चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून पर सुनवाई टालने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार की उस मांग को खारिज कर दिया, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया से भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को हटाने वाले कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई टालने..

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून पर सुनवाई टालने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
07-05-2026 - 10:47 AM

नयी दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार की उस मांग को खारिज कर दिया, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया से भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को हटाने वाले कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई टालने की अपील की गई थी।

केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल Tushar Mehta ने अदालत से सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि वह सबरीमला मामले की सुनवाई कर रही नौ-न्यायाधीशों की संविधान पीठ के समक्ष व्यस्त हैं और इस मामले में बहस शुरू होने के समय स्वयं उपस्थित रहना चाहते हैं।

हालांकि, न्यायमूर्ति Dipankar Datta ने यह अनुरोध ठुकराते हुए कहा कि यह मामला “बेहद महत्वपूर्ण” है और इसकी सुनवाई की तारीख काफी पहले तय की जा चुकी थी।

अदालत ने कहा, अगर आपने एक सप्ताह पहले बताया होता तो हम समायोजन कर सकते थे। लेकिन हमने यह सुनवाई एक महीने पहले तय की थी… आपके सहयोगी आज नोट्स ले सकते हैं। याचिकाकर्ताओं को अपनी दलीलें शुरू करने दीजिए। सभी मामले महत्वपूर्ण होते हैं।”

पीठ ने सबरीमला मामले में आई एक टिप्पणी का भी जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि जनहित याचिका (PIL) शायद सुनवाई योग्य नहीं थी। अदालत ने इस आधार पर स्थगन की मांग की तात्कालिकता पर सवाल उठाया।

2023 के कानून को चुनौती

याचिकाओं में वर्ष 2023 के उस कानून को चुनौती दी गई है, जिसने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने वाले चयन पैनल की संरचना बदल दी थी।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल होंगे। लेकिन नए कानून में मुख्य न्यायाधीश की जगह प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय मंत्री को शामिल कर दिया गया।

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह बदलाव नियुक्ति प्रक्रिया का संतुलन सरकार के पक्ष में झुका देता है, जबकि चुनाव आयोग का दायित्व स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है।

मुख्य न्यायाधीश ने खुद को सुनवाई से अलग किया

यह मामला शुरुआत में मुख्य न्यायाधीश Surya Kant की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सूचीबद्ध था। हालांकि बाद में उन्होंने संभावित हितों के टकराव का हवाला देते हुए खुद को इस मामले की सुनवाई से अलग कर लिया।

एक पिछली सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा था, क्या मुझे यह मामला सुनना भी चाहिए? शायद कोई मुझ पर हितों के टकराव का आरोप लगा दे।”

याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता Prashant Bhushan ने सुझाव दिया कि इस मामले की सुनवाई ऐसी पीठ करे, जिसमें कोई भी न्यायाधीश भविष्य में मुख्य न्यायाधीश बनने की कतार में न हो। मुख्य न्यायाधीश ने इस सुझाव से सहमति जताते हुए मामले को उसी अनुसार सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।Top of Form

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।