परिवर्तन स्थायी है और अहंकार का अंत अनिवार्य है..!

पश्चिम बंगाल की जनता ने आखिरकार अपना निर्णायक फैसला सुना दिया है। ममता बनर्जी की टीएमसी (TMC) की तानाशाही, भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी का 14 साल लंबा और दमनकारी अध्याय समाप्त हो गया। भाजपा की प्रचंड जनलहर ने “माँ-माटी-मानुष” के नाम पर चले लूट के उस साम्राज्य को ध्वस्त कर दिया है, जिसने बंगाल की गरिमा को धूल में मिला

परिवर्तन स्थायी है और अहंकार का अंत अनिवार्य है..!
05-05-2026 - 03:49 PM
05-05-2026 - 04:26 PM

पश्चिम बंगाल की जनता ने आखिरकार अपना निर्णायक फैसला सुना दिया है। ममता बनर्जी की टीएमसी (TMC) की तानाशाही, भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी का 14 साल लंबा और दमनकारी अध्याय समाप्त हो गया। भाजपा की प्रचंड जनलहर ने “माँ-माटी-मानुष” के नाम पर चले लूट के उस साम्राज्य को ध्वस्त कर दिया है, जिसने बंगाल की गरिमा को धूल में मिला दिया था।

यह जीत सिर्फ एक राजनीतिक दल की नहीं बल्कि बंगाल के उस हर नागरिक की है जो सालों से अत्याचार, सिंडिकेट राज और भय के माहौल में जीने को मजबूर था। अब EVM या केंद्रीय बलों (CRPF) को दोष देने का समय निकल चुका है; टीएमसी के पतन के कारण उनके अपने कर्मों में छिपे हैं।

1. पुलिस थानों में 'TMC लिमिटेड' का राज

ममता बनर्जी के शासन में पुलिस महकमा स्वतंत्र इकाई न रहकर पूरी तरह टीएमसी के कैडर में तब्दील हो चुका था। एक आम नागरिक जब अपनी फरियाद लेकर थाने पहुंचता था, तो थानेदार उसकी सुनने के बजाय स्थानीय टीएमसी गुंडों को बुला लेता था। वहां न्याय नहीं बल्कि 'समझौता' होता था जिसमें शिकायतकर्ता को ही डरा-धमकाकर केस वापस लेने पर मजबूर किया जाता था।

संदेशखाली कांड

इसका सबसे वीभत्स चेहरा है। शेख शाहजहां, शिबू हजरा और उत्तम सरदार जैसे दरिंदों ने महिलाओं का यौन शोषण किया और गरीबों की जमीनें हड़पीं। वहां की महिलाओं ने चीख-चीख कर बताया कि कैसे पुलिस अपराधियों को बचाने के लिए पीड़ितों की जानकारी उन तक पहुंचा देती थी।

2. अभिषेक बनर्जी और कोयला-रेत का 'लूट तंत्र'

बंगाल में परिवारवाद की नयी मिसाल बने ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों ने टीएमसी की चूलें हिला दीं। ईस्टर्न कोलफील्ड्स (कुनुस्तोरिया-कजोरा) से लाखों टन कोयला चोरी कर सैकड़ों करोड़ का जो खेल खेला गया, उसमें अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी रुजिरा बनर्जी का नाम सीधे तौर पर जुड़ा।

ED और CBI की जांच में यह साफ हुआ कि कैसे राज्य की प्राकृतिक संपदा (कोयला, रेत और मवेशी) को एक संगठित माफिया के जरिए लूटा गया। भाजपा द्वारा जारी ऑडियो क्लिप्स ने जनता के सामने स्पष्ट कर दिया था कि बंगाल की सत्ता अब विकास के लिए नहीं बल्कि धन-उगाही के कारखाने के रूप में इस्तेमाल हो रही थी।

3. शिक्षक भर्ती घोटाला: मेधावी युवाओं का भविष्य नीलाम:

टीएमसी शासन का सबसे बड़ा पाप था—WBSSC 2016 शिक्षक भर्ती घोटाला। कलकत्ता हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरी चयन प्रक्रिया को “Fraud और Manipulation” करार दिया। 25,753 नियुक्तियाँ रद्द होना इस बात का प्रमाण था कि यहाँ नौकरियां योग्यता पर नहीं बल्कि टीएमसी के फंड में दिए गए 'कट मनी' के आधार पर बांटी गईं। लाखों योग्य युवा जो सालों से सड़कों पर संघर्ष कर रहे थे, उनके आंसुओं ने इस सरकार की विदाई की नींव रखी।

4. अवैध घुसपैठ और वोट बैंक की खतरनाक राजनीति

ममता बनर्जी पर सबसे गंभीर आरोप बांग्लादेश से होने वाली करोड़ों घुसपैठियों को संरक्षण देने का था। सत्ता बचाए रखने के लिए आधार, राशन कार्ड और वोटर आईडी का 'गिफ्ट' देकर घुसपैठियों को बसाया गया।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने भी माना कि सीमावर्ती क्षेत्रों में संदिग्ध दस्तावेजों के जरिए भारतीय नागरिकता पाना बेहद आसान हो गया है। इस जनसांख्यिकीय बदलाव (Demographic Change) ने बंगाल की स्थानीय संस्कृति, सुरक्षा और संसाधनों पर भारी बोझ डाला। यह साफ तौर पर तुष्टिकरण की वह राजनीति थी जिसने राष्ट्र की सुरक्षा को दांव पर लगा दिया।

5. सांप्रदायिक असंतुलन और बहुसंख्यक समाज पर प्रहार:

टीएमसी ने सत्ता के लिए 'सेकुलरिज्म' का जो चोला पहना था, उसके पीछे हिंदुओं पर अत्याचार की एक लंबी कहानी थी। रामनवमी के जुलूसों पर पत्थरबाजी, मंदिरों पर हमले और हिंदू त्योहारों के दौरान लगने वाली पाबंदियों ने जनता को आक्रोशित कर दिया। मुर्शिदाबाद और संदेशखाली जैसी घटनाओं में जिस तरह एक विशेष वर्ग को खुली छूट दी गई, उसने बंगाल को सांप्रदायिक रूप से विभाजित कर दिया।

6. महिला सुरक्षा का खोखला नारा:

माँ-माटी-मानुष” का नारा देने वाली दीदी के राज में महिलाएं सबसे अधिक असुरक्षित रहीं। संदेशखाली में जो हुआ वह तो केवल एक झांकी थी; पूरे बंगाल में चुनावी रैलियों से लेकर घरों के भीतर तक महिलाओं को टीएमसी के गुंडों ने निशाना बनाया। जब मुख्यमंत्री स्वयं महिला होने के बावजूद पीड़ितों के बजाय अपराधियों के साथ खड़ी दिखीं, तो बंगाल की माताओं-बहनों ने सत्ता परिवर्तन का संकल्प ले लिया।

7. तानाशाही

पश्चिम बंगाल में किसी कॉलेज यूनिवर्सिटी या सार्वजनिक स्थान पर यदि आप टीएमसी के खिलाफ कुछ भी बोलते हैं तो तुरंत टीएमसी के गुंडे आप पर हमला कर देंगे और आपको अस्पताल जाना पड़ेगा पुलिस कोई कार्यवाही नहीं करेगी।

निष्कर्ष: "बस बहुत हुआ!"

2021 में मिली जीत के अहंकार में टीएमसी ने पिछले 5 सालों में लूट और आतंक की जो पराकाष्ठा पार की, उसका हिसाब आज जनता ने बराबर कर दिया है। सुवेंदु अधिकारी और भाजपा के लाखों कार्यकर्ताओं की मेहनत ने साबित कर दिया कि लोकतंत्र में गुंडागर्दी के दिन गिनती के होते हैं।

अब बंगाल में कानून का राज होगा। अब बंगाल में सिंडिकेट नहीं, उद्योग आएंगे। अब 'जय श्री राम' कहने पर जेल नहीं भेजा जाएगा। यह एक नये, विकसित और सुरक्षित बंगाल का उदय है।

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वेद माथुर वेद माथुर पंजाब नेशनल बैंक के सेवानिवृत्त महाप्रबंधक हैं। उनके द्वारा लिखा गया व्यंग्य उपन्यास बैंक ऑफ पोलंपुर बेहद लोकप्रिय है। माथुर राजनीतिक विश्लेषक हैं और समसामयिक विषयों पर आपके लेख नामचीन पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं।