भोजशाला मामले में मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट जाएगा, भाजपा नेताओं ने फैसले का किया स्वागत
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा धार स्थित विवादित भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर घोषित किए जाने के फैसले को मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी शुरू..
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा धार स्थित विवादित भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर घोषित किए जाने के फैसले को मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी शुरू कर दी है। वहीं भाजपा नेताओं और हिंदू संगठनों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे ऐतिहासिक बताया।
मुस्लिम पक्ष के वकील Ashar Warsi ने कहा, “हम हाईकोर्ट के फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। हम जल्द से जल्द सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती देंगे।”
उन्होंने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा भोजशाला परिसर का कराया गया वैज्ञानिक सर्वे और उसकी रिपोर्ट, जिस पर हाईकोर्ट ने भरोसा किया, “त्रुटिपूर्ण” है।
हाईकोर्ट ने क्या कहा
Madhya Pradesh High Court की इंदौर पीठ ने भोजशाला संरचना के धार्मिक स्वरूप को देवी वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर घोषित किया। अदालत का यह फैसला काफी हद तक सुप्रीम कोर्ट के 2019 के Ayodhya Verdict में अपनाए गए सिद्धांतों पर आधारित माना जा रहा है।
अदालत ने ASI के 7 अप्रैल 2003 के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को हर शुक्रवार परिसर में नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी।
वकील अशर वारसी ने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट मुस्लिम पक्ष की दलीलों पर विचार करेगा और परिसर में नमाज की अनुमति बहाल करेगा।
विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया
Asaduddin Owaisi ने भी फैसले की आलोचना करते हुए X पर लिखा कि उन्हें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट इस आदेश को पलटेगा।
उन्होंने कहा, “इस फैसले में बाबरी मस्जिद मामले के फैसले जैसी कई समानताएं हैं। अदालत ने 1935 के धार स्टेट गजट, 1985 की वक्फ पंजीकरण प्रक्रिया और पूजा स्थल अधिनियम की अनदेखी की। अदालत ने शीर्षक विवाद से जुड़े लंबित सिविल मुकदमे को भी नजरअंदाज किया।”
कांग्रेस विधायक Arif Masood ने कहा कि फैसला मुख्य रूप से ASI सर्वे रिपोर्ट पर आधारित है, जिस पर पहले ही मस्जिद समिति सवाल उठा चुकी थी।
वहीं Communist Party of India (Marxist-Leninist) Liberation ने कहा कि यह फैसला “पूजा स्थल अधिनियम की भावना पर चोट” है।
भाजपा और हिंदू संगठनों में उत्साह
भाजपा विधायक Rameshwar Sharma ने हाईकोर्ट के फैसले को हिंदुत्व की जीत बताया। उन्होंने कहा, “आक्रमणकारियों ने मंदिरों को तोड़ा और धार्मिक ग्रंथों को जलाया था। इस फैसले ने धार्मिक स्थलों और देवी-देवताओं का सम्मान पुनर्स्थापित किया है।”
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता RP Singh ने कहा कि फैसला अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों पर आधारित है।
उन्होंने कहा, “पुरातत्व विभाग ने ऐसे तथ्य और प्रमाण पेश किए जिनसे साबित हुआ कि यह देवी सरस्वती का मंदिर था। पूरा देश इस फैसले का स्वागत करता है।”
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के सदस्य और याचिकाकर्ता Ashish Goyal ने भी फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि भोजशाला को संस्कृत विद्यालय और सरस्वती मंदिर मानने के पर्याप्त ऐतिहासिक प्रमाण लंबे समय से मौजूद थे।
उन्होंने यह भी कहा कि अब अगला लक्ष्य लंदन से देवी सरस्वती की प्रतिमा को वापस लाना है। साथ ही लोगों से सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट न करने की अपील भी की।
धार में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
फैसले के बाद धार जिले में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। अधिकारियों के अनुसार भोजशाला परिसर को सील कर दिया गया है, बैरिकेडिंग लगाई गई है और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।
धार के पुलिस अधीक्षक Sachin Sharma ने कहा, “पूरे धार शहर में 12 स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। रिजर्व पुलिस फोर्स और रैपिड एक्शन फोर्स को अलर्ट पर रखा गया है। 5 जून तक निषेधाज्ञा लागू रहेगी।”
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