासों में सेना, नौसेना और वायुसेना की क्षमताओं को एकीकृत कमांड के तहत संचालित किया गया था, जिसे भविष्य की थिएटर कमांड प्रणाली का प्रारंभिक मॉडल माना जा रहा है।
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