देशभर में पेट्रोल-डीजल के दामों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी, महंगाई बढ़ने की आशंका
देशभर में शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी गई। तेल कंपनियों द्वारा जारी नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं। इस फैसले के बाद आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ बढ़ने की आशंका जताई..
नयी दिल्ली। देशभर में शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी गई। तेल कंपनियों द्वारा जारी नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं। इस फैसले के बाद आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार दिल्ली में पेट्रोल 97.77 रुपए प्रति लीटर और डीजल के दाम बढ़ाकर 90.67 रुपए कर दिये गये हैं। इसी तरह सीएनजी के दाम भी करीब दो रुपये प्रति किलो बढ़ाये गये हैं। नये रेट आज 15 मई से लागू हो गये हैं।
कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल काफी महंगा हो गया है। अमेरिका, इजयरायल और ईरान के बीच युद्ध की आशंकाओं के मद्देनजर कच्चा तेल 70 से 100 डॉलर पार कर गया है। यही वजह है कि इन परिस्थितियों का भारतीय तेल कंपनियों पर बढ़ा लागत दबाव बढ़ता जा रहा था। इस दबाव को कम करने के लिए पेट्रोल-डीजल के दामों में वृद्धि का फैसला किया गया है।
आगे और महंगाई की आशंका
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर परिवहन लागत पर पड़ेगा, जिससे खाद्य पदार्थों, सब्जियों, फल, निर्माण सामग्री और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका प्रभाव आने वाले दिनों में महंगाई दर पर भी दिखाई दे सकता है।
आर्थिक मामलों के जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अपेक्षाकृत स्थिरता के बावजूद पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाना आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने जैसा है। इससे मध्यम वर्ग, किसान और छोटे व्यापारियों की परेशानियां बढ़ेंगी।
कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी का असर सबसे ज्यादा परिवहन और कृषि क्षेत्र पर पड़ता है। डीजल महंगा होने से माल ढुलाई की लागत बढ़ेगी, जिसका असर बाजार में वस्तुओं की खुदरा कीमतों पर दिखाई देगा।
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि यदि आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दाम और बढ़ते हैं, तो घरेलू बाजार में ईंधन कीमतों में और वृद्धि की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं विपक्षी दलों ने सरकार से उत्पाद शुल्क और वैट में राहत देकर आम जनता को राहत देने की मांग की है।
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